‘आर्टिकल 15’ ने पूरे किए एक साल, आयुष्मान खुराना ने सोशल मीडिया पर शेयर किया वीडियो

‘आर्टिकल 15’ क्राइम थ्रिलर फिल्म थी जिसका निर्देशन अनुभव सिन्हा ने किया था और आयुष्मान खुराना लीड रोल में नज़र आए थे। गुलाबो सिताबों के एक्टर आयुष्मान खुराना ने सोशल मीडिया पर लिखा ‘इंपोर्टेंट फिल्म ऑफ 2019’ साथ ही एक वीडियो भी शेयर किया। वीडियो में फिल्म के कुछ सीन्स हैं।

‘आर्टिकल 15’ 2019 में रिलीज़ हुई बेहतरीन फिल्मों में से एक थी। यह फिल्म समाज में फैले जातिवाद के कड़वे सच को शांति से बयां कर देती है। यह फिल्म 2019 के सफल फिल्मों में से एक रही।

आर्टिकल 15 में आयुष्मान खुराना के एक ईमानदार पुलिस अफ़सर के किरदार को खूब सराहा गया था। उन्हें इस किरदार के लिए बेस्ट एक्टर इन क्रिटिक 65 फ़िल्मफेयर अवार्ड भी दिया गया।

सच्ची घटना पर आधारित 

अनुभव सिन्हा की यह फिल्म 2014 में बदायूं (उत्तर प्रदेश)में हुए दो बहनों के सामूहिक रेप और हत्या के केस पर आधारित थी । 27 मई 2014 को 14 और 15 साल की दो चचेरी बहनों की लाश एक आम के पेड़ की दो अलग- अलग शाखाओं से टंगी हुई मिली थी। फिल्म में इसी दृश्य को पोस्टर के तौर पर इस्तेमाल भी किया गाय था।

फिल्म में आयुष्मान खुराना एक अधिकार से बैठकर बात करते हैं,
“सर ये तीन लड़कियां अपनी दिहाड़ी में सिर्फ़ तीन रुपए अधिक मांग रही थीं
सिर्फ़ तीन रुपए…
जो मिनरल वाटर आप पी रहे हैं, उसके दो या तीन घूंट के बराबर,
उनकी इस ग़लती की वजह से उनका रेप हो गया,
उनको मारकर पेड़ पर टांग दिया गया ताकि पूरी जाति को उनकी ‘औक़ात’ याद रहे.”
आर्टिक्ल 15 जैसी फिल्में बॉलीवुड में हमें कम ही देखने को मिलती है। यह फिल्म समाज के ऐसे कई पहलुओं को हमारे सामने लाती है जिस पर हम बात नहीं करते, सोचते नहीं हैं। जातिवाद हमारे समाज का लंबे समय से हिस्सा रहा है जिससे निकालने में हमें शायद और भी कई साल लग जाए। शहरों में शायद हम इसे इस तरह नहीं देखते हैं लेकिन गाँव में आज भी लोग जातिवाद जैसी रूढ़ियों से ग्रस्त हैं।

क्या है आर्टिक्ल 15

भारत सबसे बड़ा लोकतान्त्रिक देश है। इस लोकतन्त्र में संविधान हमें कुछ अधिकार देता है। भारतीय संविधान के भाग 3 में अनुछेद 12 से 35 तक मूल अधिकारों (fundamental rights) का वर्णन है। आर्टिकल 15 कहता है कि, राज्य अपने किसी नागरिक के साथ धर्म, जाती, लिंग, नस्ल और जन्म स्थान के आधार पर विभेद नहीं करेगा।