जन्मदिन विशेष : पंकज त्रिपाठी – यात्राएं हमारे भ्रम, हमारे दायरों को तोड़ती हैं और हमें बेहतर इंसान बनने में मदद करती हैं

अभिनेता पंकज त्रिपाठी को स्थानीय लोगों से मिलना और उनसे बातें करना बेहद पसंद है.

मशहूर अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने अपने जीवन के अनुभव और सामाजिक लगाव के संबंध में विचार साझा किए.
मशहूर अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने अपने जीवन के अनुभव और सामाजिक लगाव के संबंध में विचार साझा किए .

मशहूर बाॅलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने अपने जीवन के अनुभव और सामाजिक लगाव के संबंध में विचार साझा किए हैं. पंकज त्रिपाठी ने बताया कि जीवन में सुख पाने के दो अद्भुत तरीक़े हैं. पहला तरीक़ा है यात्राएं करना और दूसरा है किताबें पढ़ना.

आगे कहते हैं कि किताब पढ़ने से हमें सिर्फ़ जानकारी मिलती है, अनुभव नहीं. अनुभव पाने के लिए यात्राएं करनी चाहिए.

पंकज त्रिपाठी के मुताबिक़ यात्रा एक परिप्रेक्ष्य पाने में मदद करती है. इसलिए हम लोगों को घूमना चाहिए. समाज को समझना चाहिए.

आगे बताया कि वो हर बार शहर के बाहर शूटिंग को लेकर हमेशा पूरे उत्साह से तत्पर रहते हैं. वो यह भी स्वीकार करते हैं कि शूटिंग की तारीखों की पुष्टि करने से पहले वह हमेशा शूटिंग के स्थान की पुष्टि करते हैं.

उन्होंने बताया कि वो यात्रा करने से पहले यह देखते हैं जगह कितनी दिलचस्प है. साथ ही यह भी देखते हैं कि जो चीज़ें वो वहां जा कर करना चाहते हैं, वो कर सकते हैं या नहीं. इसके बाद ही निर्णय लेते हैं कि उस जगह जाना है या नहीं.

पंकज त्रिपाठी के मुताबिक़ यात्रा एक परिप्रेक्ष्य पाने में मदद करती है.
पंकज त्रिपाठी के मुताबिक़ यात्रा एक परिप्रेक्ष्य पाने में मदद करती है.

वो अपने यात्राओं के अनुभव को साझा करते हुए करते हैं कि कभी अपने गांव से निकलकर अरुणाचल प्रदेश के किसी गांव में जाओ. प्रकृति की मिठास का अनुभव करो. घर से निकलकर कभी कच्छ के रेतों और सिंधु नदी के रिश्तों का इतिहास पूछिए.

आगे कहते हैं “स्कॉटलैंड के किसी गांव में जाएं, वहां के जीवनशैली और हवाओं की ताजगी को समझें. उसके बाद वापस बेलसंड के खेतों की गीली मिट्टी में नंगे पांव उतरें. जीवन और सोच को बढ़ाने का इससे बेहतर तरीक़ा दूसरा कोई नहीं है.

किताब पढ़ने से हमें सिर्फ़ जानकारी मिलती है, अनुभव नहीं. अनुभव पाने के लिए यात्राएं करनी चाहिए.
किताब पढ़ने से हमें सिर्फ़ जानकारी मिलती है, अनुभव नहीं. अनुभव पाने के लिए यात्राएं करनी चाहिए.

पंकज त्रिपाठी के मुताबिक़ इंसान को हर चीज़ से सवाल पूछना चाहिए. उन्होंने कहा कि कच्छ के लखपत फोर्ट से उसका इतिहास पूछिए, किसी इमारत से उसका रिश्ता पूछिए, बनारस की किसी गली में जाकर कचौड़ी खाइए और शाम को कुछ वक़्त सीतापुर के जंगल में गुज़रिए.

पंकज त्रिपाठी आगे कहते हैं “ लद्दाख़ के वादियों में जाकर हवा की ख़ुशबू लीजिए. विदेश जाइए. जर्मनी जाकर वहां के इमारतों से इतिहास के करवट को समझिए. लोकल ट्रेनों में सफ़र नहीं किए हो, तो तुरंत करिए. बस के छत पर बैठ कर सफ़र करिए.”

उन्होंने बताया कि जीवन के लहरों को गति देना होता है ऐसी यात्राएं करना.

वो आगे कहते हैं कि ‘द नेमसेक’ में एक सुंदर पंक्ति है. एक तकिया और एक कंबल पैक करें. दुनिया को देखें. दुनिया को समझें. यह करने से आपको पछतावा नहीं होगा, बल्कि सुख मिलेगा. मेरा हमेशा से यह विश्वास रहा है कि यात्रा आपको परिप्रेक्ष्य पाने में मदद करती है. यात्राएं हमारे भ्रम, हमारे दायरों को तोड़ती हैं और हमें बेहतर इंसान बनने में मदद करती हैं. मैं ख़ुशनसीब हूं कि यह मेरे काम का हिस्सा है.

पंकज त्रिपाठी ने बताया कि वो नई जगहों पर जाकर हमेशा स्थानीय संस्कृति, स्वाद और भोजन का अनुभव लेने की कोशिश करते हैं. इससे उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिलता है.

अपने गांव से बहुत प्रेम करते हैं पंकज त्रिपाठी.
अपने गांव से बहुत प्रेम करते हैं पंकज त्रिपाठी.

आगे कहते हैं कि आप भी अपने स्वाद के दीवार को तोड़िए. जहां जाएं, वहां के स्थानीय भोजन का मज़ा लें. अलग-अलग स्थानों के व्यंजन अलग-अलग होते हैं. पसंद-नापसंद की दीवार को नाघकर उन व्यंजनों का स्वाद लें.

उन्होंने बताया कि वो अक्सर नए- नए स्थानों पर जाते रहते हैं. नए-नए लोगों के साथ जाते हैं. उन्हें स्थानीय लोगों से बात करना बेहद पसंद है.

पंकज त्रिपाठी के मुताबिक़ जो जिस जगह रह रहा है, वही वहां की कहानी बेहतर तरीके से बता सकता है. वहां के लोगों से बातें करनी चाहिए. वहां की संस्कृति को समझना चाहिए. जीवन का आनंद लेना चाहिए.