शख्सियतः गीतकार अनजान जिनकी कलम से निकली थी ‘आइ एम ए डिस्को डांसर’

अभिनेता प्रेमनाथ की फिल्म 'प्रिज़नर ऑफ गोलकुण्डा (1953)' से अनजान को फिल्मों में पहला ब्रेक मिला. फिल्म के गीत 'लहर यह डोले कोयल बोले' और 'शहीदों अमर है तुम्हारी कहानी' को काफी पसंद किया गया.

सत्तर दशक में अमिताभ बच्चन के एंट्री के साथ अनजान की किस्मत ने रुख़ पलटा.
सत्तर दशक में अमिताभ बच्चन के एंट्री के साथ अनजान की किस्मत ने रुख़ पलटा.

आज बात गीतकार अनजान (Anjaan) के बारे में. अनजान यानी लालजी पांडे (Lalji Pandey). बनारस से ताल्लुक रखने वाले अनजान का शुमार हिन्दी  सिनेमा के सफल गीतकारों में होता है.

आपके उल्लेख के बगैर हिन्दी फिल्मों में संगीत की परम्परा पर बात हो नहीं सकती.

एक ज़माने में अनजान बनारस के कवि सम्मेलनों और मुशायरों की जान थे. तक़रीबन हर कायर्क्रम में उपस्थित रहते थे. उनकी कविताई में ठेठ हिन्दी शब्दों का बोलबाला रहता था. उर्दू का इस्तेमाल कम करते थे. अपनी अलहदा पहचान बनाने का अनजान ने कठिन रास्ता चुना था.

फिल्मों के लिए लिखने का दौर आया तो अपनी जड़ों के साथ पैर रखा. अनजान को उनके लिखे नए किस्म के गीतों ने अलग पहचान दिलाई. भोजपुरी के शब्दों का प्रयोग करके देशज अंदाज़ के शानदार गीत लिखे. हिंदी फिल्म ‘डॉन’ के लोकप्रिय गीतों को कौन भूल सकता है!

अभिनेता प्रेमनाथ (Premnath) की फिल्म ‘प्रिज़नर ऑफ गोलकुण्डा (1953)’ से अनजान को फिल्मों में पहला ब्रेक मिला. फिल्म के गीत ‘लहर यह डोले कोयल बोले’ और ‘शहीदों अमर है तुम्हारी कहानी’ को काफी पसंद किया गया. इसके बाद से अनजान को काम मिलते रहे.

उन्होंने अपने पास आए हर काम को इज्जत दी. शुरुआती दिनों की चुनौती को स्वीकार करते हुए संघर्ष करते रहे. उस समय आपका लिखा ‘मत पूछ मेरा कौन वतन’ काफी मकबूल हुआ. जी.एस. कोहली के धुनों से सजी फिल्म ‘लम्बे हाथ’ का यह गीत काफी मशहूर हुआ.

अपने ज़माने के बड़े स्टार राजकुमार (Rajkumar) की फिल्म ‘गोदान’ अनजान की महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक थी. कथा सम्राट प्रेमचंद (Premchand) के उपन्यास पर बनी इस फिल्म में पंडित रविशंकर (Ravi Shankar) के साथ अनजान ने अच्छा काम किया.

इस बड़ी कामयाबी पर आपको साठ दशक के कई  फिल्मों में काम मिल गया. संगीतकार ओपी नय्यर के लिए ‘आपके हसीन रुख़ पर’ जैसा शानदार गीत लिखा. गुरु दत्त की की फिल्म ‘बहारें फ़िर भी आएंगी’ और जी पी सिप्पी की ‘बंधन’ सफल रही. इन फिल्मों ने अनजान को कमर्शियल सक्सेस दी.

आपका लिखा ‘बिना बदरा के बिजुरिया कैसे बरसे’ बेहद पसंद किया गया. अपने समकालीन इंदीवर (Indeevar), कल्याण जी (Kalayanji) और आनंद जी (Anandji) के साथ काम किया. कल्याण जी और आनंद जी के धुनों से बनी ‘कब क्यों और कहां’, शंकर जयकिशन की ‘उमंग’, ‘रिवाज़‘, ‘एक नारी एक ब्रह्मचारी’, संगीतकार रवि शंकर शर्मा का फिल्म ‘वंदना’ का गीत ‘आप की इनायत, आप के करमट’, आर डी बर्मन की ‘हंगामा’ के गाने ‘वाह री किस्म’ और ‘सूरज से जो किरण का नाता’ महत्वपूर्ण हैं.

सत्तर दशक में अमिताभ बच्चन (Amiatbh Bachchan) के एंट्री के साथ अनजान की किस्मत ने रुख़ पलटा. कल्याण जी और आनंद जी के धुनों से सजी ‘दो अनजाने’ का नम्बर ‘लुक छिप लुक छिप जाओ ना (1976)’, ‘बरसों पुराना यह याराना (हेरा फेरी)’, ‘खून पसीने की मिलेगी तो खाएंगे’, ‘बनी रहे जोड़ी राजा रानी की (खून पसीना)’, ‘रोते हुए आते हैं सब’, ‘ओ साथी रे’, ‘प्यार जिंदगी है’, ‘दिल तो है दिल (मुकद्दर का सिकंदर)’ जैसे गीतों से अनजान की अनोखी पहचान बन गई. लेकिन अभी सबसे बड़ी घटना घटित होनी बाकी थी.

