किशोर कुमार हो गए थे महमूद से इनसिक्योर, घर चलाने के लिए लोकल ट्रेन में बेचते थे टॉफी

महमूद मलाड और विरार के बीच चलने वाली लोकल ट्रेनो में टॉफिया बेचा करते थे।

हिंदी सिनेमा में कुछ चेहरे ऐसे हैं जिन्‍हें कभी भुलाया नहीं जा सकता. महमूद भी उन्‍हीं चेहरों में से एक हैं. जब भी हिंदी फिल्मों में कॉमेडियन की बात होती है तो महमूद का नाम आज भी सबसे पहले ध्यान में आता है.

उन्होंने पांच दशक तक अपने अनोखे अन्दाज़ और हाव-भाव से फिल्म इंडस्ट्री में ‘किंग ऑफ कॉमेडी’ का दर्जा हासिल किया. हिन्दी फिल्मों के बड़े नामों में से एक रहे हैं. महमूद को दुनिया एक मशहूर कॉमेडी अभिनेता, गायक, प्रोड्यूसर और निर्देशक के तौर पर याद करती है.

महमूद एक ऐसे एक्टर थे जिनके डायलॉग पूरे होने के बाद सेट पर जमकर तालियां बजा करती थीं. उस जमाने में महमूद अकेले ऐसे हास्य कलाकार थे, जिनकी तस्वीर फिल्मी पोस्टर में हीरो के साथ रहा करती थी. फिल्म में कितना भी बड़ा कलाकार क्यों न हो, दर्शक सिनेमाघरों में महमूद को देखने जाया करते थे.

अभिनेता बनने के लिए करनी पड़ी थी ड्राइवरी

महमूद का बचपन बेहद संघर्ष भरा रहा. महमूद अली का जन्म 23 सितंबर 1932 को मुंबई शहर में हुआ. उनके पिता का नाम मुमताज अली था, जो बॉम्बे टॉकीज स्टूडियो में काम करते थे. महमूद का बचपन से ही अभिनय की तरफ़ रुझान था. उनके घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. कई तरह के छोटे-मोटे काम कर लेते थे. घर की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए महमूद मलाड और विरार के बीच चलने वाली लोकल ट्रेनो में टॉफिया बेचा करते थे.

इस बीच महमूद ने कार ड्राइव करना सीखा और निर्माता ज्ञान मुखर्जी के यहां बतौर ड्राइवर काम करने लगे. इसी बहाने उन्हें मालिक के साथ हर दिन स्टूडियो जाने का मौका मिल जाया करता था. जहां वह कलाकारों को करीब से देख सकते थे.

महमूद ने गीतकार गोपाल सिंह नेपाली, भरत व्यास, राजा मेंहदी अली खान और निर्माता पी.एल. संतोषी के घर पर भी ड्राइवर का काम किया.

बतौर जूनियर आर्टिस्ट बॉलीवुड में मिला पहला ब्रेक
महमूद के पिता मुमताज़ का हिंदी सिनेमा में काफ़ी जान -पहचान थी. उनके सिफ़ारिश पर 1943 में आई बॉम्बे टॉकीज की फिल्म ‘किस्मत’ में अपनी खुद की किस्मत को आजमाने का मौका मिला. फिल्म में महमूद ने अभिनेता अशोक कुमार के बचपन की भूमिका अदा की थी. इस तरह सिनेमा जगत में महमूद को मिला पहला ब्रेक.

पचास के दशक का क़िस्सा है. फिल्‍म ‘नादान’ की शूटिंग चल रही थी. इस फ़िल्म के निर्देशक हीरा सिंह थे. इस फ़िल्म में मशहूर अभिनेत्री मधुबाला अभिनय कर रही थीं. शूटिंग के समय उनके सामने एक जूनियर कलाकार अपना संवाद दस टेक के बावजूद नहीं बोल पा रहा था. महमूद भी वहीं खड़े होकर देख रहे थे. तभी हीरा सिंह ने यह संवाद महमूद को बोलने के लिए कहा. महमूद ने इसे एक ही टेक में बोल दिया. निर्देशक हीरा सिंह इससे बहुत प्रभावित हुए.

इसके बाद वो जूनियर आर्टिस्‍ट के तौर पर फिल्‍म ‘सी.आई.डी.’, ‘दो बीघा जमीन’, ‘जागृति’, ‘प्यासा’ जैसी फिल्‍मों में काम किया, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ.

महमूद लगातार संघर्ष कर रहे थे. इसी बीच उन्हें 1958 में फिल्म ‘परवरिश’ में काम किया. उन्‍होंने इस फिल्‍म में उन्‍होंने राजकपूर के भाई की भूमिका निभाई थी. इस फिल्‍म ने उन्‍हें काफी सफलता दिलाई और दर्शकों ने उन्‍हें सराहा भी. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देख.

