संजीव कुमार: एक ऐसा कलाकार जिसने अदाकारी में वक़्त खरीदा

भारतीय सिनेमा में संजीव कुमार ने अपने किरदार से अपनी छाप छोड़ दी। वो एक डाइनैमिक और विलक्षण कलाकार थे। हरीभाई जेठालाल जरीवाला से संजीव कुमार का सफर सिर्फ़ नाम का सफर नहीं था ये उनकी मेहनत और किरदार का सफर था जिसे उन्होनें बखूबी निभाया।

यह साल हम लगातार एक से एक दिग्गज कलाकारों को खो रहे हैं। इरफान खान से लेखर सुशांत सिंह राजपूत को हमने खो दिया। हम अब कहीं न कहीं समझ चुके हैं कि किसी कलाकार किस कदर अपनी मेहनत से किसी भी ऊंचाई पर पहुंचता है। ये महनत जहां उसे नाम, पैसा और शोहरत देती है वहीं बहुत कुछ छीन भी लेती है। इसी वक़्त में संजीव कुमार के 81 जन्मदिन पर उन्हें याद करना एक दुखद अनुभव है।

संजीव ने बहुत कम उम्र में ही बूढ़े का रोल करना शुरू कर दिया था। उनसे एक बार पूछा भी गया कि वो ऐसा क्यों करते हैं तो उनहोंने बड़ी तसल्ली से कहा था कि मुझे किसी ने कहा है मेरी उम्र लंबी नहीं है इसलिए मैं अपनी जवानी में ही अपने बुढ़ापे को जी लेना चाहता हूँ। वो इस ऐसे कलाकार थे जिन्होंने अपनी अदाकारी में वक़्त खरीद लिया था।

संजीव ने अपनी छोटी सी ज़िंदगी में ‘ठाकुर’ जैसे किरदार दे गए। जो कभी नहीं मरते और हमेशा गब्बर से यही कहते है कि, ‘ये हाथ मुझे दे दे ठाकुर।’