क्या है फोटोग्राफी, कैसे बने बेहतर फोटोग्राफर

हम अपनी यादों को कितनी हिफाजत से सहेजते हैं. खट्टी-मिठी यादों के हर लम्हे को कैद कर लेते हैं हम, बस एक क्लीक से मन के किसी कोने में. हर बीते पल को कैद करना कितना आान हो गया है आज. आज गरीब से गरीब आदमी की हद में स्मार्ट फोन है और उस स्मार्ट फोन के कैमरा से वो जब चाहे अपनी यादों को संजो सकता है.

ये फोटोग्राफी भी कितनी कमाल की चीज है. 90 के दशक से पहले तक जब भारत ने अपने बाजार दुनिया के लिए नहीं
खोले थे, छोटे-बड़े शहरों में फोटो स्टूडियो हुआ करते थे. लोग अपने परिवार, यार दोस्तों के साथ या फिर प्रेमिका के साथ उन स्टूडियो में जाते थे. बच्चों की फोटो घोड़ागाड़ी या खिलौने वाली कार में, परिवार वरिष्ठता के क्रम में मुखिया के साथ बैठकर, यार दोस्त येज्‍डी मोटरसाइकिल पर बैठकर, प्रेमी-प्रेमिका चांद-तारों के कटऑउट पर बैठकर कैमरे के बक्से में खुद को कैद कराकर खुश होते थे.

जब दुनिया के लिए भारत का बाजर खुला तो सस्ते कैमरे हर घर में पहुंचने लगे और लोग अपनी सुविधानुसार उनका प्रयोग करने लगे और तब कमोबेश हर घर में शौकिया तौर पर कोई न कोई फोटोग्राफर होने लगा. आज सबको पता
है कैमरे से फोटो लेने को फोटोग्राफी कहते हैं. इतना पढ़ने के बाद अब आप सोच रहे होंगे कि फोटोग्राफी की इतनी सी बात समझाने के लिए इतनी बड़ी भूमिका बनाने की क्या जरूरत है??? दरअसल, यह सब लिखने का मात्र छोटा सा प्रयास इसलिए था कि फोटोग्राफी से जुड़ी विभिन्न रोचक जानकारियां आपतक सीधे पहुंचा सकूं.

अंगेजी शब्द फोटोग्राफी (Photogrph) ग्रीक के दो शब्दों (photo+graph) से बना है. इसमें फोटो (Photo) का अर्थ प्रकाश (Light) होता है, जबकि ग्राफ (Graph) का अर्थ चित्र को तैयार करना है. इसे आसान भाषा में इस तरह समझ सकते हैं कि प्रकाश की किरण जब किसी वस्तु से टकराकर (Reflect) होकर कैमरे में लगे लेंस के माध्यम से कैमरे बॉक्स के अंदर नेगेटिव फिल्म या डिजिटल सेंसर से टकराती हैं तो वस्तु की तस्वीर बनती है.

फोटो बनाने की प्रकिया में फोटो-सेंसिटिव केमिकल लगी नेगेटिव फिल्म पर प्रकाश किरणों के कारण छपी तस्वीर को केमिकल से प्रॉसेस से गुजारा जाता है, जबकि डिजिटल कैमरे में इलेक्ट्रॉनिक इमेज सेंसर से तस्वीर बनती है. चाहे डिजिटल हो या फिर नेगेटिव फिल्म फ्रोटोग्राफी दोनों में एक बात कॉमन है और वो है लाइट.

जी हां, बिना लाइट के किसी भी तरह की फोटोग्राफी कभी संभव नहीं है. एक पेंटर अपनी पेंटिंग ‘लाइट में’ बनाता है, लेकिन फोटोग्राफर फोटो ‘लाइट से’ बनाता है. फोटोग्राफी के लिए सबसे जरूरी है कि आप लाइट के बेहतर उपयोग को समझने की कोशिश करें. फोटोग्राफी में आप लाइट के यूज को जितना समझेंगे उतनी ही बेहतर फोटोग्राफी कर पाएंगे.

आम तौर पर एक नया फोटोग्राफर यही सोचता है कि सबसे बढ़िया फोटो उसे कहते हैं, जिसमें शार्प डीटेल्स हों. लेकिन सच पूछिए तो ऐसा कतई नहीं है, अच्छी फोटो वो मानी जाती है, जो देखने वाले पर अपना असर छोड़ सके. फोटोग्राफी केवल किसी भी वस्तु या विषय को कैमरे में उतार लेना भर नहीं है, बल्कि यह वो माध्यम है जिससे फोटोग्राफर बिना कुछ कहे अपनी बात सामने वाले तक पहुंचाता है, बिना शब्दों के अपनी भावनाओं को बयां कर सकता है.

एक फोटोग्राफर के लिए फोटोग्राफी आर्ट फॉर्म है, जिसे सिखने के लिए धैर्य और क्षमता होनी चाहिए. एक फोटोग्राफी सामान्य तौर पर दिखने वाली किसी भी वस्तु या विषय को कैमरे में कैद करता है तो वह कुछ भी अनोखा नहीं कर रहा है, क्योंकि उसे हर कोई बिना कैमरे के लेंस के उसी तरह से देख रहा है.

एक बेहतर कैमरामैन बेहद साधारण कैमरे से भी बेहतरीन तस्वीरें ले सकता है, जबकि दूसरी तरफ यह भी हो सकता है कि उन्नत कैमरा लिए कोई तस्वीर के शार्पनेस, चमक, लाइट और डीटेल्स में ही उलझा रहे. इसलिए एक बेहतर फोटोग्राफर बनने के लिए कैमरामैन को कैमरे के लेंस से विभिन्न वस्तुओं और विषयों का गंभीर अध्ययन करना चाहिए.

अमूमन लोगों का मानना है कि महंगे कैमरो और लेंस से ली गई तस्वीर को बेहतरीन मानते हैं, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है और वो इसलिए भी क्योंकि वो तस्वीर कितनी भी हाई क्वालिटी की हो लेकिन यदि उसमें आकर्षण पैदा करने की क्षमता नहीं है तो वह पूरी रह से बेकार है.

फोटोग्राफर के लिए सबसे जरूरी है उसका विषय. तस्वीर की सुंदरता, एक्सपोजर, लाइट और डीटेल्स की बात बाद में आती हैं. सबसे जरूरी है कि क्लीक करने वाली तस्वीर के जरिए वो अपने दर्शकों को दिखाना क्या चाहता है. साधारण कैमरे या फिर कहें कि साधारण से स्मार्ट फोन से उतारी गई तस्वीर अपना बेहतर प्रभाव छोड़ सकती है बशर्ते सब्जेक्ट दमदार हो या सबजेक्ट के पीछे की छुपी हुई कहानी मजबूत हो. तस्वीर ऐसी होनी चाहिए जिसे देखकर दर्शक उसे खुद के साथ जोड़ सके.

एक फोटोग्राफर अपनी फोटोग्राफी के माध्यम से व्यक्ति और समाज के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है, बशर्ते वो अध्ययनशील या खोजी समझ का हो. फोटोग्राफी की अगली कड़ी में हम इसके इतिहास के बारे में बात करेंगे, तब तक आप इस लेख को पढ़े और समझें लेंस का व्यावहारिक प्रयोग.