PSBT करा रहा है दो दिन की डॉक्यूमेंट्री वर्कशॉप, जानिए पूरी डिटेल

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वर्कशॉप में प्रतिभागी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता कमल स्वरूप और बीना पॉल से डॉक्युमेंट्री बनाने के गुर सीख सकेंगे। (तस्वीर- पीएसबीटी)

पब्लिक सर्विस ब्रॉडकॉस्टिंग ट्रस्ट (पीएसबीटी) फिल्मकारों के लिए दो दिन की डॉक्युमेंट्री फिल्म वर्कशॉप करा रहा है। इस वर्कशॉप में बेसिक आइडिया को डेवलप करने, उसके लिए जरूरी विजुअल्स जुटाने और एडिटिंग करके फिल्म तैयार करने की पूरी प्रक्रिया को अलग-अलग विशेषज्ञ बताएंगे। वर्कशॉप 13 और 14 सितंबर को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक नई दिल्ली स्थित इंडिया इटरनेशनल सेंटर (आईआईसी) में होगी। वर्कशॉप के लिए आवेदन भेजने की अंतिम तारीख 28 अगस्त है। आवेदन स्वीकार हो जाने पर ही आपको एक हफ्ते के अंदर फीस जमा करनी होगी। वर्कशॉप की फीस 2000 रुपये है जिसे आप ऑनलाइन ट्रांसफर, चेक या ड्राफ्ट के माध्यम से दे सकते हैं। दिल्ली से बाहर से आने वाले प्रतिभागियों को यहाँ रहने खाने-पीने की व्यवस्था खुद ही करनी होगी। वर्कशॉप में शामिल होने के लिए आप को workshop@psbt.org पर निम्न जानकारी के साथ ईमेल लिखना होगा। आवेदन के साथ आपको निम्न सूचनाएं देनी होंगी-

1- अपने बारे में संक्षिप्त जानकारी। अपना प्रोफेशनल अनुभव और कामकाज का ब्योरा।

2- फिल्म निर्माण में अगर आपने कोई ट्रेनिंग ली है तो उसका ब्योरा।

3- वर्कशॉप में आप किस खास पहलू पर तवज्जो चाहते हैं?

4- संपर्क के लिए विस्तृत ब्योरा, पता, फोन नंबर इत्यादि।

वर्कशॉप के लिए आदर्श उम्मीदवार- पीएसबीटी की सूचना के अनुसार ये वर्कशॉप बिल्कुल ही नए फिल्मकारों के लिए नहीं है। ये वर्कशॉ़प ऐसे फिल्मकारों के लिए है जो या तो पहले फिल्म बना चुके हैं या अपनी पहली-दूसरी फिल्म बना रहे हैं। संक्षेप में ये वर्कशॉप उन फिल्मकारों के लिए जिन्हें फिल्म निर्माण का ककहरा तो आता है लेकिन वो अपने हुनर और ज्ञान को मांजना और बढ़ाना चाहते हैं।

वर्कशॉप आयोजित करने वाले विशेषज्ञों का संक्षिप्त परिचय-

बीना पॉल- फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट (एफटीआई), पुणे से एडिटिंग स्नातक बीना पॉल 35 से ज्यादा फिल्मों की एडिटिंग कर चुकी हैं। उन्हें अब तक दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुके हैं। बीना पॉल करीब एक दशक से केरल के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की कला निदेशक हैं। पॉल लोकार्नो, डरबन, मोरक्को और बर्लिन में होने वाले अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवलों में जूरी सदस्य रह चुकी हैं।

कमल स्वरूप- एफटीआई के स्नातक कमल स्वरूप राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता फिल्मकार हैं। उनकी फिल्म ओम-दर-ब-दर (1988) कल्ट मानी जाती है। कमल स्वरूप ने रिचर्ड एटनबरो की क्लासिक फिल्म गांधी में उनके सहायक निर्देशक के तौर पर काम किया था। कमल स्वरूप मणि कौल और कुमार शाहनी जैसे फिल्मकारों से भी लेखक और सहायक निर्देशक के तौर पर जुड़े रहे।

समीरा जैन- फिल्मकार और एडिटर समीरा जैन एफटीआई की स्नातक हैं। उन्हें फिल्म निर्माण और एडिटिंग का करीब तीस साल का अनुभव है। उनकी फिल्म बॉर्न एट होम और मेरा अपना शहर को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवार्ड मिल चुक हैं। वो नई दिल्ली स्थित श्री अरविंदो सेंटर फॉर आर्ट्स एंड कम्युनिकेशन के क्रिएटिव डाक्टूमेंट्री कोर्स की निदेशक हैं।

समीना मिश्रा- नई दिल्ली स्थित डाक्युमेंट्री फिल्म निर्माता और लेखक समीना मिश्रा मीडिया और बच्चों पर केंद्रित फिल्में बनाती हैं। द टीचर एंड दी वर्ल्ड, जागृति यात्रा, टू लाइव्स, द हाउस ऑन गुलमोहर, एवेन्यू एंड स्टोरीज ऑफ गर्लहुड इत्यादि फिल्में से उन्हें पहचान मिली।

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