महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने केंद्र को लिखा चिट्ठी, कहा- फ़िल्म `मुहम्मद : द मैसेंजर ऑफ गॉड’ पर प्रतिबंध लगाएं

निर्देशक माजिद मजीदी द्वारा निर्देशित विवादित फ़िल्म मुहम्मद द मेसेंजर ऑफ गॉड पर गृहमंत्री अनिल देशमुख ने पाबंदी लगाने की मांग की है.

21 जुलाई को फ़िल्म `मुहम्मद द मैसेंजर ऑफ़ गॉड ‘ रिलीज़ होने वाली थी. रिलीज़ होने से पहले ही इस फ़िल्म को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री को चिट्ठी लिखी है. इसमें बताया गया है कि उनके पास फिल्‍म के खिलाफ रजा अकैडमी की तरफ से शिकायत आई है. और कहा कि रजा अकैडमी ने फिल्‍म को प्रतिबंधित करने की मांग की है.
क्या है पूरा मामला?

`मुहम्मद द मैसेंजर ऑफ़ गॉड’ एक ईरानी फ़िल्म है. डॉन सिनेमा इसे हिंदी में डब करके 21 जुलाई को ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज़ करने वाली थी.

यह फिल्‍म छठी शताब्दी पर आधरित है. इसकी कहानी पैगंबर मुहम्मद के बचपन के इर्द-गिर्द की है. कहा जा रहा है कि ईरानी सिनेमा की यह अब तक की सबसे बड़े बजट की प्रॉडक्‍शन वाली फिल्‍म है.फिल्‍म को डायरेक्‍ट माजिद मजीदी ने किया है, जिन्‍होंने इससे पहले ईशान खट्टर के साथ ‘बियॉन्‍ड द क्‍लाउड्स’ बनाई थी.

जिस दिन से फ़िल्म रिलीज़ होने का समाचार आया है तब ही से रज़ा अकेडमी ने इसका विरोध शुरू कर दिया है. साथ ही फ़िल्म को बैन करने की मांग करते हुए महाराष्ट्र सरकार को चिट्ठी लिखकर शिकायत दर्ज कराई है. कहा कि तुरंत इस फ़िल्म के ख़िलाफ़ एक्शन लिया जाए और डॉन सिनेमा पर पाबंदी लगाई जाए.

शिकायतकर्ता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह फिल्‍म धार्मिक भावनाओं को आहत करेगी और इससे सामाजिक विद्वेष फैल सकता है.

शिकायतकर्ता की तरफ से यह भी कहा गया है कि इस फिल्‍म की वजह से कानून व्यवस्था खराब हो सकती है. ऐसे में उन डिजिटल प्‍लैटफॉर्म्‍स को सस्‍पेंड करने के लिए कहा गया है जिन पर यह फिल्‍म 21 जुलाई को रिलीज होनी है. इसके साथ ही अपील की गई है कि यूट्यूब, फेसबुक जैसे सभी प्‍लैटफॉर्म्‍स को इसे लेकर निर्देश जारी किए जाएं.

रजा अकेडमी के कुछ लोग डॉन सिनेमा के मालिक महमूद अली को भी ज्ञापन दे गए हैं. ज्ञापन में फ़िल्म पर रोक लगाने को कहा है. जबकि महमूद अली ने उनसे कहा कि  फ़िल्म का कॉपीराइट हमारे पास है, लेकिन फिर भी कई सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर ये फ़िल्म दिखाई जा रही है,.पहले आप उन सब को रोकिए, फिर मैं भी रिलीज़ नहीं करूंगा.
इस तरह हो रहे विरोध के बारे में पूछने पर महमूद अली ने बताया कि कमिश्नर ने उनको अपने कार्यालय बुलाया है, वहीं से वो माननीय गृहमंत्री जी से मिलने का समय मांगेंगे.

उन्होंने कहा कि मेरी समझ में ये नहीं आ रहा कि जब इस सब्जेक्ट पर इससे पहले भी कई फिल्में बन चुकी है और पूरे विश्व में देखी और सराही गई हैं फिर मेरी फिल्म पर इतनी हाय तौबा क्यों! जबकि मैंने अकेडमी वालों से ये भी कहा था आप लोग एक बार फ़िल्म देख लें उसके बाद यदि कोई आपत्ति होती है तो मैं फ़िल्म नहीं रिलीज़ करूंगा.
आगे महमूद अली ने कहा कि हम एक लोकतांत्रिक देश के निवासी हैं और देश के कानून पर पूरा भरोसा है. वह हमारे साथ अन्याय नहीं करेगा.

इस्लाम की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है : रजा अकादमी

रज़ा अकादमी भारतीय सूफ़ी मुसलमानों का एक संगठन है ,जो प्रकाशनों और अनुसंधानों के माध्यम से इस्लामी मान्यताओं को बढ़ावा देता है. संगठन अहमद रज़ा खान बरेलवी के विचार-स्कूल से संबंधित सुन्नी साहित्य प्रकाशित करता रहता है. यह संगठन मुंबई में स्थित है. मोहम्मद सईद नूरी इसके संस्थापक सचिव हैं.

पहले से यह संगठन इस्लाम के लिए आवाज़ उठाता आया है. इससे पहले इस संगठन ने 2012 के असम दंगों और म्यांमार में हुए मुसलमानों पर अत्याचार के ख़िलाफ़ विरोध किया था. इसके अलावा 2015 में संगीतकार ए.आर रहमान के ख़िलाफ़ फ़तवा निकला था.