राजकुमार हिरानी, पर्दे पर सिनेमा को गढ़ने वाले असली हीरो

Producer Director Rajkumar Hirani. Express photo by Dilip Kagda. Mumbai-03/11/14

सिनेमा एक ऐसी विधा है, जिसे गढ़ना या बनना आसान नहीं होता. दरअसल सिनेमा हमारे समाज का आईना होता है, जसमें हमें वो सब दिखाई देता है, जो हमारे चाल, चरित्र और चेहरे में दिखाई देता है. लेंस से उन दृश्यों को गढ़ना जो हमारे जीवन का प्रतिबिंब हों या फिर हमारे चाल, चरित्र और चेहरे को उकेरते हों, हम उन्हें पसंद करते हैं. इसी विधा के माहिर जानकार हैं फिल्म निर्देशक राजकुमार हिरानी, जिन्हें फिल्म इंडस्ट्री प्यार से राजू हिरानी कहती है.

फिल्‍म निर्देशक, राइटर और एडिटर राजकुमार हिरानी ने अभी तक कुछ गिनीचुनी फिल्में ही कि हैं, लेकिन उनकी सभी फिल्में व्यावसायिक तौर पर सुपरहिट रही हैं. इनमें मुन्‍नाभाई एमबीबीएस, लगे रहो मुन्‍नाभाई, 3 इडियट्स, पीके और संजू शामिल हैं. राजकुमार हिरानी का जन्‍म 20 नवंबर 1962 को महाराष्ट्र के नागपुर में हुआ. हिरानी एक सिन्‍धी परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके पिता का नाम सुरेश हिरानी और मां का नाम शीला हिरानी है. राजकुमार हिरानी के एक भाई और एक बहन हैं.

राजकुमार हिरानी का परिवार मूलतः पाकिस्तान के सिंध प्रांत का रहने वाला है. भारत-पाकिस्तान बंटवारे के वक्त हिरानी के पिता सुरेश हिरानी की उम्र 14 साल की थी, जब वो अपनी मां, दो भाइयों और पांच बहनों के साथ भारत आए. जल्द ही सुरेश हिरान के पिता और सबसे बड़े भाई का निधन हो गया.

पूरे परिवार की जिम्मेदारी राजकुमरा के पिता सुरेश के कंधों पर आ गई. परिवार का भरण-पोषण करने के लिए सुरेश को यूपी के फिरोजाबाद में एक चूड़ी कारखाने में काम करना पड़ा. थोड़े समय के बाद सुरेश परिवार के साथ नागपुर चले आए, जहां उन्होंने सिर्फ दो टाइपराइटर के साथ एक टाइपिंग इंस्टीट्यूट खोला. इसी टाइपिंग इंस्टीट्यूट से सुरेश हिरानी अपने परिवार का गुजारा करते थे.

राजकुमार हिरानी की शुरूआती पढ़ाई नागपुर के सेंट फ्रांसिस डीसेल्‍स हाई स्‍कूल से हुई. इसके बाद हिरानी ने कॉमर्स से अपना ग्रेजुएशन किया. परिवार की तमन्ना थी कि राजकुमार चाटर्ड अकाउंटेंट बने लेकिन बचपन से ही राजकुमार का लगाव थियेटर और फिल्‍मों की ओर था.

हिरानी फिल्‍मों में एक्टर बनना चाहते थे. कॉलेज के दिनों में वे थियेटर करते थे. इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए एक दिन पिता सुरेश ने बेटे राजकुमार की कुछ तस्वीरें शूट की और उन्हें मुंबई के एक एक्टिंग स्कूल में दाखिले के लिए भेज दीं लेकिन राजकुमार हिरानी को उस स्कूल में एडमिशन नहीं मिला. राजकुमार इससे बहुत निराश हो गए और तीन दिन बाद नागपुर लौट आए.

