नए फिल्मकारों को जॉर्ज रोमेरो के 9 टिप्स

george romero, filmbibo
जॉर्ज रोमेरो को जॉम्बी फिल्मों का जनक माना जाता है। (तस्वीर- हॉरर फिल्म डॉट कॉम)

अंग्रेजी में ऐसी कई वेबसाइटें हैं जो फिल्म निर्माण से जुड़ी बारीकियां बताती हैं लेकिन हिन्दी में ऐसी सामग्री कम ही मिलती है। हिन्दी में फिल्म से जुड़ी सारी बहस “कहानी” में फंस के रह जाती है। फिल्म के तकनीकी मामलों से जुड़े लेखन के अभाव की एक बड़ी वजह ये भी है कि फिल्म निर्माण के तकनीकी पक्ष को जानने वाले कलम कम ही उठाते हैं और उठाते भी हैं तो उनके कीबोर्ड से हिन्दी शब्द नहीं निकलते। ऐसे में अनुवाद ही एक ऐसा पुल है जिसकी मदद से ऐसे जरूरी विषयों तक पहुंचा जा सकता है। इस शुरुआत के लिए हम ये लेख पेश कर रहे हैं उम्मीद है आपको पसंद आएगा।

जॉर्ज ए रोमेरो को 12 जुलाई 2017 को 77 वर्ष की आयु में निधन हो गया। चार फरवरी 1940 को अमेरिका के न्यूयॉर्क में जन्मे जॉर्ज रोमेरो को जॉम्बी फिल्मों का जनक माना जाता है। 1968 में आई उनकी पहली फिल्म “नाइट ऑफ द लिविंग डेड” कल्ट फिल्म है। हॉरर और इंडी (स्वतंत्र) फिल्मों के जॉनर में रोमेरो को ऑइकन माना जाता है। अंग्रेजी वेबसाइट नो फिल्म स्कूल (एनएफएन) ने रोमेरो को श्रद्धांजलि के तौर पर उनके द्वारा अलग-अलग इंटरव्यू में बताए गए फिल्म मेकिंग टिप्स को इकट्ठा करके एक लेख प्रकाशित किया है। पेश है उसका मुक्त अनुवाद।

1- कुछ अपना शूट करो- साल 2005 में रोमेरो ने अपने एक प्रशंसक को दिए इंटरव्यू में कहा था- आजकल फिल्म बनाना काफी आसान हो गया है। इसलिए आज के लोगों को मेरी राय है कि कुछ करो। शूट करो। कुछ भी शूट करो, फिल्म रील पर कुछ शूठ करो। अपने को अभिव्यक्त करो। अगर तुम्हारे पास कहने के लिए कुछ बात है, कोई स्टाइल है तो उसे सामने लाओ। कोशिश करो कि जब तुम किसी कमरे में घुसो तो वहाँ बस बाते करने के लिए न जाओ बल्कि ये कह सको कि देखो मैंने ये बनाया है। मेरी सबसे अच्छी राय यही है कि जाओ कुछ करो या तो लिखो या शूट करो।”

2- दूसरों को शूटिंग में असिस्ट करें- रोमेरो कहते हैं- मैं हमेशा एक बात कहता हूं। किसी न किसी तरह आपको किसी फिल्म के निर्माण से जुड़ना चाहिए। अगर आपको अंकल पैसेवाले नहीं है तो किसी और के फिल्म शूटिंग से जुड़ जाइए। दूसरे शहर जाकर किसी फिल्म प्रोडक्शन में फ्री में काम करना हो तो भी। और वहाँ जाकर फिल्म प्रोडक्शन में जितना संभव हो उतना सक्रिय रहिए। फिल्म शूटिंग में जाकर लकड़ के गट्ठर की तरह पड़े मत रहिए।