साल 1968 में रिलीज हुई फिल्‍म ‘पड़ोसन’ को दर्शकों ने खासा पसंद किया. फ़िल्म सुपर हिट गई. इस फिल्‍म में उनपर फिल्‍माया गीत ‘एक चतुर नार, बड़ी होशियार’ गाना आज भी फेमस है. इस फिल्‍म से उन्‍होंने दर्शकों से खूब वाहवाही लूटी.

किशोर कुमार ने महमूद को काम देने से किया था इंकार
साठ के दशक तक महमूद अपने अभिनय से लोगों का दिल जीत चुके थे. उनकी भाषा में झलकता हैदराबादी अंदाज दर्शकों को बेहद पसंद आया. उनके बोलने की कला ने करोड़ों लोगों को अपना दीवाना बना लिया.

महमूद ने जिस वक्त फिल्मों को गंभीरता से लेना शुरू किया था, उस समय भारतीय फिल्म जगत में किशोर कुमार की कॉमेडी का जादू छाया हुआ था.

किशोर कुमार से कहा था “जब मैं बड़ा फ़िल्मकार बनूंगा, आपको अपनी फ़िल्म में अभिनय करने का मौक़ा ज़रूर दूंगा.”।

महमूद और किशोर कुमार का एक दिलचस्प क़िस्सा है. बात है साठ के दशक की. महमूद ने अपने कॅरियर के सुनहरे दौर से गुजर रहे थे. महमूद और किशोर कुमार दोनों की पहचान बतौर कॉमेडियन कलाकार के रूप में स्थापित थी. एक बार महमूद ने, किशोर से अपनी किसी फिल्म में भूमिका देने की गुजारिश किया. महमूद की प्रतिभा से पूरी तरह वाकिफ किशोर ने कहा कि वह ऐसे किसी व्यक्ति को मौका कैसे दे सकते हैं, जो भविष्य में उन्हीं के लिए चुनौती बन जाए.

जब महमूद को यह बात पता चली. तब महमूद ने बड़े दिलचस्प जवाब में कहा

“जब मैं बड़ा फ़िल्मकार बनूंगा, आपको अपनी फ़िल्म में अभिनय करने का मौक़ा ज़रूर दूंगा.”

महमूद अपनी बात के पक्के साबित हुए. अपनी होम प्रोडक्शन फ़िल्म ‘पड़ोसन’ में किशोर कुमार को रोल दिया.

अमिताभ बच्चन को दिया था सहारा

फ़िल्म ‘बॉम्बे टू गोवा’ में अमिताभ बच्चन से करवाया था डांस।

बात है सत्तर के दशक की. महमूद अपने फ़िल्मी करियर के बुलंदियों पर थे. सदी के महानायक अमिताभ बच्चन फ़िल्मों में काम पाने के लिए संघर्ष कर रहे थे. तब महमूद ने उन्हें अपने घर में आसरा दिया. महमूद ने 1972 में आई फ़िल्म ‘बॉम्बे टू गोवा’ में अमिताभ बच्चन को बतौर अभिनेता काम भी दिया.

अमिताभ बच्चन और महमूद के बीच एक बड़ा ही रोचक किस्सा है. फिल्म ‘बॉम्बे टू गोवा’ की शूटिंग चल रही थी. इस फ़िल्म का एक गाना था ‘देखा ना हाय रे सोचा ना’. महमूद चाहते थे कि अमिताभ उस गाने पर नाचें. पर अमिताभ ने नाचने से मना कर दिया. कहा कि भाईजान मुझसे डांस नहीं हो पाएगा, मुझे नाचना नहीं आता.

महमूद भी अपनी बात पर अड़े रहे. कहा कि जो चल सकता है वो नाच भी सकता है. अमिताभ के लाख गिड़गिड़ाने के बाद भी महमूद ने उनसे डांस करवाया. ये गाना सुपरहिट हुआ.

महमूद ने अपने पांच दशक के लंबे फ़िल्मी करियर में क़रीब 300 फ़िल्मों में अभिनय किया. उनके सुपरहिट फ़िल्मों में ‘पड़ोसन’, ‘गुमनाम’, ‘पत्थर के सनम’, ‘बॉम्बे टू गोवा’, ‘प्यार किए जा’, ‘भूत बंगला’, ‘सबसे बड़ा रूपैया’, ‘नीला आकाश’, ‘अनोखी अदा’, ‘कुंवारा बाप’ और ‘नील कमल’ शामिल हैं.

उन्हें तीन बार फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार से नवाज़ा गया.

आज यानी 23 जुलाई 2004 को महमूद इस दुनिया को अलविदा कह गए. पुण्यतिथि पर उनको नमन.