ओटीटी पर रिलीज हो रही है मैथिली फिल्म ‛ललका पाग’

ललका पाग पहली मैथिली फिल्म है जो पहले पीवीआर में रिलीज हुई और अब इसे ओटीटी पर रिलीज किया जा रहा है

तीरु की भूमिका में अभिनेत्री श्वेता वर्मा
तीरु की भूमिका में अभिनेत्री श्वेता वर्मा

ऐसा लगता है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों के लिए भी वरदान साबित होने वाला है. मैथिली जैसी भाषा की फिल्मों को सिनेमाघर नहीं मिलते थे और इससे उन्हें दर्शक वर्ग तैयार करने में मुश्किल साबित होती थी. पर अब परिदृश्य बदल रहा है.

इसी क्रम में 18 अगस्त को मैथिली फिल्म ललका पाग ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो रही हैय

मैथिली भाषा की फिल्म ललका पाग मिथिला की स्त्रियों के त्याग, संस्कार और बलिदान पर आधारित है. वैसे, यह फिल्म पहले पीवीआर में प्रदर्शित हो चुकी है और पीवीआर में रिलीज होने वाली मैथिली की यह पहली फिल्म है।

हाल में निर्माता और निर्देशक ने ‛ललका पाग’ को ओटीटी पर रिलीज करने का फैसला किया है ताकि ज्यादा से ज्यादा मैथिली भाषी दर्शक इसे देख सकें।

रत्नेश शाह द्वारा निर्मित ‛ललका पाग’ नारी जीवन में होने वाले दमनात्मक घटनाओं से मन को झकझोर देने वाली फिल्म है। फिल्म की मुख्य भूमिका में नायक रोशन राज, मुख्य नायिका श्वेता वर्मा, सह-नायिका निर्मला एन गौतम, चरित्र भूमिका में प्रेमलता मिश्र प्रेम, उमाकांत, रामसेवक ठाकुर और कुन्दन हैं।

ललका पाग के संगीत-निर्देशक सीताराम सिंह हैं जबकि डायलॉग कुणाल ने लिखे हैं।

हृदयनारायण झा और कुणाल के लिखे गीतों को उदित नारायण झा, नंदिता चक्रवर्ती, पापिया गांगुली, अमृता दीक्षित ने स्वरबद्ध किया है। देश-विदेश में रहने वाले मैथिलीभाषियों के बीच इस फिल्म के गाने पहले ही हिट हो चुके हैं। इसे यूट्यूब पर सुना जा सकता है।

सेक्रेड फिग एन्टरटेनमेंट द्वारा प्रस्तुत मैथिली कहानी के शिखर पुरुष डॉ. राजकमल चौधरी की चर्चित कहानी ‛ललका पाग’ पर आधारित इस फिल्म के निर्देशक प्रशांत नागेंद्र हैं।

फिल्म की शूटिंग मिथिलांचल में हुई है। ‛ललका पाग’ बेमेल विवाह पर बनी एक फिल्म है जिसमें एमबीबीएस के छात्र राधाकांत की शादी उसके इच्छा के विपरीत तीरु से कर दी जाती है। कॉलेज में राधाकांत की गर्लफ्रैंड कामाख्या होती है।

तीरु परंपरागत चुलबुली मैथिल लड़की होती है, जो शादी के से पहले गांव में चुहलबाजी, हंसते-खेलने वाली लड़की थी।  शादी के बाद ससुराल को ससुराल नहीं समझ पाती है। वह पोखर में नहाती है, मिथिला की परंपरागत व्यवस्था के कारण ससुराल के लोग उसके बारे कई तरह की बातें करने लगते हैं, यही कारण था कि पति उसे छोड़ देता है।

राधाकांत की दूसरी शादी तय होती है, वह शादी के लिए जा रहा होता है तब रास्ते में तीरु मिलती है. वह कहती, ‛अहां आइ बड़ सुंदर लागि रहल छी, मन होइत अछि जे हम अहां स एक बेर फेर बियाह करितहुं..।’ (आप आज बहुत सुंदर लग रहे हैं, मन कर रहा है मैं एक बार फिर आपसे ब्याह करती)

राधाकांत झल्लाकर कहता है कि ‛एखन मजाक क बेर नै छै, पण्डित बजाय रहल अछि’ और वह घर से निकलने लगता है दरबाजे पर पहुंचने पर तीरु फिर पूछती है कि ‛अहां क माथा पर पाग कतो अछि’ और वह उसे ‛ललका पाग’ देते हुए कहती है, ‛इ तअ वैह पाग अछि जेकरा पहिर क आहां हमरा ओहिठाम आयल रहलहुँ. तखने सं हम एकर पूजा करैत छी.. इसे सुनकर राधाकांत… क्या रियेक्ट करता है और आगे क्या होता है इसको देखने के लिए आपको 18 अगस्त सुबह 8 बजे के बाद इस लिंक ललका पाग पर क्लिक करना होगा।

फिल्म के सब्सक्रिप्शन के लिए 1 डॉलर/24 घण्टे निर्धारित हैं।

ललका पाग 1 घण्टा 35 मिनट की बेहतरीन फीचर फिल्म है। फिल्म में मिथिला की सामाजिक व्यवस्था और परंपरा को बखूबी दिखाया गया है। अन्य मैथिली फिल्मों के विपरीत यह कसी हुई फिल्म है। ‛ललका पाग को देखकर आपको अपने गाम, दलान, पोखर की याद जरूर आएगी।