भारतीय संस्कृति के कण-कण में बसते हैं प्रभु श्री राम

भगवान राम अनेकता में एकता के प्रतिक हैं. श्रीराम नैतिक मूल्य , संस्कृति, सदभाव, संस्कार और मर्यादाओं के प्रतीक हैं.

अयोध्या नगरी दुल्हन की तरह सजी हुई है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अयोध्या में भगवान राम की मंदिर की आधारशिला रखी. इस अवसर पर अयोध्या नगरी दुल्हन की तरह सजी हुई है. इस पल का बड़ी बेसब्री से इंतज़ार न सिर्फ़ भारतीय कर रहे थे, बल्कि पूरा विश्व कर रहा था.

इस ऐतिहासिक अवसर पर हर दिल में उत्साह है. हर कोई भगवान राम को राम मंदिर में देखना चाहता था. आज सबकी मनोकामनाएं पूरी हुईं.

अयोध्या राम मंदिर भूमि पूजन के इस सुंदर अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘श्री राम जन्मभूमि मंदिर’ का डाक टिकट भी जारी किया है. यादगार के तौर पर जारी किया गया ये डाक टिकट राम जन्मभूमि मंदिर के मौजूदा मॉडल पर बनाया गया है. इससे पहले भी प्रधानमंत्री मोदी भगवार श्री राम पर 11 स्मारक डाक टिकट जारी कर चुके हैं.

इस विशेष अवसर पर भी कुछ लोग भगवान राम के मंदिर के शिलान्यास को लेकर विरोध जता रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी के भूमि पूजन को भी ये लोग धर्म विरोधी बता रहे हैं.

ऐसी विरोधी सोच रखने वालों को द्रौपदी ट्रस्ट की चेयरपर्सन नीरा मिश्रा खरी-खरी सुन दीं.

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया में पीएम मोदी के राम मंदिर का उद्घाटन करने को लेकर काफी बकवास बातें हो रही हैं, इसे भारतीय संविधान के खिलाफ बताया जा रहा है. इस तरह की बातें भारतीयों को शोभा नहीं देतीं. भगवान राम एक आदर्श राजा थे, जिन्होंने व्यक्तिगत बलिदानों की कीमत पर भी राजधर्म का पालन किया था.

वे आगे कहती हैं “हमारी संस्कृति श्रद्धा को लेकर बेहद स्पष्ट है. हम अपने भगवान या रचनाकार, हमारे माता-पिता व पूर्वजों की सदैव पूजा करते आए हैं. हमारे आदर्श ही हमारे जीवन के स्त्रोत हैं. मनु वंश से राम ऐतिहासिक राजा है, जहां से सभी हिंदुओं ने अपने प्राचीन वंश को प्राप्त किया है. उन्हें भगवान रूप में पूजनीय माना है, जिन्होंने सब के भाग्य की देखभाल बिना किसी पूर्वाग्रह के की है.”

उन्होंने आगे बताया कि भारतीय संस्कृति आध्यात्मिकता के लोकतांत्रिक सिद्धांतों का पालन करती है. यही सार्वभौमिकता मनुष्यों को जीवन के अन्य रूपों और प्रकृति से जोड़ता है. हमारी संस्कृति में कट्टर धार्मिक विचारों जैसा कुछ नहीं है. कट्टर धार्मिक सोच राजनीतिक विचारधाराओं से प्रेरित होती हैं. आगे चलकर यही विचारधारा मानवता को विभाजित कर देती हैं. हमारी संस्कृति के लिए बहुत बुरी चीज़ हैं ऐसी कट्टर विचारधाराएं.

अंत में कहती हैं कि आक्रमणकारियों व उपनिवेशवादियों को हमारे धार्मिक सिद्धांतों की तार्किक और बौद्धिक समझ नहीं थी, इसलिए वह हमारी संस्कृति और इतिहास की तुलना अपने सीमित ज्ञान से करते रहे हैं. यह सब वे अपने राजनीतिक उत्थान के लिए करते रहे हैं. आक्रमणकारी हमारी संस्कृति के लोगों को बदनाम करने के लिए अपनी  क्षमता और अध्यात्मिक के बल से हम सबसे ईष्या करते हैं. ऐसे लोगों से हमें दूर रहना चाहिए.

नीरा मिश्रा के अलावा भारतीय सेना के रिटायर्ड लेफ़्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी ने भी इस विशेष अवसर पर सबके सामने अपना विचार रखा. उन्होंने ने कट्टर धार्मिक सोच रखनेवालों से हमेशा दूरी बनाकर रहने की सलाह दी.

राम मंदिर के शिलान्यास को लेकर बेहद प्रसन्न हैं. वे कहते हैं “आज श्रीराम के भव्य और दिव्य मंदिर के भूमि पूजन के समापन पर मन बहुत आल्हादित है. वर्षों की प्रतीक्षा पूरी हुई.”

उन्होंने ने आगे कहा कि श्रीराम और माता जानकी हर भारतवासी के हृदय में निवास करते हैं. श्रीराम नैतिक मूल्य , संस्कृति,सदभाव,, संस्कार और मर्यादाओं के प्रतीक हैं. उन्होंने हमेशा समाज में समरसता,सदभावना, खुशहाली और एकता का संदेश दिया. इसीलिए उनके प्रशासन को राम राज्य की संज्ञा दी गई है.

आगे कहते हैं “आज जिस सौहार्द ,प्रेम और भाईचारे के साथ हर भारतवासी ने इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है, वह अनुकरणीय है. मुझे पूरा विश्वास है कि आज का दिन एक नये भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा और भारत विश्व में अनेकता में एकता की एक अभूतपूर्व मिसाल कायम करेगा.”

उनके मुताबिक़ भगवान राम सबके हैं. हर जगह हैं. बस आप प्रभु राम को याद कीजिए. पूजा कीजिए. उनके नैतिक मूल्यों को अपनाएं. इससे आपका जीवन सुखमय बीतेगा और जन्म सफल हो जाएगा.