3- कहानी- फिल्म कहानी से बनती है चाहे वो हॉरर फिल्म हो या कोई और। अगर आप फिल्म बनाना चाहते हैं तो आपके पास एक कहानी होनी ही चाहिए जिसे आप पर्दे पर उतारना चाहते हैं। ये कहानी आपकी अपनी या किसी दूसरे लेखक की भी हो सकती है। तो सबसे पहले वो कहानी तय कीजिए जिसे आप फिल्म में ढालना चाहते हैं।

4- कुछ भी संभव है- रोमेरो ने फिल्म में कल्पना के खुले प्रयोग की वकालत की है। अगर आपके दिमाग में कोई आइडिया आ रहा है तो ये मत सोचिए कि ये लोगों को ये विश्वसनीय लगेगा कि नहीं। रोमेरो ने कहा है- अगर आप के जहन में कोई आइडिया आया है तो इसका मतबल है कि आपके लिए वो विश्वसनीय है। अब आपको बस ये करना है कि देखने वालों को भी जितना हो सके उतना उस पर यकीन दिलाना है। अपने मूल आइडिया या प्रीमाइज पर यकीन दिलाने के लिए स्कूल की विज्ञान की किताबें नहीं खंगालने की जरूरत है। आपको बस कुछ नियम बनाने होंगे। मान लीजिए आप ऐसे आदमी की कहानी बताना चाह रहे हैं जो एक आईलैंड में अकेला फंस गया है। उसके पास खाने-पीने के लिए कुछ भी नहीं है, सिवाय एक ट्रे अण्डों के। इन्हीं में से एक अंडे में एक शैतान का अजन्मा बच्चा छिपा है जो अंडा तोड़कर जन्म लेता है और आदमी समेत पूरे आईलैंड को खा जाता है। ये कहानी कहने के लिए आपको बस एक नियम बनाना है कि जिस अंडे में शैतान का भ्रूण है वो टूटा तो शैतान बाहर आ जाएगा। आपका काम बन जाएगा। अब आपका कैरेक्टर जब भी भूख मिटाने के लिेए कोई अंडा तोड़ेगा तो दर्शकों को मन में ख्याल आएगा कि इसमें कहीं शैतान न हो।

5- प्राथमिकता तय करें- रोमेरो ने साल 2008 में दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि फिल्म बनाने में प्राथमिकता (प्रॉयरिटी) तय करना कितना महत्वपूर्ण है। हर वो सारे काम एक साथ नहीं कर सकते जो आप करना चाहते हैं। रोजेरो ने कहा था- आपको हमेशा समझौते करने पर मजबूर होना पड़ेगा। नौजवान फिल्ममेकरों से मिलने पर मैं कहता हूं कि सबसे अहम ये जानना है कि आप क्या चाहते हैं। और कौन सी चीज सबसे अहम है जिसे आप बचाना चाहते हैं। मैं अक्सर देखता हूं कि नौजवान फिल्ममेकर जिनके पास हॉलीवुड के अच्छे ऑफर होते हैं, उन्हें पता ही नहीं होता कि कहाँ से शुरू करना है कहाँ खत्म करना है, वो कोई खास शॉट बिल्कुल परफेक्ट तरीके से लेने में समय गंवाते हैं और आखिर में उनके पास डॉयलॉग शूट करने के लिए समय नहीं बचता।

6- अपने साथियों की इज्जत करें- रोजेरो को ऐसे निर्देशक नहीं पसंद थे जो हंटरवाले की तरह काम करते थे। अपने कई इ्ंटरव्यू में उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि सिनेमा कई लोगों की मदद से बनता है इसलिए अपने साथियों की इज्जत करनी चाहिए। रोमेरो ने  एक इंटरव्यू में कहा था- मिल-जुल कर काम करिए, हुकुम मत चलाइए। सिनेमा के हर पहलू से जुड़े लोगों के पास देने के लिए कुछ न कुछ होता है। उनकी बात सुनिए और ठीक लगने पर उन पर अमल करें। वो भी आप की तरह फिल्ममेकर्स ही हैं, भले ही वो डायरेक्टर नहीं हों।

