फिश टैंक: असुरक्षा का प्रेम, प्रेम की आशंकाएं और टूटे-बिखरे घरों का इमोशनल खालीपन

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फिल्म की निर्देशक ने फिश टैंक में लीड रोल के लिए अभियन की दुनिया से अनजान आम लड़की कैटी जार्विस को चुना।

रंगनाथ सिंह

फिश टैंक ‘, यही नाम है इस फिल्म का. जबकि पूरी फिल्म में कहीं कोई फिश टैंक नहीं दिखता. फिल्म देखने के बाद आप फिल्म के बारे में सोचेंगे, कहानी के बारे में सोचेंगे, चरित्रों और घटनाओं के बारे में सोचेंगे. और ये भी सोचेंगे कि फिल्म का नाम ‘फिश टैंक’ क्यों था !

‘फिश टैंक’ एक छोटे से परिवार की कहानी है.  परिवार में सिर्फ तीन लोग हैं,एक नौजवान माँ जोनी,उसकी किशोर बेटी मिया और छोटी बेटी टाइलर. ज्यादा  स्क्रीन-टाइम लेने के कारण फिल्म की मुख्य नायिका मिया प्रतीत होती है. रुढ़ अर्थों में वह मुख्या नायिका है भी. लेकिन मेरी समझ में, फिल्म का मुख्य किरदार वो ‘फिश टैंक’ है जो पूरी फिल्म में अदृस्य रहकर प्रस्तुत रहता है.

मिया एक किशोरी है. किशोरावस्था में व्यक्ति के अन्तः और वाह्य जीवन में आने वाले अपूर्व परिवर्तन उसे ज्यादा संवेदनशील बना देते हैं. मिया भी अपने और अपने परिवेश के प्रति अतिरिक्त संवेदनशील है. लेकिन वह दूसरे बच्चों से थोड़ी अलग है. कारण,उसका परिवार दूसरे बच्चों से अलग है. उसकी माँ,जो देखने में एक पन्द्रह वर्षीय किशोरी की माँ नही लगती है, परिवार में रहते हुए भी एक हिप्पी सरीखा जीवन जीती है. उसके बर्ताव से  यह कत्तई नहीं लगता कि वो इन दोनों बेटियों कि माँ है. ऐसा लगता है जैसे किसी किराये के मकान में तीन लोग साझेदारी में रह रहे हों. पूरे घर में कोई व्यवस्था नहीं दिखती,कोई सलीका नही दिखता. दिखता है तो बस ये कि ये घर किसी तरह चल रहा है.

परिवार के इस माहौल का दोनों बच्चियों पर बुरा असर पड़ा है. छोटी बच्ची टाइलर अपने उम्र के लिहाज से बहत ज्यादा कर्कश और लड़ाकू है. मिया भी बहुत ज्यादा मूडी,तुनकमिजाज,झगड़ालू,आवारा और अवसादग्रस्त है.  मिया को डांस में रुचि है. लेकिन वो उसका अभ्यास सबके सामने नहीं करती,बल्कि एकांत में एक उजाड़ फ़्लैट में करती है. उसका रवैया उसे दूसरे से घुलने-मिलने नहीं देता. इसलिए उसका कोई दोस्त भी नहीं है.

इस परिवार में कोई पुरुष नही है. कोनोर के रूप में पहले पुरुष का आगमन होता है. कोनोर मिया की माँ जोनी का बॉय-फ्रेंड है. उसका घर में आना-जाना शुरू हो जाता है. एक दिन औचक घर में मिया से उसका सामना होता है. मिया उसे पहली बार अनमने ढंग से देखती है. जाहिर होता है कि उसे अपनी माँ का यह कोनोर पसंद नहीं है.  कोनोर अपनी तरफ से पहल करके उससे दोस्ती करता  है. मिया को गाना सुनते देख वह उसे अपने पसंदीदा गाने  के बारे में बताता है. उसे वो गाना सुनने को कहता है.

कोनोर धीरे-धीरे मिया और  उसकी बहन का विश्वास जीत लेता है. वह साथ-साथ समय बिताते हैं. पिकनिक पे जाते हैं. छोटी-छोटी मौज-मस्ती करते हैं. कुछ देर के लिए ऐसा लगता है कि जैसे कोनोर के आने से यह परिवार मुक्कमल हो गया है. इस परिवार में जिस बात कि कमी थी उसे कोनोर ने पूरा कर दिया है. मिया और उसकी बहन के लिए अभिभावक बन कर और उसकी माँ का सहजीवी बन कर.