तब पिता सुरेश ने उन्हें पुणे के फिल्म इंस्टीट्यूट (एफटीआईआई) में दाखिले लेने की सलाह दी. राजकुमार हिरानी फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट, पुणे पहुंचे. राजकुमार ने एक्टिंग डिप्लोमा में एडमिशन लेना चाहते थे, लेकिन उसके फॉर्म की डेट खत्म हो गई थी तो राजकुमार ने मजबूरी में फिल्म एडिटिंग के कोर्स में एडमिशन ले लिया. राजकुमार हिरानी के उस वक्त मजबूरी में लिए गए फैसले ने आज उन्हें इस मुकाम पर पहुंचा दिया है.

साल 1987 में राजकुमार हिरानी एफटीआईआई से पास हो गए. इसके बाद राजकुमार ने मायानगरी मुंबई का रूख किया. पिता ने कोर्स करते वक्त राजकुमार से वादा किया था कि वो उन्हें मुंबई में एक फ्लैठ खरीदकर देंगे, लेकिन पैसे के अभाव के कारण वो ऐसा नहीं कर पाए. तब राजकुमार अपने एफटीआईआई के दोस्त श्रीराम राघवन के पास पहुंचे, जो पहले से मुंबई में रह रहे थे. बाद में उसी श्रीराम राघवन ने एक हसीना थी और जॉनी गद्दार जैसी फिल्मों के निर्देशन किया.

इसी दौरान पिता सुरेश ने राजकुमार को शादी करने की सलाह दी. राजकुमार और उनके छोटे भाई की शादी दिसंबर 1994 में एक साथ हुई. राजकुमार हिरानी की पत्नी नाम मंजीत है और वो इंडियन एयरलाइंस की पायलट हैं.

शुरूआती दौर में राजकुमार को फिल्मों में कोई काम नहीं मिला, जिसकी वजह से राजकुमार ने विज्ञापन जगत का रूख किया. धीरे-धीरे राजकुमार विज्ञापन फिल्मों में जम गए और बेहतर काम करने लगे. 90 के दशक में टीवी पर आने वाले फेविकोल का विज्ञापन लोगों को आज भी याद हैं, ऐसे ही एक फविकोल के विज्ञापन में राजकुमार हिरानी भी नजर आते हैं, विज्ञापन की पंच लाइन थी ‘जोर लगा के हइसा’. विज्ञापन जगत में काम करते-करते राजकुमार हिरानी जल्द ही बोर हो गए और उन्होंने विज्ञापन की दुनिया से ब्रेक ले लिया और फिल्मों में काम की तलाश करने लगे.

साल 1994 में काम के लिए भटक रहे राजकुमार हिरानी को साथ मिला एफटीआईआई के उन्हीं के सीनियर और इंडस्ट्री के जानेमाने फिल्म निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा का. जो उस समय 1942 ए लव स्टोरी बना रहे थे. विधु ने राजकुमार हिरानी को इस फिल्म के ट्रेलर और प्रोमो की एडिटिंग का जिम्मा सौंपा. जिसे राजकुमार ने सफलता से निभाया. इस फिल्म की एडिटिंग रेनू सलूजा ने की थी. फिल्म सुपरहिट रही और इस तरह राजकुमार की इंट्री विधु कैंप में हो गई.

इसके बाद विधु विनोद चोपड़ा ने राजकुमार को बड़ा मौका दिया साल 2000 में फिल्म का नाम था मिशन कश्मीर. इस फिल्म की पूरी एडिटिंग राजकुमार हिरानी ने की. यह फिल्म भी सुपरहिट रही और इस तरह बतौर फिल्म एडिटर राजकुमार हिरानी फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित हो गए.

इसके बाद राजकुमार हिरानी ने विधु को मुन्ना भाई एमबीबीएस की स्टोरी सुनाई. विधु ने अपने प्रोडक्शन हाउस से उस फिल्म को बनाने की पेशकश की, साल 2003 में हिरानी ने इस फिल्म को डायरेक्ट की और फिल्म सुपरहिट रही. इस फिल्म के सिनेमैटोग्राफर थे बिनोद प्रधान. इससे पहले बिनोद प्रधान ‘1942 ए लव स्टोरी’, ‘जाने भी दो यारों’, ‘परिंदा’ और ‘देवदास’ जैसी फिल्में शूट कर चुके थे. इस फिल्म की एक और खास बात है कि अभिनेता सुनील दत्त के जीवन की यह आखिरी फिल्म है और ये पहली फिल्म भी है, जिसमें सुनील दत्त और संजय दत्त ने साथ काम किया था. इसी फिल्म से बोमन ईरानी को भी पहचना मिली.

