देश के 3 सबसे अच्छे फिल्म स्कूल

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पुणे स्थित प्रभात फिल्म कंपनी की ऐतिहासिक तस्वीर। प्रभात स्टूडियो के परिसर में ही बाद में एफटीआईआई की स्थापना हुई। (तस्वीर- sahapedia से साभार)

मशहूर अमेरिकी कल्ट फिल्मकार टैरेनटीनो का वो बयान शायद आपने भी सुना हो कि “मैं फिल्म गया हूँ, फिल्म स्कूल नहीं।” भारत में भी फिल्म स्कूल में सिनेमा की कला के विभिन्न पहलू सीखने वाले या फिर सीधे कर्मक्षेत्र में उतरकर कदम-दर-कदम संघर्ष करते हुए सिनेमा बनाना सीखने वाले समान रूप से सफल रहे हैं। अगर अनुराग कश्यप, विशाल भारद्वाज जैसे निर्देशक बगैर फिल्म गए ही उल्लेखनीय फिल्में बना रहे हैं तो रजत कपूर और संजय लीला भंसाली जैसे निर्देशक स्कूल में पढ़कर आए हैं। यानी फिल्म बनाना सीखने के लिए फिल्म स्कूल जाना जरूरी नहीं लेकिन हमारी राय में अगर आप फिल्म स्कूल जाकर इस कला का बुनियादी प्रशिक्षण लेते हैं तो आपके जिंदगी के कई बेहतरीन साल बच सकते हैं और शायद आप अपनी प्रतिभा को आगे जाकर ज्यादा मांज भी सकते हैं। इसलिए आइए आज हम आपको बताते हैं भारत के सबसे अच्छे तीन फिल्म स्कूलों के बारे में जहाँ आप इसकी पढ़ाई कर सकते हैं।

1- फिल्म और टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई) पुणे- निस्संदेह ये भारत का सर्वश्रेष्ठ फिल्म संस्थान है। 1960 में भारत सरकार ने पुणे स्थित मशहूर प्रभात स्टूडियो को लेकर उसमें फिल्म स्कूल की स्थापना की। अपनी स्थापना से ही ये स्कूल भारत की सर्वश्रेष्ठ सिने प्रतिभाओं का ट्रेनिंग स्कूल रहा है। ऋत्विक घटक जैसे फिल्मकार इसके शुरुआती टीचरों में रहे। भारतीय छात्रों को विश्व सिनेमा से परिचय कराकर सार्थक फिल्में बनाने के लिए प्रेरित करना संस्थान का मुख्य ध्येय रहा है। जया भादुड़ी, शबाना आजमी, सुभाष घई, संजय लीला भंसाली, राजीव रवि, मिथुन चक्रवर्ती, रसूल पुकुट्टी जैसे पुराने-नए दर्जनों नाम आपको इसकी श्रेष्ठता के बारे में बताने के लिए काफी हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि सरकार संस्थान होने के नाते यहाँ फिल्म की पढ़ाई मध्यम वर्गीय छात्रों के पहुँच के अन्दर है।

2- सत्यजीत रे फिल्म और टेलीविजन संस्थान (एसआरएफटीआईआई), कोलकाता- गुणवत्ता के मामले में एसआरएफटीआईआई पुणे के एफटीटाआई के समकक्ष ही मान जाता है लेकिन पश्चिम बंगाल में होने के कारण इसमें क्षेत्रीयता का पुट ज्यादा रहता है। बांग्ला फिल्म जगत में एसआरएफटीटीआई के छात्रों का काफी दबदबा है। बंगाल में सिनेमा का पुरान कल्चर होने की वजह से एसआरएफटीआईआई में हिन्दी प्रदेश के छात्रों का प्रवेश तुलनात्मक रूप से कम ही हो पाता है।

3- मॉस कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर (एमसीआरसी), जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली- एमसीआरसी एफटीआईआई और एसआरएफटीआईआई की तरह फिल्म निर्माण के प्रशिक्षण के लिए पूरी तरह केंद्रित नहीं है। जहाँ एफटीआईआई और एसआरएफटीआईआई में फिल्म निर्माण, फिल्म सिनेमैटोग्राफी, फिल्म संपादन, ध्वनि इत्यादि की अलग-अलग प्रशिक्षण दिया जाता है वहीं एमसीआरसी के एमए (मॉस कम्युनिकेशन) में दो साल तक सभी छात्रों को फिल्म निर्माण में जरूरी सभी चीजों की बुनियादी जानकारी दी जाती है। साथ ही छात्रों को शार्ट फिल्म और वीडियो शूट का भी मौका मिलता है। एमसीआरसी में फिल्म निर्माण के अलग-अलग कौशलों का भिन्न-भिन्न प्रशिक्षण न दिए जाने के बावजूद यहाँ से कई सफल अभिनेता, निर्देशक, कैमरामैन और लेखक निकले हैं। शाहरुख खान, कबीर खान, प्रशांत पाण्डेय, बरखा दत्त यहां के चर्चित भूतपूर्व छात्र हैं।