यहाँ से कहानी एक अलग दिशा में आगे बढती है. मिया के अकेलेपन,अवसाद,असुरक्षा को कोनोर एक संग,उमंग और सुरक्षा देता है. जब कोनोर से वह अपरिचित थी तब उसने उसकी जेब से पैसे चुराये थे,अब वो पूरे विश्वास से उसके दफ्तर जाकर उससे पैसे मांगती है. क्यूंकि उसे डांस प्रतियोगिता में हिस्सा लेना है. कोनोर उसे पैसे देता है. साथ में अपना हैंडी-कैम  भी देता है ताकि मिया अपने डांस का वीडियो बनाकर प्रतियोगिता में  चयन के लिए भेज सके. इस तरह उनका आपसी सम्बंध सहजतर होता जाता है.

कोनोर और मिया के संबद्ध जिस दिशा में आगे बढते दिखते हैं उससे लगता है कि मिया कही दूसरी लोलिता तो नहीं बनने जा रही. मिया जब एक रात संयोगवश कोनोर को आपनी माँ के संग सेक्स करते देख लेती है तो वह अपने कमरे में आकार दरवाजा धडाक से बंद करती है.जिसकी आवाज कोनोर के कानों तक भी पहुँच जाती है. उसे कोनोर को अपने माँ के संग देखने बुरा लगा था. ऐसे ही, जब कोनोर मिया के संग एक नए लड़के बिली को देखता है तो उसके हाव-भाव में उसकी जलन साफ़ झलक जाती है. वह घर आने पर मिया से कहता कि, वह लड़का तुम्हारे लिए काफी बड़ा लग रहा था! मिया कहती है, नहीं वो सिर्फ १९ का है सो ज्यादा बड़ा नहीं है…असलियत में वो लड़का मिया का दोस्त भर है, प्रेमी  नहीं…

एक रात मिया कि माँ ज्यादा शराब पीकर बेसुध हो जाती है. कोनोर ड्राईंग-रूम में बैठकर शराब पी रहा होता है. मिया आती है, कोनोर उससे वो डांस करके दिखने को कहता है जो उसने प्रतियोगिता के लिए तैयार किया है. थोड़े मनुहार के बाद मिया मान जाती है और कोनोर को डांस करके दिखाती है. डांस खत्म होने पर कोनोर उसे आपने पास बुलाता है. करीब बैठने को कहता है. मिया उसकी बातें मानती है. कोनोर की कामचेष्टा मुखर होती है. मिया उसे सहज स्वीकार कर लेती है. दोनों शरीरिक’सम्बंध बनाते हैं.

कोनोर मिया से कहता है कि वो इस घटना का जिक्र किसी से ना करे. मिया मौन सहमति दे, अपने कमरे में आ कर सो जाती है. सुबह आँख खुलते ही उसकी बहन टाइलर उसे बताती है कि कोनोर उसकी माँ को छोड़ कर चला गया. मिया बदहवास बाहर आती है, देखती है कि उसकी माँ रो रही है. मिया कोनोर के पीछे भागती है लेकिन वो अपनी कार से निकल जाता है.

मिया तत्काल लोगों से रास्ता पूछते-पूछते कोनोर के घर पहुंच जाती है. कोनोर उसे घर आया देख कर भौंचक्का होता है, उसे बाहर से ही कुछ पैसे देकर रेलवे स्टेशन पर छोड़ देता है. मिया घर नही जाती. कोनोर ने उसे अपने घर पर देख कर जैसे रिएक्ट  किया था उससे मिया के मन में संदेह के बीज पड़ जाते हैं. वह वापस कोनोर के घर जाती है. घर का मुख्य दरवाजा बंद मिलता है. वह घर के पीछे से एक खिड़की के सहारे अंदर घुसती है. घर के अंदर उसे वही हैंडी-कैम दिखता है. वह यूँ ही उसे चलने लगती है. मिया उसके अंदर एक छोटी बच्ची की वीडियो देख कर दंग रह जाती है. वह समझ जाती है की कोनोर शादी-शुदा है,उसकी बच्ची है,अपना परिवार है.

मिया जुगुप्सा से भर जाती है. अचानक, वह वहीँ फर्श पर बैठकर पेशाब करने लगती है. उसे किसी के आने की आहट मिलती है. वह चुपचाप पीछे की खिडकी से निकल जाती है. मुख्य सड़क पर आते ही उसे कोनोर की बेटी अकेली खेलती हुई मिल जाती है. वह उसे अपने साथ ले जाती है. कोनोर की बेटी को लेकर वह बहुत दूर निकल आती है, इसी बीच एक दुर्घटना में वह बच्ची डूबने-डूबते बचती है. वह बच्ची को वापस कोनोर के घर छोड़ आती है. जब वह बच्ची को छोड़कर जा रही होती है तो कोनोर उसका पीछा करता है, वह भागती है लेकिन कोनोर उसे पकड़ लेता और एक चांटा मरता है.

