FTII में गजेंद्र चौहान की ‘सेवा समाप्त’, एक साल सात महीने में बस एक बार कैम्पस आए “धर्मराज”

फिल्म और टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई) पुणे के चेयरमैन गजेंद्र चौहान का कार्यकाल शुक्रवार (तीन मार्च) को समाप्त हो गया। चौरान इस पद पर करीब एक साल सात महीने तक रहे। चौहान ने मीडिया को बताया कि उन्हें सरकार की तरफ से सेवा विस्तार का कोई आदेश नहीं मिला है। चौहान को जून 2015 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एफटीटीआई चेयरमैन नियुक्त किया था।

एफटीटीआई के छात्रों ने चौहान की नियुक्ति का काफी विरोध किया था। छात्रों का कहना था कि चौहान देश के सबसे प्रतिष्ठित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित फिल्म संस्थान के चेयरमैन बनने के योग्य नहीं हैं। छात्रों ने करीब चार महीने तक चौहान के विरोध प्रदर्शन किया था लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार उनकी माँग के आगे नहीं झुकी।

गजेंद्र चौहान को टीवी सीरियल महाभारत में युधीष्ठिर की भूमिका के लिए जाना जाता है। फिल्मों में उन्होंने ज्यादातर बी और सी ग्रेड की फिल्में की हैं। चौहान से पहले श्याम बेनेगल, अजीज मिर्जा, आरके लक्ष्मण, यूआर अनंतमूर्ति जैसे प्रतिष्ठित फिल्मकार और लेखक एफटीटीआई के चेयरमैन रह चुके हैं।

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इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक चौहान ने अपने कार्यकाल के ठीक पहले गुरुवार (दो मार्च) को गवर्निंग काउंसिल की बैठक करके दो बड़े फैसलों को अंतिम मंजूरी दी। चौहान ने फिल्म संस्थान के विभिन्न कोर्सों के टॉपर को मिलने वाली स्कालरशिप दो हजार रुपये से बढ़ाकर ढाई हजार रुपये कर दी है। दो छात्रों के अंक बराबर रहने पर टॉपर छात्र की स्कालरशिप दोनों छात्रों को पूरी-पूरी मिलेगी। पहले अंक बराबर रहने पर टॉपर छात्र की स्कालरशिप दोनों टॉपर में आधी-आधी बंट जाती थी।

चौहान के दूसरे फैसले के अनुसार अकादमिक काउंसिल में संस्थान से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों पर चर्चा के दौरान छात्रों के प्रतिनिधि नहीं रहेंगे। यानी अब एफटीआईआई में परीक्षा, फीस, टीचरों से जुड़े विषय और अनुशासनात्मक मामलों पर अकादमिक काउंसिल में चर्चा के दौरान छात्र प्रतिनिधि शामिल नहीं हो सकेंगे। छात्रों ने इस फैसले को अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि चौहान ने संस्थान से जुड़े सभी महत्वपूर्ण फैसलों में छात्रों की भागीदारी को खत्म कर दिया है।

छात्रों ने चौहान की नियुक्ति के साथ ही एफटीआईआई के गवर्निंग काउंसिल में तथाकथित दक्षिणपंथियों की नियुक्ति के विरोध में प्रदर्शन और भूख हड़ताल की थी। छात्रों का कहना था कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने नियक्तियाँ संस्थान के “भगवाकरण” के लिए की हैं।

एफटीटीआई में नए सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। फिल्म और टीवी से जुड़े विभिन्न पाठ्यक्रमों के फॉर्म भरने की अंतिम तारीख पांच मार्च है। संस्थान ने प्रमुख कोर्सों की फीस इस साल बढ़ाकर 3500 रुपये कर दी है।