डॉक्यूमेंट्रीः ऐतिहासिक लेकिन उपेक्षित लोहारू को फिल्मों के ज़रिए जिलाने की कोशिश

हरियाणा के डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्देशक अपनी डॉक्यूमेट्रीज के जरिए ऐतिहासिक लेकिन उपेक्षित लोहारू पर जागरूकता के लिए बना रहे हैं फिल्में

ऐतिहासिक पर उपेक्षितः लोहारू एयरपोर्ट पर सरदार वल्लभ भाई पटेल
ऐतिहासिक पर उपेक्षितः लोहारू एयरपोर्ट पर सरदार वल्लभ भाई पटेल

एक रियासत जहां वज़ीर खानुम के इश्क़ में डूबे नवाब शमशुद्दीन ने अंग्रेज अधिकारी विलियम फ्रेज़र की हत्या कर दी थी। उसी रियासत के किले में महान शायर मिर्ज़ा ग़ालिब का निकाहनामा पढ़ा गया। इसी किले की हवेली में पहली बार मिर्ज़ा ग़ालिब ने बेगम उमरावज़ान को वादों का मेहर दिया था।

गौरवशाली इतिहास के साथ हरियाणा के भिवानी जिले के एक तहसील लोहारु में लोहारु का किला आज खंडहर भर है।

बेहतर रखरखाव के शर्त पर लोहारु के नवाब अमीनुद्दीन ने 1971 में किले को सरकार के हाथों सौंप दिया था ताकि हवेली का प्रयोग सरकारी कामकाज के लिए हो लेकिन सियासत में उलझी सरकारों को इसे सहेजने का ना तो वक्त मिला ना ही इच्छाशक्ति दिखी.

अपने सौंदर्य पर गुमान करने वाला लोहारु की हवेली और हवेली का शीश महल आज जीर्णशीर्ण अवस्था में उद्धारक का बाट जोह रहा है।

इस गुमनाम किले पर लोहारु के आदित्य ने एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई, जिसे देख लोहारु को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है लेकिन डॉक्यूमेंट्री देखते समय आपको ब्रिटिश, मुगल और राजपुताना वास्तुशैली में निर्मित इस किले को ना सहेज पाने की ग्लानि भी महसूस होगी।

1931 में नवाब अमीनुद्दीन अहमद खान ने लोहारू से दो किलोमीटर दूर फाल्टिया ताल नामक एक छोटे से गाँव में एयरोड्रम(हवाई अड्डा) बनवाया था।

दो इमारतों को भी एयरोड्रम के हिस्से के रूप में बनाया गया था, जिसमें एक हवा की दिशा और वैमानिकी मानचित्रों के लिए था जबकि दूसरी इमारत अपेक्षाकृत बड़ी थी जिसका उपयोग विमान उपकरणों को रखने में किया जाता था।

इस एयरोड्रोम को लोहारू किले से जोड़ने वाली 2 किलोमीटर लंबी सुरंग थी जिसे घुड़सवार भी इस्तेमाल कर सकते थे. राजा-महाराजाओं को विशेष भोज में इसी सुरंग से हवेली लाया जाता था हालांकि इसका निर्माण आपात स्थितियों में हवेली से भागने के उद्देश्य से किया गया था। आज सुरंग दोनों तरफ से अवरुद्ध है और एयरोड्रम के समतल हिस्से में कपास की खेती होती है।

लोहारु हरियाणा-राजस्थान की सीमा पर है और पिलानी, मंडावा जैसे पर्यटन स्थल नजदीक हैं जहां पर्यटकों का जमावड़ा लगता है। लोहारु को इनसे जोड़ने और एयरोड्रम का कायाकल्प करने से क्षेत्र में रोजगार और विकास के अवसर बढ़ेंगे।

लोहारु के ऐतिहासिक महत्व पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म के निर्देशक आदित्य सांगवान बताते हैं, “मैं लोहारु का ही हूँ। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ख्याल आया कि हमें लोहारु के इतिहास को लोगों के बीच लाना चाहिए ताकि आमलोगों के साथ सरकार का भी ध्यान इसके ऐतिहासिक महत्व और पर्यटन की संभावनाओं की ओर दिलाया जा सके।”

सांगवान ने रजत वर्मा, शिशिर वर्मा, अंकित सोनी, पार्थ शर्मा, अमन, मुकुल धामा, रोहित खोखर और मृत्यंजय तिवारी जैसे सहयोगियों के साथ तय किया कि इस विषय पर काम किया जाए।

उन्हें इस डॉक्यूमेंट्री के लिए सराहना भी मिली है. उनकी डॉक्यूमेंट्री लेक सिटी फिल्म फेस्टिवल, isomes न्यूज़24 में बेस्ट डॉक्यूमेंट्री फिल्म अवॉर्ड से पुरस्कृत हो चुकी है. बनजारा टूरिज्म फिल्म फेस्टिवल में सांगवान बेस्ट डायरेक्टर का अवार्ड जीत चुके हैं. वहीं इटली, कनाडा, इराक में इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म की स्क्रीनिंग हुई है। अब तक 19 हजार से अधिक लोग इसे यूट्यूब पर देख चुके हैं।

 

आदित्य सांगवान का ‛the ewer’ नाम से Youtube चैनल है जहां लोहारु के इतिहास से सम्बंधित 12 डॉक्यूमेंट्री फिल्में और शार्ट वीडियो उपलब्ध है। इन शार्ट वीडियो में लोहारु के इतिहास के साथ-साथ भविष्य की संभावनाओं का जिक्र है।
लोहारु के विकास को लेकर आदित्य प्रतिबद्ध हैं, इस बाबत मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात की लेकिन कोई खास परिणाम नहीं निकला।