7- सीजीआई का इस्तेमाल- जॉर्ज रोमेरो की मानें तो अगर आपको कम बजट की फिल्म बनानी है तो सीजीआई का इस्तेमाल करना सीखना होगा। सीजीआई के इस्तेमाल से आप केवल शूटिंग के दौरान आने वाली कई मुश्किलों का भी पोस्ट प्रोडक्शन में दूर कर सकते हैं। लेकिन रोमेरो मानते हैं कि सीजीआई का इस्तेमाल पैसे की कमी से होने वाली दिक्कतों को भी दूर करने में किया जा सकता है। साल 2009 में एक इंटरव्यू में रोमेरो ने कहा था- अगर आप कम बजट में शूटिंग कर रहे हैं तो सीजीआई काफी मददगार है। अगर आपको बंदूक से गोली चलवानी है और पहले शॉट में गोली नहीं चलती तो आप इसे सीजीआई में फ्लैश से बनवा सकते हैं। जब आपको तेजी से काम करना हो तो ये बड़ी सुविधा है। जब आप कम बजट में काम कर रहे हों तो सबसे कीमती चीज होती है सेट पर बिताया गया समय। सेट का काम जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी निपटाना चाहिए और सीजीआई में इसमें बेहद मददगार साबित होती है।

8- अपनी सोच पर कायम रहो- रोमेरो ने साल 2016   में एक इंटरव्यू में नए फिल्मकारों को राय दी थी कि उन्हें अपने आइडिया पर पूरा भरोसा रखकर काम करना चाहिए। रोमेरो ने कहा – मैं बस इतना कहना चाहूंगा कि अपने आइडिया पर कायम रहो। अगर तुम्हारे दिल में कोई आइडिया है और तुम उसे सामने लाना चाहते हो तो ये तुम पर है। तुम उसे कितनी अच्छी तरह सामने लाते हो ये तुम पर है। तुम्हें बस इतनी ही राय दी जा सकती है कि बुरी चीजों को खुद पर हावी मत होने दो। 1988  में रोमेरो ने एक इंटरव्यू में कहा था कि फिल्म कारोबार में बने रहने के लिए आपको काफी मोटी चमड़ी का बनना पड़ता है।

9- हर दम मजा नहीं आने वाला- फिल्म बनाना एक लम्बा और सामूहिक सहयोग वाला काम है। फिल्म भले ही आज सबसे ज्यादा आकर्षक, कमाऊ और लोकप्रिय मीडियम हो लेकिन फिल्म बनाना एक थकाऊ, उभाऊ और खपाऊ काम है। काम पूरा होने जाने पर परिणाम देखकर भले ही आपकी सारी थकान दूर हो जाए और रचनात्मक संतुष्टि मिले आपको फिल्म निर्माण के दौरान की बोझिल प्रक्रिया के लिए तैयार रहना चाहिए। अगर आप ये सोचते हैं कि फिल्म बनाने में हर दिन हर पल मजा आएगा तो आप गलत हैं। फिल्म के लिए बजट जुटाना, प्रोडक्शन की तैयारी, कॉस्टिंग, शूटिंग, पोस्ट-प्रोडक्शन और रिलीज हर स्तर पर आपको काफी गैर-रचनात्मक शारीरिक और मानसिक श्रम करना पड़ेगा। मसलन अगर आपको दो घंटे की फिल्म बनानी है और आपने 10 घंटे की शूटिंग की है तो सभी शॉट में किन शॉट को फिल्म में रखना है इसे छांटना रचनात्मकता के साथ-साथ ही परिश्रम का भी काम है। सैकड़ों शॉट को बार-बार देखना और उनमें से अंतिम चुनाव करना खपाऊ काम है। लेकिन इससे गुजरे बिना आपकी फिल्म कभी सिनेमा हॉल का मुंह नहीं देख सकती।