फिल्म ‘डॉन’ की ब्लॉक बस्टर सफलता ने आपको घर-घर पहुंचा दिया. आज भी उनके लिखे ‘खाई के पान बनारस वाला, ‘इ है बम्बई नगरिया तू देख बबुआ’, ‘जिसका मुझे था इंतज़ार’ जैसे जबरदस्त गाने अमर हैं. यही कामयाबी आपने लावारिस के हिट गीतों में दुहराई ( जिसका कोई नहीं उसका तो खुदा है यारो, कब के बिछडे ).

यही नहीं अमिताभ के लिए आगे भी गीत लिखते रहे. हमें ‘जादूगर‘, ‘दो और दो पांच‘ , ‘याराना‘, ‘नमक हलाल’, ‘शराबी‘, ‘महान‘ जैसी फिल्मों को याद रखना चाहिए. जबरदस्त फिल्मकार प्रकाश मेहरा के साथ अनजान की खूब जमी.

अनिल कपूर की सुपरहिट फिल्म ‘जिंदगी एक जुआ’ और मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म ‘दलाल‘ में साथ काम किया. प्रकाश मेहरा की दूसरी कई फिल्मों में भी गीत लिखने की जिम्मेदारी अच्छे से निभाई.

अस्सी के दशक में उभरते हुए सुपरस्टार मिथुन चक्रवर्ती (Mithun Chakraborty) के गीतों के पीछे अनजान का नाम था. मिथुन दा की ‘डिस्को डांसर’ जैसे हिट गाने लिखे थे. बप्पी लहरी (Bappi Lahiri), शिबू मित्रा (Shibu Mitra) और बी सुभाष (B.Subhash) की जबरदस्त कामयाब फिल्मों से अनजान अब सदा के लिए अमर हो चुके थे.

आर डी बर्मन की ‘यह फासले यह दूरियां (जमीन आसमान)’, ‘लागी लग जाए लोगों  (अनु मलिक फिल्म पूनम)’, ‘गंगा में डूबा (अपने रंग हज़ार)’, ‘मेरी सांसों को जो’, ‘ना जाने कैसे‘, ‘वो वो न रहे (बदलते रिश्ते)‘, ‘हमराही मेरे हमराही (दो दिलों की दास्तां)‘, ‘यशोदा का नंदलाला (संजोग)’, ‘सादियां बीत गई (त्रिवेणी)’ और अनिल कपूर (Anil Kapoor) की फिल्म ‘ईश्वर‘ के शानदार गीतों को अनजान ने ही लिखा था.

अनु मलिक (Anu Malik) की पहली बड़ी हिट ‘एक जान हैं हम‘ की सफलता में आपका बड़ा योगदान था. नब्बे के दशक में सेहत मे कई उतार-चढ़ाव के बावजूद भी ‘जिंदगी एक जुआ’, ‘दलाल’, ‘आज का अर्जुन’, ‘घायल’, ‘शोला और शबनम’, ‘फूल बने अंगारे’, ‘पुलिस और मुजरिम’ जैसी बड़ी हिट फिल्में दी.

अनजान ने बहुत से गैर-फिल्मी गीतों को भी लिखा. साठ दशक में खासकर यह गीत लिखे गए. श्याम सागर, मोहम्मद रफ़ी, मन्ना डे, सुमन कल्याणपुर और अनजान की टीम ने अच्छे गैर-फिल्मी गानों की सौगात दी. रफ़ी साहब की आवाज़ में ‘मैं कब गाता‘ काफ़ी लोकप्रिय हुए. भोजपुरी फिल्मों में भी अपनी तकदीर आजमाने में  अनजान पीछे नहीं रहे. एक दौर की जबरदस्त हिट ‘बलम परदेसिया’ के लोकप्रिय गानों को अनजान ने ही लिखा था.

हिन्दी फिल्मों में बीस बरस से अधिक समय तक उपस्थिति दर्ज़ कराने वाले लालजी पांडे उर्फ अनजान बाॅलीवुड में अपनी विरासत के रुप में बेटे समीर (Sameer) को छोड़ गए.

समीर बाॅलीवुड के सबसे कामयाब गीतकारों में एक हैं. पिता की विरासत को न सिर्फ़ संभाला बल्कि आगे बढ़ाया भी. हिन्दी फिल्मों में रहने के बावजूद उनकी कविताई में भोजपुरी की छाप थीं.

बनारस की जड़ों को काफ़ी दूर तक ले गए अनजान. यही वज़ह रही कि ‘खाई के पान बनारस वाला’ और ‘बिना बदरा के बिजुरिया’  मिजाज के गाने लिख सके. अनजान के खुद के पसंदीदा गानों में ‘मानो तो मैं गंगा हूं न मानो तो बहता पानी’, ‘चल मुसाफ़िर (गंगा की सौगंध)’ ख़ास थे. अनजान की याद में बेटे समीर ने पिता की लिखी कविताओं का संग्रह ‘गंगा ठाठ का बंजारा’ रिलीज़ कराई.

अनजान की कलम से निकले हिट गीत:

आप के हसीन रुख पे / बहारें फिर भी आएंगी
खाई के पान बनारस वाला /
दिल तो दिल है दिल का ऐतबार क्या कीजिए/ मुकद्दर का सिकंदर
रोते हुए आते हैं आते सब / मुकद्दर का सिकंदर
ओ साथी रे/ मुकद्दर का सिकंदर
प्यार जिंदगी है/ मुकद्दर का सिकंदर
लोग कहते हैं मैं शराबी हूं / शराबी
आई एम ए डिस्को डांसर/ डिस्को डांसर