अस्थाना, लकी सिंह और वायरस हमें यूं ही हंसाते रहेंगे

60 साल के उस नौजवान से सिनेमा इंडस्ट्री को आज भी बहुत कुछ सिखने को मिल रहा है. कभी जिंदगी की जद्दोजहद में उसने चिप्स बेचे, बेकरी शॉप चलाई, मुंबई के ताज होटल में 2 साल वेटर की नौकरी की. लेकिन एक बार जब उसे मौका मिला तो उसने खुराना, डॉक्टर अस्थाना, लकी सिंह और वीरू सहस्त्रबुद्ध यानी वायरस जैसे न जाने कितने किरदारों को उनकी फिल्मों में अमर कर दिया.

जी हां, हम बात कर रहे हैं मझे हुए थियेटर और फिल्मी कलाकार, एक मशहूर फोटोग्राफर बोमन ईरानी की. 2 दिसंबर 1959 को मुंबई के नागपाड़ा में एक पारसी परिवार में जन्में बोमन ईरानी न किसी फिल्मी खानदान से ताल्लूक रखते हैं और न ही किसी रईस परिवार से.

जब बोमन तीन साल के थे तो सर से पिता का साया उठ गया. बोमन की परवरिश के लिए मां बेकरी की पुश्तैनी दुकान चलाती थीं. बेकरी के पास ही सेंट मेरी स्कूल था, जहां से बोमन ने पढ़ाई की और उसी बेकरी के सामने सिनेमाघर था. जहां गुरु दत्त, राज कपूर और बिमल रॉय की फिल्में लगती थीं. स्कूल का होमवर्क पूरा होने के बाद मां खुद बोमन को भेजा करती थीं फिल्म देखने के लिए. इस तरह बोमन का फिल्मों से परिचय हुआ.

वहीं बेकरी की दुकान से बोमन को थियेटर और फोटोग्राफी का भी चस्का लगा. इसी बीच बोमन ने मीठीबाई कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री भी ले ली. पढ़ाई खत्म करने के बाद बोमन को तलाश थी नौकरी की, बहुत हाथ-पैर मारा तब जाकर होटल ताज में नौकरी मिली और वो भी वेटर और रूम सर्विस स्टाफ की. लेकिन कुछ समय के बाद नौकरी में मन नहीं लगा तो बोमन नौकरी छोड़कर अपनी पुश्तैनी बेकरी की दुकान पर बैठने लगे. लगभग 32 साल की उम्र तक बोमन ने बेकरी की दुकान चलाई.

फोटोग्राफी का शौक तो था ही, तो लगे हाथ बोमन ने साल 1985 में 2700 रूपये में पेन्टेक्स के 100 मॉडल का कैमरा खरीदा और स्कुलों में जाकर बच्चों की फोटो खिंचने लगे. इन फोटो को वो उन बच्चों को 20-30 रूपये में बेच दिया करते थे. आगे चलकर बोमन स्पोर्ट्स फोटोग्राफी करने लगे और साल 1991 में उन्होंने वर्ल्ड बाक्सिंग चैम्पियनशिप में भी फोटोग्राफी की. जिसके लिए बोमन को अच्छे खासे पैसे भी मिले. धीरे धीरे उम्र सरकती जा रही थी लेकिन जिंदगी में कुछ अच्छा न कर पाने का मलाल बोमन को कचोट रहा था.

फोटोग्राफी करने के समय ही बोमन की मुलाकात मशहूर कोरियोग्राफर श्यामक डावर से हुई. श्यामक ने बोमन को एक्टिंग करने की सलाह दी और विज्ञापन फिल्मों के निर्माता एलेक पद्मसी के पास लेकर गए. एलेक ने बोमन को थियेटर में एक रोल दिया. जिसमें बोमन को बहुत तारीफ मिली. अगले प्ले ‘आई एम नॉट बाजीराव’ बड़ा हिट रहा और अगले 10 साल तक इसका मंचन होता रहा.

यहीं से बोमन को रास्ता मिला विज्ञापन फिल्मों में जाने का. बोमन ने फेंटा, सियेट और क्रैकजैक जैसे बहुत सारे विज्ञापनों में काम किया.

एक दिन फिल्म निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा की नजर बोमन पर पड़ा और उन्होंने बोमन को बुलाकर 2 लाख का चेक देते हुए कहा कि वो उन्हें अपनी फिल्म के लिए साइन कर रहे हैं. इस तरह बोमन को पहली फिल्म मिला ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’, जिसके निर्देशक राजकुमार हिरानी ने बोमन को डॉक्टर अस्थाना का किरदार दिया और बोमन ने अपनी एक्टिंग प्रतिभा से उसे अमर बना दिया. जे. अस्थाना के किरदार के लिए बोमन को फिल्म फेयर का बेस्ट कॉमेडियन का अवॉर्ड भी मिला.

इसके बाद तो बोमन को फिल्मों में बड़े-बड़े ऑफर मिलने लगे. बोमन ने ‘खोसला का घोसला’, ‘वीर-जारा’, ‘कल हो न हो’, ‘मैं हूं न’, ‘मैंने गांधी को नहीं मारा’, ‘एकलव्य’, ‘नो एंट्री’, ‘डॉन’, ‘लगे रहो मुन्नाभाई’, ‘फरारी की सावरी’ और ‘पीके’ जैसी फिल्मों में काम करके नाम कमाया. बोमन ईरानी की पत्नी का नाम जेनोबिया है, जिनसे उनके दो पुत्र दानेश और कायोजे हैं.