चंद्रकांत देवताले: साधारणता के वैभव का कवि

chandrakant devtale, hindi poet, filmbibo
साठोत्तरी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर चंद्रकांत देवताले। (तस्वी- हिन्दी वेबदुनिया से साभार)

आज 15 अगस्त को को हिन्दी के वरिष्ठ कवि चंद्रकांत देवताले का निधन हो गया। देवताले का जन्म सात नवंबर 1936 को बैतूल में हुआ था। उन्हें साठोत्तरी कविता का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता था। अक्टूबर 2008 में हिन्दुस्तान दैनिक में उनके प्रतिनिधि संग्रह की निम्न समीक्षा प्रकाशित हुई थी। यह संग्रह “जहाँ थोड़ा-सा सूर्योदय होगा” संवाद प्रकाशन मेरठ से प्रकाशित हुआ था। इस समीक्षा की मूल प्रति लेखक के पास नहीं है। पेश है, अखबार में प्रकाशित संपादित अंश।

रंगनाथ 

हिन्दी आलोचना कमोबेश अलोकतांत्रिक और व्यक्तिकेंद्रित रही है। हिन्दी के ज्यादातर बड़े आलोचक अपने छंटनी किए कुछ कवियों के पैरोकार नजर आते हैं। समानधर्मा पर मुग्ध होना क्षम्य है, लेकिन अन्य महत्वपूर्ण कवियों को नज़रअंदाज करना अक्षम्य अपराध है। आलोचना गाँव का विभाजन अज्ञेय पूजक टोला, मुक्तिबोध पूजक टोला, तुलसी पूजक टोला, कबीर पूजक टोला के रूप में किया जा सकता है। स्थिति यह है कि आलोच विशेष अगर किसी कवि की तारीफ कर दे तो दूसरा गिरोह तुरत-फुरत उस कवि को क्षुद्रतम घोषित करके उसके बरक्स किसी अन्य समकालीन कवि को खड़ा करने में अपनी शान समझता है। लेकिन इतना सब होने के बावजूद इन परस्पर विरोधी गिरोहों में एक आंतरिक एकता है। इसी एकता के हत कुछ कवियों को सचेत रूप से हाशिये पर रखा जाता है। हिन्दी आलोचना के भूपतियों द्वारा हाशिये पर ढकेले गए कवियों में एक कवि हैं, चंद्रकांत देवताले। एक सशक्त नैसर्गिक कवि को हाशिये पर धकेलने की वजह जानने के लिए उस कवि की एक हालिया कविता का पाठ करना काफी होगा-

ऐसे जिन्दा रहने से नफरत है मुझे

जिसमें हर कोई आए और मुझे अच्छा कहे

मैं हर किसी की तारीफ करते भटकता रहूँ

मेरे दुश्मन न हों

और इसे मैं अपने हक़ में बड़ी बात मानूँ

जहाँ प्रशंसा का कारोबार होता है वहाँ ऐसे तेवर वाले कवि को कोई क्यों सराहेगा? और शायद देवताले का यही तेवर उन्हें एक बड़े कवि का कद देता है। एक ऐसा कवि जो हर वक्त अपना आत्मगौरव बचाए रख सका।

देवताले की कविताओं को पढ़ते हुए लगता है जैसे कविताओं में जनतंत्र आ गया है। बस में सफर करती आदिवासी बच्ची, कूड़ा बीनते बाकी बच्चे, बालम ककड़ी बेचने वाली लड़कियां, लाल कलगी वाला मुर्गा, रोटी सेंकती पत्नी, राशन की कतार में खड़े पिता, “खाना परोसती माँ” को अपना प्रतिनिधित्व दावताले की कविताओं में मिलता है। लोक जीवन देवताले की कविताओं में स्थायी भाव की तरह परसा हुआ है। हिन्दी में नागार्जुन के अतिरिक्त कोई दूजा कवि न होगा जिसकी तुलना इस मामले में देवताले से की जा सके। शमशेर को कवियों को कवि कहा गया। मुक्तिबोध को बुद्धिजीवियों का कहना अनुचित न होगा। इस क्रम में देवताले को साधारण जन का कवि कहना उचित ही होगा। ऐसा कवि जिसने जनकवि नागार्जुन के गंवई उत्तराधिकार को कस्बाई रंग देकर आगे बढ़ाया है। जीवन के प्रवाह में वह जो गद्य के सख्त हाथों से फिसल जाती है, पकड़ में नहीं आता। उन्हीं महीन बातों में देवताले ने अपनी कविताएँ बुनी हैं। पृथ्वी और स्त्री को लेकर  को जो वैभव देवताले की कविताओं में मिला है।

हिन्दी कविता में उसका दूसरा उदाहरण नहीं मिलेगा। हाँ, स्पैनिश कवि पॉब्लो नेरूदा जरूर याद आते हैं। पृथ्वी और स्त्री से दोनों को बराबर प्यार है। नेरूदा में समुद्री तूफान से खेलते रोमांच प्रेमी नाविक का स्वर है। वहीं देवताले में किसी पहाड़ी नदी में अपनी छोटी सी नाव खेवते मांझी का भाव है। प्राकृतिक जीवन की गन्ध दोनों में खूब है। पपीते का पेड़ और पत्थर की बेंच जैसे साधारण शब्दों का असाधारण कवित्वपूर्ण प्रयोग करने में देवताले को महारत है। शीशम के सफेद फूल, नींबू के फूल, महुे के फूल में बसे लोक के सौंदर्यबोध को कविता में जगह दिलाना उनकी सबसे बड़ी विशेषता है।

देवताले की पीढ़ी के कवि सामाजिक परिवर्तन में मुखर भूमिका निभाने का जज्बा लेकर आए थे। फूल, चांद, नदी, आकाश को प्रेम करने वाले इन कवियों को मानवीय दुःख-दर्द, दुर्दशा ने कहीं गहरे उद्धेलित किया। देवताले इसके अपवाद नहीं। लकड़बग्घा हँस रहा है, कुछ बच्चे और बाकी बच्चे जैसी उनकी कविताएँ अपने कयम की कल्चरल क्रिटिक बन चुकी हैं। उनकी कविता पूरी दृढ़ता से जनता के जायज मानवीय अधिकारों की माँग करती है। संक्षेप में कहें तो देवताले की कविताएँ कविता से की गई उम्मीदों पर खरी उतरती हैं। हमारे अंदर जो कुछ मधुर, तिक्त या स्निग्ध है, उसे अपने अंदर पूरी ईमानदारी से बरतती हैं।

किसी बड़े कवि से परिचय के लिए उसाक प्रतिनिधि संग्रह मुफीद जरिया है। जिनके पास किताबें पढ़ने के लिए ज्यादा फुरसत नहीं उनके लिए प्रतिनिधि संग्रह का आना और भी सुखद होता है। सभी तरह के पाठकों के तथा आलोचकों को ऐसे चयनित संग्रहों का इंतजार रहता है।