अनारकली ऑफ आरा बॉक्स ऑफिस: समीक्षकों ने बांधे तारीफों के पुल, दर्शकों ने दिखायी बेरुखी

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अनारकली ऑफ आरा का लेखन और निर्देशन पूर्व पत्रकार अविनाश दास ने किया है।

अनारकली ऑफ आरा को समीक्षकों से जितनी तारीफ मिल रही है उतनी आम दर्शकों से नहीं मिल रही है। 24 मार्च को रिलीज हुई अनारकली ऑफ आरा ने अब तक कुल 47 लाख रुपये की कमायी की है। रिलीज के पहले दिन फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर बुरा हाल रहा था और इसने महज 10 लाख रुपये कमाए। ज्यादातर समीक्षकों और खास तौर पर सोशल मीडिया पर फिल्म को मिली वाहवाही के बाद दर्शकों की संख्या थोड़ी बढ़ी है लेकिन शायद ये फिल्म अपनी लागत निकालने में कामयाब नहीं हो पाएगी। फिल्म के प्रोड्यूसर संदीप कपूर ने कोईमोई डॉट कॉम को बताया था कि इसका बजट करीब चार करोड़ रुपये है।

फिल्म के लेखक और निर्देशक अनिवाश दास हैं। अनारकली ऑफ आरा उनकी पहली फिल्म है। फिल्म में मुख्य भूमिका स्वरा भाष्कर, पंकज त्रिपाठी, संजय मिश्रा और इश्तियाक खान ने निभायी है। फिल्म बिहार के आरा की रहने वाली नाचनेवाली अनारकली की कहानी है। इलाके के एक विश्वविद्यालय के वाइस-चांसलर अनारकली के चाहने वाले हैं। वीसी शराब के नशे में एक दिन सार्वनजिक कार्यक्रम के दौरान अनारकली के साथ बदतमीजी करता है। अनारकली इसका तीखा प्रतिवाद करती है। यहाँ से ये कहानी एक ताकतवर इंसान और सामान्य स्त्री के संघर्ष की कहानी में बदल जाती है।

वीसी से दुश्मनी अनारकली को भारी पड़ती है और उसे आरा छोड़ना पड़ता है। आरा छोड़कर वो दिल्ली पहुंचती है और सिंगर के तौर पर नया करियर शुरू करने की कोशिश करती है। पहले ही प्रयास में उसे बड़ी सफलता मिलती है लेकिन ये कामयाबी भी उसके लिए हानिकारक साबित होती है और वीसी और उसके लोगों को पता चल जाता है कि अनारकली कहाँ है। पुलिस की मदद से वीसी दिल्ली में भी अनारकली को तंग करवाने लगता है। बेबस अनारकली इस पूरी लड़ाई को अंतिम मकाम तक पहुचाने की ठानती है और आरा वापस आती है। अनारकली जिस तरह वीसी से बदला लेती है वही फिल्म की उपलब्धि है।

फिल्म के कई गाने आकर्षक हैं। “मोर पिया मतलब का यार” चर्चित भी हुआ है। सोनू निगम का गाया “मिट्टी जिस्म की” गाना काफी मेलोडियस है लेकिन इसे उतनी चर्चा नहीं मिली जितनी मिलनी चाहिए थे। गीतों के बोल काफी अच्छे हैं लेकिन संगीत थोड़ा बेहतर होता तो ये गीत ज्यादा सफल होते।

जिस तरह समीक्षक और आम दर्शक इस फिल्म को लेकर परस्पर दो छोरों पर नजर आ रहे हैं उसे देखते हुए यही कहा जा सकता है कि फिल्म अच्छी है या बुरी इसका फैसला आप खुद करें।