आज 15 अगस्त के दिन ही 45 साल पहले रिलीज हुई थी शोले

Sholay 1975 poster

फिल्म शोले जिसे क्रिटिक्स ने एक समय में करी वेस्टर्न कहा था ,लेकिन शोले का हर किरदार बहुत मज़बूत था कोई एक क़िरदार उठा लो सुरमा भोपाली ,बसंती ,जय वीरू जो बाद में ऐड फ़िल्मों में नज़र आये . जावेय अख्तर ने नसरीन मुन्नी कबीर की लिखि किताब सिनेमा के बारे में कहा है की गब्बर का किरदार लिखने में सबसे जादा मज़ा आया बल्कि पूरे करियर में गब्बर जैसा कोई नहीं.

उसकी वजह ये थी की गब्बर खुद अपनी वो वोक्केब्लरी बना रहा था ,एक जीता जागता इंसान बन गया था गब्बर उसकी ज़बान से निकला एक एक शब्द आज भी लोगों को याद है. ‘अरे वो सँभा ,ये रामगढ़ वाले अपनी बेटियो को कौन चक्की का पिसा आटा खिलाते है रे? या फिर देखो छमिया जादा नखरे मत करो हमसे ,नहीं तो ये गोरी चमड़ी ,है न – सारे बदन से खुरच खुरच
कर उतार दूंगा .

एक दूसरे सीन में गब्बर कालिया को कहता है तेरा क्या होगा कालिया

गब्बर फिल्म शोले में आठ या नौ सीन में नज़र आता है, लेकिन उसका डर पूरी तरह फिल्म में छाया रहता हैं, गब्बर कब क्या करेगा कुछ पता नहीं चलता और यही बात दर्शकों को भा जाती है. एक अजीबो गरीब आदमी जो ताने मारता ,वो बड़बोला है और कभी कभी अनजाने में ही कभी कभी गुस्से का कहर बरपा देता है.

गब्बर एक मैला कुचैला जिसकी दाड़ी बढ़ी हुयी डरावना फिल्म शोले का हीरो लगता है,पर्दे पर ना होकर भी वो अपना जादू चलता है . 15 अगस्त 1975 में आई शोले ‘ को हिंदी सिनेमा की कल्ट फिल्म माना जाता है, जिसमें अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, अमजद खान, जया बच्चन, संजीव कुमार और ए.के. हंगल मुख्य किरदारों को देखा गया. इस फ़िल्म का एक एक चेहरा आज भी शोले फिल्म के कद्रदानों को याद है.