ओटीटी पर अच्छी कीमत नहीं मिलने से मराठी फिल्मों को दर्शकों का इंतजार

हिंदी और दक्षिण भारतीय भाषा की कई फिल्मों से जुड़े प्रोडक्शन-हॉउस ओटीटी पर अपनी फिल्म प्रदर्शित करने के लिए खासा निवेश कर रहे हैं. लेकिन, मराठी सिनेमा में ऐसा माहौल नहीं बन पाया है.

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नासिक में हो रही एक मराठी फ़िल्म की शूटिंग का मुहूर्त की तस्वीर (photo credit- Shirish Khare)

बीते मार्च से कोरोना के कारण सभी सिनेमा-घर बंद हैं. इस कारण पिछले साढ़े तीन महीने से तमाम भाषाओं में बनने वाली फिल्मों के दर्शक बड़े पर्दे पर अपनी मनपसंद फिल्में देखने से वंचित हैं. इससे पूरा सिनेमा उद्योग भारी नुकसान के दौर से गुजर रहा है. सिनेमा-घर कब खुलेंगे तो यह बता पाना फिलहाल मुश्किल है. लिहाजा, इन दिनों हिंदी सहित दक्षिण भारतीय भाषा की कई फिल्में एक के बाद एक ओटीटी (ओवर द टॉप) प्लेटफॉर्मों पर प्रदर्शित हो रही हैं.

दूसरी तरफ, इस मामले में मराठी फिल्मों का बाजार ठंडा बना हुआ है. वजह, ओटीटी पर मराठी फिल्मों को अच्छी कीमत नहीं मिल पा रही है. इसी का नतीजा है कि मराठी की कई फिल्मों को दर्शकों का इंतजार है.

इस बारे में मराठी फिल्मों से जुड़े वितरक बताते हैं कि फिलहाल मराठी में 30 से 35 फिल्में तैयार हैं. बीते दिनों इनमें से कुछ फिल्मों को ओटीटी पर प्रदर्शित करने के प्रयास किए गए. पर, ओटीटी पर मराठी फिल्मों को अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिल पा रही है. मराठी फिल्मों को ओटीटी पर अपेक्षित कीमत न मिलने के पीछे यह एक मुख्य कारण है. इस हालत में कुछ निर्माताओं का तो यहां तक कहना है कि ओटीटी जैसे प्लेटफॉर्म पर मराठी फिल्मों के प्रदर्शन की संभावनाएं फिलहाल लगभग न के बराबर हैं.

मराठी फ़िल्मों को अच्छी कीमत क्यों नहीं?

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नासिक में हो रही मराठी फ़िल्म की शूटिंग। (Photo Credit- Shirish Khare)
फिल्म वितरक बताते हैं कि हिंदी और दक्षिण भारतीय भाषा की कई फिल्मों से जुड़े प्रोडक्शन-हॉउस ओटीटी पर अपनी फिल्म प्रदर्शित करने के लिए खासा निवेश कर रहे हैं. लेकिन, मराठी सिनेमा में ऐसा माहौल नहीं बन पाया है.

वहीं, प्रसिद्ध वितरक समीर दीक्षित बताते हैं कि ओटीटी पर हिंदी और दक्षिण भारतीय फिल्मों को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है. इससे इन भाषाओं के दर्शक बड़ी संख्या में ओटीटी पर सब्सक्राइब कर रहे हैं. पर, ओटीटी पर मराठी फिल्मों के दर्शकों की संख्या काफी कम है.

इस बारे में कुछ निर्माताओं का मत है कि ओटीटी पर मराठी भाषा के दर्शकों की पहुंच कम है. जाहिर है कि इससे इस नए प्लेटफॉर्म पर मराठी फिल्मों की हाजिरी भी गिनी-चुनी रहेगी. यह भी एक वजह है कि यहां मराठी फिल्मों को ऊंचा भाव नहीं मिल पा रहा है.

अब सिनेमा-घर खुलने की प्रतीक्षा

हालांकि, कुछ मराठी की अप्रदर्शित फिल्मों को ओटीटी पर दिखाने के प्रयास किए गए थे. उम्मीद की जा रही थी कि जिन मराठी फिल्मों के निर्माताओं का पैसा प्रोजेक्ट में फंस गया है उन्हें ओटीटी पर अपनी फिल्मों के प्रदर्शन से अच्छी आमदनी होगी. लेकिन, फिलहाल यह उम्मीद टूटती दिख रही है. ओटीटी पर मराठी फिल्मों की बहुत अधिक मांग नहीं समझी जा रही है. लिहाजा, मराठी सिनेमा से जुड़े कारोबारी, कलाकार और दर्शक सिनेमा-घर खुलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

प्रसिद्ध निर्माता आकाश पेंढारकर का मानना है कि इस समय ‘माझे दे धक्का’, ‘अनन्या’, और ‘जागो मोहन प्यारे’ जैसे बड़े बजट की आठ फिल्में बनकर तैयार हैं.

पेंढारकर कहते हैं कि ये फिल्में थियेटर में ही प्रदर्शित की जाएंगी. ओटीटी पर तो इन फिल्मों को खास पैसा नहीं मिलेगा. उनकी फिल्म अनन्या के लिए ओटीटी ऑफर था. पर, उनकी राय में उसे वह कीमत नहीं मिल रही थी, जिसकी वह हकदार है. जबकि, एक निर्माता निवेश की ही रकम से ज्यादा चाहता है.

वेब-सीरीज की तरफ नजरें

हालांकि, एक बात यह कही जा रही है कि मराठी फिल्मों को वेव-सीरीज में रूपांतरित किया जाना चाहिए. कारण, फिल्म की अपेक्षा वेब-सीरीज का बजट अधिक सुविधाजनक बताया जा रहा है. इसलिए, मांग यह रखी जा रही है कि एक फिल्म को पांच से छह एपिसोड में लाया जाए. लेकिन, प्रोडक्शन से जुड़े जानकार कहते हैं कि कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जिन्हें वेब-सीरीज में नहीं बदला जा सकता है.

वहीं, मराठी के कुछ निर्माता इस कारण भी असहज हैं कि ओटीटी पर फिल्म प्रदर्शित करने के लिए एक से तीन वर्ष का अनुबंध किया जा रहा है. अनुबंध के तहत प्रति मिनट 2 से 3 रुपए कीमत रखना उनके मुताबिक घाटे का सौदा है. कुछ निर्माताओं को यह डर भी है कि उनकी फिल्में स्टॉक के रूप में रख ली जाएंगी.