मिया उस डांस प्रतियोगिता में जाती है. वह प्रतियिगिता मूलतः इरोटिक डांस के लिए थी, यह देखकर मिया वहाँ से लौट आती है. वापस आकर वह से अपने दोस्त बिल के पास जाती है. बिल उसे बताता है कि उसका घोड़ा मर गया और वो कार्डिफ जा रहा है. वह मिया को भी अपने साथ आने को कहता है. मिया तैयार हो जाती है. मिया जिस सहजता से बिली के संग जाने को तैयार हो जाती है वह आश्चर्यजनक है. उसका बिली से कोई प्रगाढ़ सम्बंध नहीं है लेकिन मिया के अंदर अपने परिवेश से मुक्ति तड़प इतनी ज्यादा है कि उसे इस बात से कोई फर्क नही पड़ता कि वो कहाँ और किसके साथ जा रही है.

बिली ने जिस घोड़े की मौत के बारे में बताया उसी कि वजह से बिली और मिया कि दोस्ती हुई थी. मिया को यह घोड़ा रोड के किनारे एक अहाते में बंधा दिखता था. मिया उसे बार-बार उसे आजाद कर देना चाहती थी. इस प्रयास में उसे बिली के  भाई और दोस्त के हाथों पीड़ित भी होना पड़ा. वो उसके संग जबरदस्ती करने लगे, वह किसी तरह से जान बचाकर भागी. अगले दिन वह वहाँ गिरे अपने सामान लेने जाती है और उसकी बिल से दोस्ती हो जाती है.

मिया जिस तरह उस घोड़े को बार-बार आजाद करने की कोशिश करती है वह काफी अर्थवान है. मिया अपने और उस घोड़े में एक समानता देखती है. वह खुद को भी किसी जंजीर से बंधा हुआ महसूस करती है,जिससे वो आज़ाद नही हो सकती. बाद में, कोनोर के रूप में उसे वो सहारा दिखता है जो उसे आज़ादी दिला सकता है.

मिया घर आकार अपना सामान पैक करती है. माँ को जाने के बारे में बताती है. माँ कोई ऐतराज नही करती. वह संगीत की धुन पर नशे में झूम रही होती है. मिया भी उसका साथ देती है, टाइलर भी उनके साथ आकर डांस करने लगती है. इस बिखरे हुए परिवार को हम आखिरी बार एक गीत पर एक साथ,एक लय में मचलते हुए देखते है. जिस गाने पर यह परिवार झूम रहा है उसके बोल ध्यान देने वाले हैं- “जिन्दगी बड़ी कुत्ती चीज है”

थोड़ी देर बाद मिया अपनी माँ को उसी मदहोश हालत में छोड़ बाहर निकल जाती है. बिल गाड़ी लेकर उसका इन्तजार कर रहा होता है. टाइलर उसे रोकने की कोशिश करती है. वो नहीं रुकती. फिल्म खत्म हो जाती है. और आपके जेहन में फिल्म से जुड़े सवाल उठने शुरू हो जाते हैं.

सबसे पहला सवाल तो यही उठता है कि क्या मिया की जिन्दगी भी उसकी माँ के ढर्रे पर जा रही है? मिया की माँ जो इतनी कम उम्र में दो बच्चियों की अकेली माँ के रूप में जीवन जी रही है उसकी पृष्ठभूमि में मिया जैसी ही कोई कहानी तो नहीं ? क्या उस छोटी बच्ची टाइलर की जिन्दगी अपनी माँ और बहन से अलग होगी ? क्या इस परिवार कि बर्बादी के पीछे कोनोर जैसे सभ्य दिखने वाले लोग जिम्मेदार हैं ? और सबसे जरुरी सवाल कि  क्या मिया, टाइलर और जोनी के पास इस “फिश-टैंक’ से निकलने का कोई रास्ता है ? या  एक अंतहीन कैद ही उनका मुस्तकबिल है ?

हमने पहले ही कहा था,’फिश-टैंक’ ही कहानी का मुख्य-किरदार है. बाकी तीनों किरदार इसी ‘फिश टैंक’ में कैद हैं.  इसीलिए फिल्म का शीर्षक ‘फिश टैंक’ है. यदि आपकी मानवीय संवेदना के अनछुए पहलु में रुचि हो तो, ‘फिश टैंक’ जरूर देखें. फिल्म देखने के बाद(पहले नहीं) मिया का किरदार निभाने वाली अदाकारा कैटी जैर्विस का जीवन परिचय जरूर पढ़ें.

फिल्म की निर्देशक अन्द्रिया अर्नोल्ड कोई प्रसिद्ध नाम नहीं हैं लेकिन इस फिल्म को देखने के बाद आप उन्हें याद रखेंगे.  और संभव है कि आप भी मेरी तरह यह सोचे कि इस फिल्म के विषय के संग एक महिला निर्देशक ही उचित न्याय कर सकती थी.