द 39 स्टेप्सः रहस्य-रोमांच, जासूसी और याद्दाश्त के 39 कदम…

The 39 Steps 1935, filmbibo

रंगनाथ सिंह

अल्फ्रेड हिचकाक दुनिया के महानतम फिल्म निर्देशकों में से एक माने जाते हैं। उन्हें मास्टर आफ सस्पेंस कहा जाता है। लेकिन यह उनका अधूरा परिचय ही है। फिल्मों में हिचकाक के योगदान को देखते हुए उन्हें एक फिल्म स्कूल कहना ज्यादा उचित होगा। हिचकाक आम दर्शकों को जितना पसंद आते हैं उतना ही वह फिल्म बनाने वालों को भी प्रभावित करते हैं। फिल्मी भाषा में जिसे फिल्म का क्राफ्ट कहते हैं उसमें हिचकाक अन्यान्य हैं। फिल्म का व्याकरण सीखने के लिए नए फिल्मकारों को हिचकाक को जमकर देखने की सलाह दी जाती है। हिचकाक की फिल्मों के आर्ट पक्ष पर फ्रांसिसी न्यू वेव फिल्मकारों ने मुहर लगायी। न्यू वेव के अगुआ फिल्मकार त्रुफोअ ने उनसे लम्बी बातचीत को किताब के तौर पर छपवाया। जिसकी चर्चा हम भविष्य में कभी करंगे।

आज हम हिचकाक की की शुरुआती फिल्मों से  एक दि 39 स्टेप्स की बात करेंगे। 1935 में आई इस फिल्म को ब्रिटिश फिल्म इंस्टिट्यूट ने ब्रिटेन की सर्वोत्तम 100 फिल्मों की सूची में 4 स्थान  पर रखा है। फिल्म की मूलकथा जान बुचैन के दि 39 स्टेप्स नामक उपन्यास पर आधारित है। पहले दृश्य में कनाडा से आया नायक रिचर्ड हैने लंदन के एक सभागार में एक प्रदर्शनी देख रहा होता है। जहां मिस्टर मेमोरी नामक एक व्यक्ति अपनी आश्चर्यजनक फोटोजेनिक मेमोरी का प्रदर्शन कर रहा होता है। इसी बीच हाल में गोली चल जाती है। भगदड़ मच जाती है। रिचर्ड एक महिला को भीड़ में से निकलने में मदद करता है। महिला उसके साथ उसके घर चलने का प्रस्ताव रखती है। घर पहुंचकर वह महिला जिसका नाम अन्नाबेला स्मिथ है, रिचर्ड को बताती है कि वह खुफिया जासूस है और उसे पता चला है कि कुछ लोग देश की खुफिया जानकारी चोरी करने वाले हैं। अन्नाबेला अपनी बात के प्रमाण के तौर पर हैने को उसके घर के बाहर खड़े दो बदमाशों को दिखाती है। वो बदमाश अन्नाबेला का पीछा करते हुए रिचर्ड के घर तक आए थे और अब उस पर नजर रखे हुए थे।

उसी रात अचानक अन्नाबेला रिचर्ड के कमरे में आती है। उसके कदम लड़खड़ा रहे होते हैं। उसके हाथ में एक नक्शा होता है। वह हैने के हाथ में वह नक्शा देकर वहीं गिर पड़ती है। तब रिचर्ड देखता है कि अन्नाबेला की पीठ में खंजर धंसा हुआ है। अन्नाबेला के दम तोड़ते ही रिचर्ड नक्शे की बतायी जगह जो कि स्काटलैण्ड में है, जाने के लिए तैयार होता है। दोनों बदमाश घर के सामने अभी भी खड़े हैं। रिचर्ड भेष बदलकर निकल जाता है। ट्रेन में वह दैनिक अखबार में खबर देखता है। जिसके मुताबिक पुलिस को अन्नाबेला के कत्ल के आरोप में उसकी तलाश है।

रिचर्ड के पीछे पुलिस पड़ चुकी है। वह उनसे बचने की कोशिश में उन्हीं बदमाशों के सरगना के चंगुल में फंस जाता है। नायक किस तरह से पुलिस और बदमाशों दोनों से बचते हुए असली अपराधियों को पकड़वाता है यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी। किसी संस्पेस थ्रिलर की कहानी का उद्घाटन कर देना उसकी हत्या कर देने के समान है। जो हम नहीं करेंगे।

फिल्म की कहानी में कोई झोल नहीं है। हिचकाक की महानता इसी में है कि उनकी किसी भी फिल्म का संस्पेंस खुलने पर दर्शक उन्हें कोसते नहीं। ज्यादातर संस्पेंस फिल्मों निर्देशक कुछ तथ्य छिपाकर रखते हैं। फिल्म का सस्पेंस खोलने के लिए उन्हीं छिपे तथ्यों का सहारा लेते हैं। यह काफी सतही तरीका है। हिचकाक ऐसा कभी नहीं करते। वह सब कुछ सामने रख देते हैं। फिर भी पहली बार फिल्म देख रहा व्यक्ति फिल्म का अंत का अनुमान नहीं लगा सकता। रहस्य-रोमांच के जाल में फंसा दर्शक अंत तक अपनी सीट से चिपका रहे, हिचकाक इसके मास्टर है।