शम्मी कपूर जयंती : ‘याहू’ चाहे कोई मुझे जंगली कहे

70 के दशक में भारतीय सिनेमा का रूख वेस्टर्न डांस और म्यूजिक की ओर होने लगा था. म्यूजिक डायरेक्टरों ने पश्चिमी वाद्ययंत्रों की धुनों पर फिल्म का संगीत बनाना शुरु कर दिया था. इस पूरे मामले में फिल्म निर्देशकों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह आ रही थी कि इन धुनों पर थिरकने वाला कोई कलाकार नहीं मिल रहा है.

पूरबिया शैली की इन्हीं फिल्मों में पश्चिम का तड़का लगाने के लिए फिल्म इंडस्ट्री में आए पृथ्वीराज राज कपूर के बेटे शमशेर कपूर, जिन्हें दुनिया प्यार से शम्मी कपूर के नाम से जानती है. शम्मी कपूर का जन्म 21 अक्टूबर 1931 को बंबई (मुंबई) में हुआ था. 70 के उस दशक में सिनेमा के पर्दे पर ‘याहू’ चिल्लाते हुए शम्मी कपूर जब आते थे, तब दर्शकों में मन में रोमांच भी पैदा होता था और ये उत्कंठा भी जगती थी कि क्या वाकई में ऐसे भी किसी गीत को फिल्माया जा सकता है, जहां अभिनेता इतना स्वतंत्र हो कि पर्दे पर उछलते-कूदते हुए गाना गा सकता है.

उसके पहले के सिनेमा में अभिनेता बड़ी शालिनता से पे़ड़, पहाड़, नदी और तालाब के किनारे शांती से गाने का अभिनय किया करते थे. शम्मी ने भारतीय सिनेमा के साथ चिपके हुए सभी पुरानी वर्जनाओं का तोड़ने का काम किया. शम्मी कपूर ने साल 1948 में फिल्म इंडस्ट्री में इंट्री की, लेकिन बतौर हीरो नहीं बल्कि एक जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर. महीने के 50 रुपये की सैलरी से फिल्मी करियर शुरू करने वाले शम्मी साल 952 तक अपने पिता पृथ्वीराज कपूर के पृथ्वी थिएटर में काम करते रहे. साल 1952 में उनकी आखिरी सैलरी थी 300 रुपये.

शम्मी की फिल्म में ‘याहू’ का प्रयोग सबसे पहले फिल्म ‘तुमसा नहीं देखा’ में हुआ. ये ‘याहू’ शब्द और शम्मी का अभिनय इतना हिट हुआ कि इसे दोबारा फिल्म ‘दिल देकर देखो’ में दोहराया गया. ये दोनों फिल्में जानेमाने निर्देशक नासिर हुसैन ने बनाई थी. इसके बाद शम्मी की फिल्म ‘जंगली’ में भी ‘याहू’ को गाने में जोड़ा गया.

एक बार एक बड़ा मजेदार वाकया हुआ, शम्मी मधुबाला के साथ फिल्म ‘रेल का डिब्बा’ की शूटिंग कर रहे थे. मधुबाला ने शम्मी से कहा, ‘तुम इतने पतले हो कि मैं तुम्हारी हीरोइन नहीं बल्कि कुछ और ही लगती हूं, तुम अपना वज़न बढ़ाओ’. इसको सुनने के बाद शम्मी को अपने दुबले-पतले होने पर इतनी शर्म आई कि उन्होंने वजन बढ़ाने के लिए बीयर पीना शुरू कर दिया. बाद के सालों में शम्मी ने कई बार कहा कि मैंने मधुबाला जैसी सुंदर और टैलेंटेड एक्ट्रेस नहीं देखी.

शम्मी फिल्म इंडस्‍ट्री के ऐसे पहले कलाकार थे, जो फास्ट म्यूजिक पर डांस करते थे. जब शम्मी डांस करते थे तो उनकी पूरी बॉडी म्यूजिक पर थिरकती थी. फिल्‍म ‘ब्रह्मचारी’ की शूटिंग के दौरान खूबसूरत अभिनेत्री मुमताज और शम्‍मी कपूर एकदूसरे के बेहद करीब थे. दोनों के प्‍यार के किस्‍से बॉलीवुड गलियारों में होने लगे. दोनों एक-दूसरे से शादी करना चाहते थे लेकिन शम्‍मी कपूर की एक शर्त ने इस रिश्ते को खत्म कर दिया. शम्‍मी ने मुमताज को शादी के लिए प्रपोज किया और साथ ही यह भी शर्त रख दी कि वो शादी के बाद फिल्‍मों में काम नहीं करेंगी. शम्‍मी कपूर की यह बात सुनकर मुमताज ने उनसे रिश्‍ता तोड़ दिया और यह रिश्‍ता शुरू होने से पहले ही खत्‍म हो गया.

शम्मी कपूर ने दो शादी की. उनकी पहली पत्नी थीं मशहूर अभिनेत्री गीता बाली और दूसरी पत्नी थीं नीला देवी. साल 1955 में शम्मी को फिल्म ‘रंगीला रतन’ के सेट पर अभिनेत्री गीता बाली से प्यार हो गया. लेकिन उस समय पृथ्वीराज
कपूर के खानदान में एक अघोषित सी परंपरा थी कि घर का कोई सदस्य फिल्मों की हिरोईन से शादी नहीं करेगा. इसके साथ एक और समस्य था कि गीता उम्र में शम्मी से बड़ी थी और उस जमाने में इसे बेमेल जोड़ी माना जाता था. लेकिन घर और दुनिया कि परवाह न करते हुए शम्मी ने कुछ महीनों के बाद मुंबई के एक मंदिर में गीता से शादी कर ली और उसके बाद पृथ्वीराज कपूर को बताया. शम्मी और गीता के एक बेटे आदित्य राद कपूर और बेटी कंचन हुई.

साल 1965 में चेचक की वजह से गीता बाली की मृत्यु हो गई. शम्मी के बच्चे छोटे थे, इसलिए घरवालों ने दूसरी शादी का दबाव बनाया. शम्मी गीता के मरने के चार साल बाद बमुश्किलन दूसरी शादी के लिए राजी हुए. साल 1969 में शम्मी ने दूसरी शादी नीला देवी से की.

शम्मी कपूर ने मुख्य अभिनेता के रूप में 50 से अधिक फ़िल्मों में अभिनय किया है और सहायक भूमिकाओं में 20 से अधिक फ़िल्मों में अभिनय किया है. उन्हें साल 1968 में फ़िल्म ‘ब्रह्मचारी’ के लिए फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अवॉर्ड मिला.

शम्‍मी कपूर ने कई यादगार हिट फिल्में दीं जिनमें ‘तुमसा नहीं देखा’, ‘दिल दे के देखो’, ‘सिंगापुर’, ‘जंगली’, ‘कश्मीर की कली’, ‘प्रोफेसर’, ‘ब्रह्मचारी’, ‘अंदाज’, ‘जानवर’, ‘तीसरी मंजिल’, ‘एन इनविंग इन पेरिस’, ‘कॉलेज गर्ल’ और ‘सच्चाई’ प्रमुख हैं. शम्मी कपूर ने शुरुआती दौर में कई ऐसी फिल्मों में भी काम किया, जो हीरोइन प्रधान थे. 14 अगस्त 2011 की सुबह 5:14 बजे शम्मी इस दुनिया को अलविदा कह गए.