इस फिल्म की सफलता के बाद राजकुमार हिरानी ने साल 2006 में फिल्म बनाई लगे रहो मुन्ना भाई. ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ में संजय दत्त एक डॉन का किरदान निभाते हैं, उन्हें एक रेडियो जॉकी (विद्या बालन) से प्यार हो जाता है. लेकिन उसका प्यार पाने के लिए एक सच्चा गांधीवादी होने के बारे में उससे झूठ बोलता है. आखिर में उसके इस झूठ से लड़की का दिल टूट जाता है, जिसके बाद वह लोगो की मदद कर खुद में बदलाव लता है. इस फिल्म की कहानी भी दर्शकों द्वारा खूब पसंद की गई और यह फिल्म भी सुपरहिट रही.

इसके बाद साल 2009 में राजकुमार हिरानी की अगली फिल्म आती है और इसका नाम है 3 इडियट्स. चेतन भगत के उपन्यास ‘फाइव पाइंट समवन’ से प्रेरित फिल्म ‘3 इडियट्‌स’ के जरिये हिरानी ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली, पैरेंट्‌स का बच्चों पर कुछ बनने का दबाव और किताबी ज्ञान की उपयोगिता पर गंभीर सवाल खड़ा करते हैं. इस फिल्म में आमिर खान, करीना कपूर, आर. माधवन, शरमन जोशी, बोमन ईरानी, ओमी, मोना सिंह, परीक्षित साहनी और जावेद जाफरी जैसे कलाकारों ने काम किया है. यह फिल्म भी सुपरहिट रही.

इसके बाद साल 2014 में राजकुमार हिरानी की फिल्म आती है पीके. फिल्म का नाम पीके इसलिए है क्योंकि इस फिल्म के मुख्य किरदार यानी आमिर खान को लोग पीके कह कर बुलाते हैं. फिल्म में पीके के प्रश्न ऐसे होते हैं कि लोगों को लगता है कि कोई भी होश में इस तरह की बात नहीं कर सकता है. इस फिल्म में अनुष्का का किरदार, जिसे राजकुमार हिरानी ने जगत जननी के नाम दिया है वो समाज के पाखंड को सामने लाने के लिए हमेशा लगी रहती है. इस फिल्म को भी दर्शकों ने बहुत सराहा और यह भी भी हिट रही.

इसके बाद राजकुमार हिरानी दर्शकों के लिए अभिनेता संजय दत्त के जीवन को पर्दे पर उतारते हैं और फिल्म का नाम देते हैं संजू. साल 2018 में आई इस फिल्म में राजकुमार हिरानी ने संजय दत्त की विवादास्पद ज़िंदगी के पन्नों को दर्शकों के सामने पलटने का भरपूर प्रयास किया है. संजू में संजय दत्त की ज़िंदगी से जुड़े वो सारे मोड़ फिल्माए गए हैं, जो उनके जीवन के यथार्थ को बताते का काम करते हैं.

वैसे राजकुमार हिरानी अब तक जितनी भी फिल्में बनाई हैं, संजू उनमें  सबसे कमजोर फिल्म है. हालाकि, फिल्म में हिट रही लेकिन राजकुमार हिरानी ने इस फिल्म में ईमानदारी नहीं बरती है. संजय दत्त की विवादित ज़िंदगी को पर्दे पर हिरानी ने साकार करने कोशिश की है, लेकिन कई दफे फिल्म पर राजकुमार हिरानी और संजय दत्त की दोस्ती भारी पड़ती दिखाई देती है.

राजकुमार हिरानी को उनकी फिल्मों के लिए कई फिल्मफेयर और नेशनल अवॉर्ड मिल चुके हैं.