मेरे भैया और डॉ रामविलास शर्मा

surya kant tripathi nirala aur ram vilas sharma
कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला (बाएँ) और आलोचक रामविलास शर्मा।

भैया मुझसे तकरीबन दो साल बड़े, बिजली विभाग में बाबू थे।अपनी साइकिल लिए हर शाम मेरे पास बिरला छात्रावास चले आया करते । बेहद व्यवहार कुशल भैया की बीएचयू हिंदी विभाग के सारे अध्यापकों से खूब पटती थी।

1984-85 की बात है।एक शाम जब वे हॉस्टल आये तो मैं, ओम प्रकाश द्विवेदी और शिवशंकर मिश्र ,रामविलास जी के यहां जा रहे थे। भैया के राजनीतिक और क्रांतिकारी साथी गण रामविलास जी का मजाक उड़ाया करते।

भैया ने कहा कि चलो तुम लोगों के साथ आज हम भी देख लें कि इन्होंने कितना पढ़ा है? भैया पूरा मूड बना चुके थे। शिवशंकर ने मुझसे कहा कि यार इन्हें लेकर आप अस्सी चले जाइये। ये कहीं रामविलास जी से उलझ न जाएँ।

बहरहाल, हम चारो लोग रामविलास जी के यहां गये। उन दिनों रामविलास जी वेदों पर काम कर रहे थे। वे बहुत देर तक सिंधु सभ्यता पर बात करते रहे। भारतीय भाषाओं और यूरोपीय भाषाओं के शब्द भंडार, उनकी सांस्कृतिक और संरचनागत विशेषताओं को समझा रहे थे। उनकी बोलियों, उनके बर्तनों पर खुदे चित्र आदि छोटी-छोटी खूबियों को समझाते रहे। ऐसा लगता जैसे उन्होंने सिर्फ इतिहास को पढ़ा भर नहीं उसे साक्षात देखा हो। जैसे वह पूरी सभ्यता उनकी आंखों के सामने बन बिगड़ रही हो।

भैया बुरी तरह ऊब रहे थे। अचानक उन्होंने रामविलास जी को रोक कर कहा- मुझे आपसे एक बात पर बहस करनी है।” हम सब लोग किसी आशंका से चौंक गए। रामविलास जी ने पूछा-“किस बात पर?” “सुना है आप सांस्कृतिक क्रांति का विरोध करते हैं”- भैया ने कहा। “हाँ “-रामविलास जी ने संक्षिप्त सा जवाब दिया। भैया-“किस आधार पर?”

रामविलास जी ने बताया-“माओ त्से तुंग ने नव जनवादी क्रांति की जो थीसिस दी थी, उसी के आधार पर। भैया अचकचा गए-“ठीक है अगली बार नवजनवादी क्रांति को पढ़कर आऊंगा तब आपको बताऊंगा।” आप क्या करते हैं?- रामविलास जी ने भैया से पूछा।

भैया के यह बताने पर कि वे बिजली विभाग में क्लर्क है और यूनियन से जुड़े हैं। रामविलास जी देर तक उनसे ट्रेडयूनियन के नेताओं उनके आंदोलनों के बारे में बतियाते रहे। किसी ट्रेडयूनियन नेता का जिक्र आया तो रामविलास जी ने जिज्ञासा से पूछा कि वे बनारस आये हैं क्या?

दूसरे दिन भैया के साथ एक उम्रदराज व्यक्ति उनकी साइकिल पर बैठ कर आये। भैया ने मुझसे कहा कि कल शर्मा जी इन्हीं के बारे में पूछ रहे थे। रामविलास जी सिर्फ शाम को 6 से 7 बजे के बीच लोगों से मिलते थे।मैं बहुत डरते डरते उस दोपहर इन लोगों को लेकर रामविलास जी के घर पर गया। उनकी बहू ने कहा कि आप शाम को आइएगा। उन बुजुर्ग सज्जन ने अपना नाम बताने को कहा। रामविलास जी तुरन्त निकल कर आये। पुराने दिनों के दो मित्र मिल रहे थे। रामविलास जी ने भैया को भी बैठा लिया और मुझे चले जाने को कह दिया।