काई पो चे : काश कटी पतंगों को थाम लेते सुशांत

kai po che Sushant Singh Rajput
चेतन भगत के नॉवेल पर बनी 'काई पो चे' सुशांत सिंह राजपूत की डेब्यू फ़िल्म थी।

अभिषेक कपूर की फ़िल्म ‘काई पो चे’ 2013 में रिलीज़ हुई थी। यह फ़िल्म चेतन भगत के उपन्यास ‘थ्री मिसटेकस ऑफ़ माइ लाइफ’ पर बनाई गयी एक शानदार फ़िल्म है। इसी फ़िल्म के जरिये सुशान्त सिंह राजपूत को छोटे पर्दे में सालों काम करने के बाद बड़े पर्दे पर अपना अभिनय दिखाने का मौका मिला और इस फ़िल्म के बाद सुशांत ने अपने लिए बड़े पर्दे का दरवाज़ा लिया। सुशांत छोटे से छोटे रोल में भी दर्शकों पर अपनी अमिट छाप छोड़ने लगे और देखते ही देखते ‘एम एस धोनी द अनटोल्ड स्टोरी’ जैसी फिल्में कर बॉलीवुड में अपनी जगह बना ली।
काश कटी पतंगों को थाम लेते सुशांत 
आज सुशान्त नहीं है हमारे बीच पर उसकी यादें हमेशा जिंदा रहेंगी। खासकर हम दर्शकों के लिए जो उन्हें सिर्फ पर्दे पर देखते आ रहे थे। और अब यह विडम्बना है ही कि आगे देख नहीं पाएंगे। 14 जून को उन्होनें आत्महत्या कर ली। उनकी मौत के बाद उन्हें जानने और समझने की इच्छा लोगों में दिन-प्रति-दिन बढ़ती नज़र आ रही है। एक तरफ जहां भाई-भतीजावाद के खिलाफ़ लोग विरोध कर रहे हैं और सुशांत के मौत का जिम्मेदार समझ रहे हैं तो वहीं उनके जीवन में जो लोग मौजूद थे या जिन्होंने उनके साथ काम किया था वो उनकी यादें और बातें सोशल-मीडिया पर लगातार शेयर कर रहे हैं।

दोस्ती की कहानी है काई पो चे
यह फ़िल्म तीन दोस्तों, ईशान भट्ट (सुशां सिंह राजपूत), गोविंद (राजकुमार राव) और ओमी (अमित साध) की कहानी है। ये तीनों दोस्त एक साथ सपने देखते हैं और उसे पूरा करने में जुट जाते हैं और एक कोचिंग, दुकान और क्रिकेट अकादमी खोलते हैं। उनके इन सपनों को पूरा करने में ओमि के मामा (मानव कौल) मदद करते हैं जिसके बदले वो ओमी से अपनी राजनीतिक पार्टी में साथ चाहते हैं। चीज़ें ठीक होने लगती है लेकिन कुछ परिस्थितियाँ ऐसी बन जाती है कि उनकी कहानी वहीं आ कर खड़ी हो जाती है जहां से शुरू हुई थी। लेकिन इनकी मजबूत बोंडिंग इन सभी से सामना करते हैं और दुबारा से नयी उम्मीद और लगन से फिर खड़े होते हैं।

ईशान अपने लिए नहीं दूसरों के लिए जीता है
फ़िल्म में जहां गोविंद और ओमी व्यक्तिगत सफलता हासिल करना चाहते हैं वहीं ईशान इन सबसे अलग अपने क्रिकेट अकादमी के एक लड़के अली के टैलेंट में अपन सपना ढूंढ लेता है और उसे पूरा करने की ठान लेता है। ईशान जी-जान लगाकर अली को क्रिकेट सीखाता है, उसके बेहतर ट्रेनिंग का ध्यान रखता है। ईशान को न पैसों से मतलब न और न ही पावर से। वो इन दोनों के खिलाफ़ सिर्फ़ और सिर्फ़ इंसानियत पर भरोसा रखता है। उसका यह व्यवहार तीनों दोस्तों के बीच मन-मुटाव का कारण बनता है। ईशान एक बहुत ही संवेदनशील इंसान है जिसे किसी का भी दुख देखा नहीं जाता और वो खुद से जितना कर सकता है वो बस कर देता है बिना कुछ सोचे।

ओछी राजनीति और सांप्रदायिकता
फ़िल्म में दो ऐसी महत्वपूर्ण घटनाएँ हैं जो इनकी दोस्ती में आए उतार चढ़ाओ को बहुर बारीकी से दिखाती है। पहली घटना 2001 गुजरात में आए भूकंप की है और दूसरी 2002 में हुए गोधरा कांड की। ये दोनों घटनाएँ फ़िल्म को एक वास्तविकता देती है और लोगों पर इसके प्रभाव की एक झलक भी प्रस्तुत करती है। इन्हीं घटनाओं का शिकार इनकी दोस्ती भी हो जाती है। ओमी इसी घटना में अपनों को खो देता है और अपनी नयी दुनिया बना लेता है जिसमें उसके दोस्तों के जगह नफ़तर ले लेती है।

एक प्रेम कहानी
इन सभी के बीच ईशान की बहन विद्या भट्ट (अमृता पूरी) और गोविंद (राजकुमार राव) में प्रेम हो जाता है। विद्या अपने किरदार को बखूबी निभाती हैं और फ़िल्म मे दोस्ती की कहानी के साथ-साथ एक प्रेम कहानी भी चलती रहती है। काई पो चे फ़िल्म दोस्ती, प्यार, झगड़ा, सफलता, असफलता, गुस्सा, ग़लती और इन सब में उलझे ईश, गोवि और ओमी की कहानी है काई पो चे।