गुड़गांव: एक शहर के अंधेरे बंद कमरे

gurgaon, pankaj tripathy, filmbibo
शंकर रमन की फिल्म में पंकज त्रिपाठी की भूमिका की समीक्षकों ने काफी तारीफ की है। (तस्वीर- फिल्म पोस्टर)

शाहरुख खान की “जब हैरी मेट सेजल”, सलमान खान की “ट्यूबलाइट” और रणबीर कपूर की “जग्गा जासूस” बड़े स्टार और बड़ी लागत के बावजूद दर्शकों का पैसा वसूल करवाने में विफल रहीं। लेकिन छोटे बजट और छोटे स्टार वाली फिल्म गुड़गाँव को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने पैसा वसूल फिल्म बताया है। गैंग ऑफ वासेपुर से चर्चा में आए पंकज त्रिपाठी के अलावा फिल्म में कोई जाना-माना नाम नहीं है लेकिन अपनी मजबूत पटकथा और दमदार अभिनय के दम पर फिल्म देखने वालों पर छाप छोड़ने में सफल रही। हालांकि फिल्म को उतने दर्शक नहीं मिले जितने की ये हकदार है लिहाजा एक और अच्छी फिल्म दर्शकों की बेरुखी की वजह से बॉक्स ऑफिस पर पिट गई।

फिल्म गुड़गाँव के दबंग कारोबारी केहरी सिंह (पंकज त्रिपाठी), उसके बेटे निक्की सिंह (अक्षय ओबराय) और गोद ली हुई बेटी प्रीत (रागिनी खन्ना) के कहानी के बहाने गुड़गाँव के एक गाँव से शहर बनने की गाथा है। फिल्म में पंकज त्रिपाठी की भूमिका जाहिर तौर पर गॉडफादर, नायकन और सरकार राज जैसी फिल्मों के मुख्य किरदारों की याद दिलाती है। लेकिन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) से प्रशिक्षित पंकज सैकड़ों फिल्मों में आजमाए जा चुके रोल में भी अपनी विशिष्ट छाप छोड़ने में कामयाब रहते हैं।

फिल्म देखने वाले दर्शकों और समीक्षकों ने फिल्म की कहानी, निर्देशन के अलावा पंकज त्रिपाठी की एक्टिंग की विशेष चर्चा की है। जाहिर है गैंग ऑफ वासेपुर, नील बटे सन्नाटा, अनारकली ऑफ आरा में अलग-अलग भूमिकाओं में नजर आए पंकज ने इस फिल्म से खुद को ज्यादा मजबूत अभिनेता के रूप में पेश किया है। मुश्किल ये है कि बॉलीवुड को अभिनेताओं से ज्यादा स्टार पसंद हैं भले ही उनकी फिल्में पिट जाएं। अगर आप अच्छी फिल्म देखने के शौकीन हैं तो ये फिल्म जरूर देखें।