जावेद अख़्तर ने हया सोफ़िया को म्यूजियम से मस्जिद में बदलने का किया विरोध

हया सोफिया (Hagia Sophia) को लेकर तुर्की के राष्ट्रपति रजब एर्दोगान साल 2018 से ही बयानबाजी करते रहे हैं। आख़िरकार 10 जुलाई को उन्होंने आधिकारिक तौर पर इसे अमलीजामा पहना दिया।

javed akhtar on hagia sophia turkey
हया सोफिया (hagia sophia) तुर्की स्थित एक इमारत है जो रोमन साम्राज्य में बनवाया गया चर्च थी। बाद में ओटोमन साम्राज्य में उसे मस्जिद बना दिया गया।

गीतकार और पटकथा लेखक जावदे अख़्तर ने तुर्की की मशहूर संग्रहालय (Museum) हया सोफिया (Hagia Sophia) को संग्रहालय से मस्जिद बनाने का विरोध किया है। जावेद अख़्तर ने ट्वीट किया है, “तुर्की राष्ट्रीय सौहार्द्र और सहअस्तित्व के प्रतीक हया सोफिया को संग्रहालय से मस्जिद में बदलने से पहले तुर्की की सरकार को तुर्की को धर्मनिरपेक्षता, उदारता और सौम्यता की राह पर ले जाने वाले महान सुधारक कमाल अता तुर्क की सभी प्रतिमाएँ गिरा देनी चाहिए।”

जावेद अख़्तर के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत के सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कण्डेय काटजू ने हया सोफिया को संग्रहालय से मस्जिद में बदलने के फैसले को तुर्की के राष्ट्रपति रजब एर्दोगान की भटकाने वाली नीति बताया है। काटजू ने ट्वीट किया है, “हया सोफिया को मस्जिद बनाने का फ़ैसला रजब एर्दोगान की विचलन रणनीति का हिस्सा है क्योंकि तुर्की में उनकी लोकप्रियता तुर्की अर्थव्यवस्था की तरह ही गिरती जा रही है। मस्जिद में बदलने का फैसला एक शगूफा है, जैसे अयोध्या का राम मंदिर। दोनों में से कोई भी बेरोजगारी, कुपोषण, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी इत्यादि को दूर करने में मददगार नहीं होंगे।”

हया सोफिया (Hagia sophia) का इतिहास

Hagia Sophia photo by By Arild Vågen
रोमन राजा जस्टिनियन ने एक भव्य चर्च बनवाया जो पाँच साल बाद 537 ईसवी में बनकर तैयार हुआ। (Photo Credit- Arild Vagen)
हया सोफिया (hagia sophia) तुर्की स्थित एक इमारत है जो रोमन साम्राज्य में बनवाया गया चर्च थी। रोमन राजा कांस्टैटिनो ने हया सोफिया की मौजूदा जगह पर एक चर्च बनवाया जिसका लोकार्पण 15 फरवरी 360 ईसवी में हुआ। रोम के बादशाह जस्टिनियन ने 23 फ़रवरी 532 ईसवी को उसी जगह पर एक पहले से बुलंद चर्च बनाने का आदेश दिया। यह नया चर्च 27 दिसंबर 537 ईसवी को जनता के लिए खोला गया। इसका नया हया सोफिया रखा गया।

1453 ईसवी में तुर्की में जब उस्मान का शासन शुरू हुआ तो इस चर्च को मस्जिद में बदल दिया गया। उस्मान ने ही तुर्की के अब तक के सबसे बड़े साम्राज्य ‘ओटोमन साम्राज्य’की नींव रखी थी।

1935 ईसवी में जब तुर्की बादशाहत से लोकतांत्रिक देश बना तो इस क्रांति के नायक कमाल अता तुर्क ने इस इमारत को संग्रहालय में तब्दील करने का फैसला किया। शुक्रवार (10 जुलाई) को तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान ने इसे दोबारा मस्जिद में बदलने का आदेश पर दस्तख़त किये। इस फैसले को तुर्की के राष्ट्रपति के प्रोपगैंडा का हिस्सा माना जा रहा है क्योंकि वो साल 2018 से ही हया सोफिया को दोबारा मस्जिद में बदलने का मुद्दा उठाते रहे हैं।