प्रेमनाथ: ‘सर जूडा’ का कैरेक्टर आज भी याद है लोगों को

साल 1947 में आजादी के बाद सिनेमा भी जवान होने लगा. देवानंद, दिलीप कुमार और राजकपूर अपने अंदाज से फिल्म के नए कलेवर को दर्शकों के सामने रख रहे थे. यही वो दौर था जब नायकों के साथ खलनायकों की भूमिका भी फिल्मों में बड़े सार्थक तरीके से पेश की जाती थी और यही कारण था कि फिल्मों में नायकों के साथ-साथ चरित्र अभिनेता भी सिनेमा के पर्दे पर अपनी एक अमीट छाप छोड़ने लगे. इसमें हम याद करें तो कन्हैया लाल, केएन सिंह, प्राण और प्रेमनाथ का नाम सबसे पहले आता है.

आज हम बात करेंगे अभिनेता प्रेमनाथ की. प्रेमनाथ का जन्म पाकिस्तान के पेशावर में 21 नवंबर 1926 को हुआ था. आजादी से पहले उनके पिता मध्य प्रदेश की रीवा स्टेट में पुलिस आधिकारी होकर आए और आईजी के रूप में रिटायर हुए. प्रेमनाथ के सात भाई और चार बहने थीं. पिता के रिटायर होने के बाद उनका परिवार जबलपुर आ गया.

प्रेमनाथ को बचपन के दिनों से ही अभिनय का शौक था. प्रेमनाथ का पृथ्वीराज कपूर से बेहद निकट और पारिवारिक संबंध था. प्रेमनाथ के पिता ने अपनी बेटी कृष्णा नाथ की शादी पृथ्वीराज कपूर के बड़े बेट राजकपूर से की. वहीं प्रेमनाथ की दूसरी बहन उमानाथ की शादी प्रेम चोपड़ा से हुई थी. दोनों बहनों की शादी के बाद प्रेमनाथ फिल्मों में भविष्य तलाशने जबलपुर से मुंबई आ गए. यहां उन्हें पृथ्वी थियेटर में काम मिल गया. जब प्रेमनाथ ने फ़िल्मों में भी पैर जमा लिए तो उन्होंने अपने छोटे भाई राजेंद्रनाथ को अपने पास बुला लिया, जिन्होंने बाद में हास्य कलाकार के तौर पर अपनी पहचान बनाई.

प्रेमनाथ ने साल 1948 में रिलीज हुई फिल्म ‘अजित’ से फिल्मी करियर की शुरूआत की. लेकिन इस फिल्म से दर्शकों के बीच कोई खास पहचान नहीं बना सके. प्रेमनाथ को साल 1948 में राजकपूर ने अपनी फिल्म ‘आग’ में काम दिया और उसके बाद साल 1949 में फिल्म ‘बरसात’ में काम दिया. इन दोनों फिल्मों की सफलता से प्रेमनाथ को भी फिल्म इंडस्ट्री में पहचान मिली.

साल 1953 में फिल्म ‘औरत’ में काम करने के समय प्रेमनाथ को अभिनेत्री बीना राय से प्यार हो गया, बाद में प्रेम नाथ ने बीना राय से शादी कर ली. इसके बाद प्रेमनाथ ने बीना राय के साथ मिलकर फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रखा और पीएन फिलम्स की नींव रखी. पीएन फिल्म्स ने ‘शगूफा’, ‘प्रिजनर ऑफ गोलकुंडा’, ‘समुंदर’ और ‘वतन’ जैसी फिल्मों का निर्माण किया लेकिन लगभग-लगभग सभी फिल्में फिल्म बॉक्स आफिस पर फेल हो गईं.

इसके बाद प्रेमनाथ ने फिर से अभिनय का रूख किया लेकिन इस बार अभिनेता की बजाए खलनायक के रूप में पारी शुरू की. साल 1970 में देवानंद की फिल्म आई ‘जॉनी मेरा नाम’. इस फिल्म में दर्शकों ने देवानंद, हेमा मालिनी के साथ-साथ प्रेमनाथ के किरदार को भी पसंद किया.

साल 1974 में राजकपूर की सुपरहिट फिल्म ‘बॉबी’ में उन्होंने फिल्म अभिनेत्री डिपल कपाड़िया के पिता की भूमिका निभाई. इस फिल्म में दमदार अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के फिल्म फेयर अवार्ड के लिए नामांकित किया गया. इसके अलावा प्रेमनाथ ने साल 1972 में ‘शोर’, 1974 में ‘अमीर गरीब’ और ‘रोटी, कपड़ा और मकान’ जैसी फिल्मों में शानदार अभिनय किया.

दर्शकों ने साल 1975 में प्रदर्शित फिल्म ‘धर्मात्मा’ में प्रेमनाथ के अभिनय का नया रूप देखा. हॉलीवुड फिल्म ‘गॉडफादर’ से प्रेरित इस फिल्म में प्रेमनाथ ने अंडरवर्ल्ड डॉन के अपने किरदार धरमदास धर्मात्मा को सिनेमा के पर्दे पर जीवंत कर दिया.

साल 1980 में सुभाष घई की फिल्म ‘कर्ज’ को भला कौन भुल सकता है. उस फिल्म में प्रेमनाथ ने ‘सर जूडा’ का ऐसा किरदार अदा किया, जो आज भी खलनायकों के लिए बड़ा चैलेंज है. 80 के दशक में प्रेमनाथ का स्वास्थ्य खराब रहने लगा, जिसकी वजह से प्रेमनाथ ने फिल्मों से दूरी बना ली.

साल 1985 में प्रदर्शित फिल्म ‘हमदोनों’ प्रेमनाथ के जीवन की आखिरी फिल्म थी. प्रेमनाथ ने अपने जीवन में लगभग 300 से अधिक फिल्मों में काम किया. प्रेमनाथ की सफल फिल्मों में ‘जॉनी मेरा नाम’, ‘धर्मात्मा’, ‘बरसात’, ‘कालीचरण’, ‘शोर’, ‘सन्यासी’, ‘आन’, ‘सगाई’, ‘औरत’, ‘बादल’, ‘साकी’, ‘रुस्तम सोहराब’, ‘बेईमान’, ‘लोफर’, ‘धर्म-कर्म’, ‘प्राण जाय पर वचन न जाए’, ‘धन दौलत’, ‘तीसरी मंजिल’, ‘खोटे सिक्के’, ‘चंगेज खा’ और ‘कर्ज’ प्रमुख थीं.

प्रेमनाथ ने जिन अभिनेत्रियों के साथ काम किया, उनमें मधुबाला, रमोला, निगार सुल्ताना, सुरैया और बीना रॉय प्रमुख थीं. करीब तीन दशक तक अपने दमदार अभिनय से दर्शकों के दिल में अपनी खास पहचान बनाने वाले प्रेम नाथ 3 नवंबर 1992 को इस दुनिया को अलविदा कह गए.