चार्ली चैप्लिन : इंसान को हँसाने के लिए मैं कोई तीर नहीं चलाता, मेरे लिए यह बाएँ हाथ का खेल है

1. 16 अप्रैल 1989 में चार्ल्स स्पेन्सर चैपलिन का जन्म लंदन में हुआ। पिता के निधन और उसके बाद आई गरीबी की वजह से वो कभी स्कूल जा कर पढ़ नहीं पाए। उनके दुखों ने उन्हें इतना बड़ा कॉमेडियन बना दिया कि पूरी दुनिया उनकी दीवानी हो गयी और आज भी है। कॉमेडी का नाम उनके नाम के बिना अधूरा है।

2. चार्ली चैपलिन में बचपन में हर वो काम किए जिससे उन्हें दो वक़्त कि रोटी मिल सके। उनकी माँ भी शो किया करती थीं। एक बार स्टेज पर उनकी माँ गाना भूल गयी और लोगों ने उनका खूब मज़ाक बनाया तभी कोने में बैठे चैप्लिन ने अपनी कलाकारी दिखाई और अपनी माँ कि नकल कर ही सबको हंसा दिया। उस दिन चैप्लिन की माँ का वो आख़िरी शो था और चार्ली का पहला।

3. चार्ली ने जब कमाना शुरू किया था और एक दिन घर लौट रहे थे तब उन्हें रास्ते में किसी ने बताया कि उनकी माँ, अन्ना पागल हो गयी हैं। उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गयी। अन्ना ने जिन बुरी परिस्थितियों में चार्ली को अब तक पाला था वो फिर कभी चार्ली कि सफलता देख समझ नहीं पायी। और सालों तक पगलखाने में रही।

4.चार्ली जब सफल हो गए और लंदन लौटे तो उनके नाम से 73 हज़ार चिट्ठियाँ आई हुई थी। आज हमारे पास सोशल मीडिया के दौर में यह सब आसान हो गया लेकिन आज भी इतनी चिट्ठियाँ बहुत बड़ी बात है। चार्ली ने 6 लोगों को नियुक्त किया था इन चिट्ठियों के जवाब के लिया। धीरे-धीरे वो इतने सफल और लोकप्रिए हो गए कि अगर कोई चिट्ठी में चार्ली कि ऐसी वैसी आकृति भी बना देता तो भी वो चार्ली के पते पर पहुँच जाती थी।

5.चार्ली की सफलता के बाद मार्केट मे नकली चार्ली भी आने लगे जो चार्ली की नकल किया करते थे। बाद में यह जब ज़्यादा बढ़ गया तो चार्ली ने केस कर दिया। इस मुकदमे का फैसला चार्ली के हित में हुआ। वो केस तो जीत गए लेकिन अब लोगों ने दूसरी जगहों पर जा कर उनकी नकल करनी शुरू की जिन्हें पकड़ना फिर मुश्किल हो गया। हैरोल्ड लॉएस जैसे अभिनेता ने यह कुबूल भी किया है कि करीब 100 फिल्मों में उनहोंने चार्ली की नकल की है।

7. 1942 में जब श्रेष्ठ फिल्म के बारे में जनमत लिया गया तब चैप्लिन के द्वारा 1925 में बनाई गयी फिल्म ‘द गोल्ड रश’ को उत्तम फिल्म माना गया। उनकी पहली फिल्म ‘मेकिंग ए लिविंग’ जिसे की-स्टोन ने बनाया था। यह फिल्म चल नहीं पायी थी।

8.चार्ली चैप्लिन ने चार शादियाँ की थी। उनकी तीनों पत्नियाँ के जाने के बाद उन्हें समझने और प्रेम करने वाली ऊना से उन्हें बहुत प्रेम था। उन्होंने ऊना से कहा भी था कि मेरे जीवन की बाकी स्त्रियाँ मेरी प्रेमिका और पत्नी कहलाएंगी लेकिन तुम मेरी विधवा कहलाओगी। और चैप्लिन अंत तक ऊना के साथ रहे।

9.चार्ली हमेशा कहते थे कि ”इंसान को हँसाने के लिए मैं कोई तीर नहीं चलाता, मेरे लिए यह बाएँ हाथ का खेल है।” चैप्लिन कि प्रसिद्ध फिल्मों में से एक ‘द सर्कस’ भी रही जिसे देख राज कपूर ने ‘मेरा नाम जोकर’ (1970) बनाई थी। ‘द सर्कस’ बनने के बाद चार्ली चैप्लिन की माँ की मृत्यु हो गयी थी। यह सीन राज कपूर ने अपनी फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ का हिस्सा बना लिया। भारत का चार्ली चैप्लिन राज कपूर को ही कहा जाता है।

10. 2 मार्च 1978 को चार्ली चैप्लिन कि मृत्यु हो गयी। चैप्लिन का मृत शरीर को कब्र से चुरा लिया गया था जो फिर 17 मार्च को मिला।