मैं भी बन सकता था मैथिली सिनेमा का ‛सत्यजीत रायः सी. परमानन्द

सी. परमानन्द ने मैथिली भाषा में निर्मित पहली फिल्म ‛ममता गाबय गीत’ का निर्देशन किया था।

भास्कर झा के साथ परमानंद चौधरी
परमानंद चौधरी मैथिली की पहली फिल्म ममता गाबय गीत के निर्देशक थे

दरभंगा जिला के हायाघाट प्रखंड (वर्तमान में हनुमान नगर प्रखंड) के मोरो बिसनपुर निवासी सी. परमानन्द का नाम मैथिली फिल्म इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा। लेकिन विडम्बना है कि ऐसे महान मैथिल पुत्र जिन्होंने मैथिली की पहली फिल्म ‛ममता गाबय गीत’ का निर्देशन किया, आज अंधेरे में खो गए हैं।

जीते-जी किसी ने उनकी सुधि तो नहीं ही ली, 2014 में उनके निधन के बाद भी उनका नाम मैथिली और मिथिला के नाम पर राजनीति चमकाने वालों ने नहीं लिया। सम्मान की बात की जाए तो मौखिक सम्मान के अतिरिक्त उन्हें कुछ नहीं मिला। मैथिली फिल्मों पर कई लेख लिख चुके और शोध करने वाले भास्कर झा के इस बाबत पूछने पर सी. परमानन्द ने बताया था, ‛दिल को तसल्ली देने के लिए गालिब यह ख्याल अच्छा है।’

भास्कर झा से अपनी बातचीत में परमानंद ने तत्कालीन बम्बई में अपने दौर को याद किया था. उन्होंने बताया था, “1955 में मैं मुंबई गया था, 1955-56 तक संघर्ष किया। 1957 में पहली बार काम मिला। तकरीबन 18 फिल्मों में सहायक निर्देशक की भूमिका निभाई, जिसमें ‛साक्षी गोपाल’, ‛घर संसार’, ‘घर की लाज’, ‛गूंज उठी शहनाई’, ‛अप्सरा’, ‛घर घर दीप जले’ आदि फिल्में प्रमुख थी।

सी. परमानंद को पहली बार ‘साक्षी गोपाल’ में काम मिला था। फिल्म ‛मां-बाप’ में उन्होंने बतौर सहायक संवाद लेखक काम किया था।

फिल्म निर्माण में अन्य कार्यों और निर्देशन के साथ ही परमानन्द चौधरी ने अभिनय में भी हाथ आजमाया था। भारत भूषण, निरूपा राय, अनीता गुहा अभिनीत फिल्म ‘कवि कालीदास’ और चर्चित फिल्म ‘तीसरी कसम” में इन्होंने छोटा-सा लेकिन बढ़िया अभिनय किया।

राजकपूर के साथ फ़िल्म ‛तीसरी कसम’ में चाय के दुकान पर मैथिली संवाद बोलकर इन्होंने इतिहास बनाया था।

परमानन्द जी इस वाकये को याद करते हुए बताया था, “सीन में मेरे संग मेरा लंगोटिया दोस्त रामाश्रय चौधरी थे. जो मेरे ग्रामीण भी हैं। सबसे पहले रामाश्रय चौधरी ने ही मुझे फिल्मी दुनिया में जाने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया। रोजाना बगीचा में मुझे फिल्म और अभिनेता के बारे में सूचना देते रहते थे! उनकी शादी शुभंकरपुर, दरभंगा में हुई थी। मैं उनसे काफी प्रभावित था और इसी वजह से 1955 में मुम्बई चला गया। मुम्बई में करीब 6 माह तक संघर्ष करना पड़ा उसके बाद तो बहुत काम मिला।”

पर परमानंद चौधरी को मुंबई छोड़नी पड़ी। सी. परमानन्द ने अपने साक्षात्कार में कहा है, “मैं बम्बई में स्थापित था, उस समय सत्यजीत राय का नाम खूब चलता था। वह बंगाली सिनेमा में बहुत लोकप्रिय थे। मेरे मन में भी हुआ कि मैथिली सिनेमा के लिए कुछ किया जाए।”

परमानंद चौधरी ने मैथिली प्रेम के कारण 1970-71 में मुंबई छोड़ दिया। लेकिन ‛मैथिली फिल्म का सत्यजीत राय’ बनने का सपना चूर-चूर हो गया। उन्होंने भास्कर झा को बताया था, “मैं कुर्बान हो गया। कुर्बान हुआ नहीं। कुर्बान करा दिया गया। तत्कालीन आपसी राजनीति का शिकार बन गया…बलि का बकरा।”

परमानंद चौधरी ने कहा था, “इस फिल्म के दौरान जो व्यक्ति मुझसे जुड़े, उनका भाग्योदय हो गया और मेरा भाग्यास्त! कमल नाथ सिंह ठाकुर ने इसी फ़िल्म में काम किया था। हम सब अंधेरे में खो गए कोई खोजने वाला नहीं।”

इस साक्षात्कार में परमानंद चौधरी का गुस्सा पूरे मैथिल समुदाय पर भी फूटा था. उन्होंने क्रोध से कहा था, “अगर मैथिल सबको लोटा भरकर पानी दे दीजिए तो खूब पियेंगे लेकिन कुआं खोदने के नाम पर सभी गायब हो जाते हैं। कर्मयोगी नहीं, मैथिल सुविधाभोगी होते हैं। अगर आप कुआं खोद दीजिये तो पानी पीने के लिए सभी दौड़ते हुए आ जाएंगे। आपकी खूब बड़ाई करेंगे लेकिन जैसे ही प्यास बुझ जाएगा, उसी समय से वह मतलब खत्म कर लेंगे। अपने यहां ऐसी ही स्थिति है।”

आज स्थिति यह है कि मिथिला और मैथिली की विरासत के नाम पर लहालोट होने वाले और राजनीति की दुकान चमकाने वाले लोगों को परमानंद चौधरी के नाम भी याद नहीं। ममता गाबय गीत तो छोड़ दीजिए, आज के मैथिली सिनेमा को लोग देखने थियेटर नहीं जाते.

‛ममता गाबय गीत’ के प्रिंट की उपलब्धता के बारे में पूछने पर उन्होंने भास्कर झा को बताया था कि ‛हो सकता है कि फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर भगत परिवार (गंगा भगत-दरभंगा टावर चौक) के पास हो।’

“ममता गाबय गीत” के अभिनेता त्रिदीप कुमार के बारे में परमानन्द ने बताया था कि फिल्म में अभिनय करने से पहले उन्होंने ‛छोटी बहन’ समेत कुछ हिन्दी फिल्मों में सहायक निर्देशक की भूमिका निभाई था। उनका वास्तविक नाम भवनाथ झा था। परमानन्द चौधरी और त्रिदीप कुमार सांता क्रूज, मुम्बई में पास ही रहते थे।

(नवंबर 2012 में सी० परमानन्द से भास्कर झा की गई बातचीत पर आधारित)

नोटः सी. परमानन्द ने मैथिली भाषा में निर्मित पहली फिल्म ‛ममता गाबय गीत’ का निर्देशन किया था। 19 दिसम्बर, 2014 में परमानन्द का निधन हो गया।