शहाबुद्दीन मोहम्मद गोरी की सेना को धूल चटाने वाली रानी नायिका देवी पर बनी फिल्म का टीजर रिलीज

पढ़िए गुजरात के चालुक्य वंश की रानी नायिका देवी की कहानी जिसपर आने वाली फिल्म का टीजर रिलीज हुआ है।

nayika devi the warrior queen poster
नायिका देवी गुजरात के चालुक्य वंश की रानी थीं जिनके ऊपर नितिन जी ने फिल्म बनायी है।

एक गुजराती फिल्म “नायिका देवी : द वरियर क्वीन ” का टीज़र देखा। इसको देखने के पश्चात पता चलता है कि हम अपने गौरवशाली इतिहास से कितने अपरिचित हैं। इस फिल्म के प्रोड्यूसर उमेश शर्मा हैं, तथा इसको डायरेक्ट किया है नितिन जी ने। इन्होंने इससे पूर्व एक मराठी और एक तेलुगु फिल्म का डायरेक्शन भी किया है।

नायिका देवी की मुख्य भूमिका में खुशी शाह हैं जिन्होंने रानी नायिका देवी की भूमिका निभाई है। फिल्म में राहुल देव जैसे दिग्गज अभिनेता भी हैं जो सम्भवतः गोरी की भूमिका में होंगे, इसके साथ ही मनोज जोशी, वृंदा रावल , जयेश मोरे, चेतन दहिया, ममता सोनी चिराग अन्य साथी कलाकार भी प्रमुख किरदार में नजर आएंगे। आइए नायिका देवी के जीवन चरित पर एक दृष्टि डालते हैं। प्रमुख जैन “आचार्य मेरुतुंग” ने अपनी पुस्तक ‘प्रबंध चिंतामणि’ रानी नायिका देवी के द्वारा मोहम्मद गोरी के मानमर्दन की कथा का वर्णन किया है।

सौराष्ट्र और कच्छ के क्षेत्र पर सोलंकी राजवंश का शासन था। सोलंकी राजवंश की स्थापना महाराज मूलराज ने 961 ईस्वी में की थी। इनके ही राजवंश में आगे चलकर कई पीढ़ियों के बाद 12वीं शताब्दी में अजयपाल नामक राजा हुए। इन्हीं राजा अजयपाल का विवाह गोवा के कदम वंशीय महामंडलेश्वर शिवचित्त परमर्दिन की सुपुत्री नायिका देवी के साथ हुआ। अजयपाल की असामयिक मृत्यु हो जाने के कारण उनके पुत्र मूलराज द्वितीय का राज्याभिषेक किया गया जिसके बाद नायिका देवी राजमाता बनीं और राज्य की देखभाल की बागडोर अपने हाथों में ले लिया।

वहीं दिवंगत राजा अजयपाल के चाचा भीमदेव द्वितीय सेना के मुख्य प्रधान के रूप में राज्य की रक्षा की जिम्मेदारी उठा ली। एक अनुभवहीन बालक के हाथों में सत्ता आने की खबर से कुछ आतताइयों को अतीव हर्ष का अनुभव हुआ, उन्हें लगा की एक परिपक्व नेतृत्व के अभाव वाले राज्य पर कब्जा करना अति सरल होगा। उसी समय भारत में मोहम्मद गोरी अपने पाँव जमा रहा था। उसकी नजर नायिका देवी के राज्य पर गयी।

शहाबुद्दीन मुहम्मद गोरी सन् 1162 में एक छोटे प्रदेश गौर में पैदा हुआ था। मोहम्मद गोरी ने 1175 ईस्वी में मुल्तान पर आक्रमण किया था। मुल्तान करमठीया वंश शीघ्र ही पराजित हो गया। मुल्तान विजय के एक साल बाद गोरी चिनाब और झेलम नदी के संगम तट के दक्षिण में उच्च के किले की ओर किया। 1176 में गोरी ने उच्च के किले को भी जीत लिया था। इन दो विजयों ने मुहम्मद गोरी को अतिउत्साही बना दिया था। सन 1178/79 में उसने एक विशाल सेना एकत्रित कर के गुजरात की तत्कालीन राजधानी अन्हिलवाड़ा की ओर प्रस्थान किया।

रानी नायिका को जब गोरी के कुत्सित विचारों के साथ आगमन की सूचना मिली तो उन्होंने उत्तर के सभी राज्यों से सहायता मांगी किन्तु नरवाला के राजा को छोड़कर किसी भी राज्य ने रानी की सहायता नहीं की। नरवाला नरेश राय ने युद्ध के लिए प्रशिक्षण प्राप्त हाथियों के समूह के साथ सेना की एक टुकड़ी भेजा। गोरी ने सोलंकी राजवंश को आत्मसमर्पण करने को कहा परन्तु नायकी देवी ने युद्ध का आह्वान किया।

गोरी के पास विशाल सेना थी, अनेक युद्ध का अनुभव भी था। उसे लगा वह बड़ी सरलता से एक महिला शासित राज्य पर विजय प्राप्त कर लेगा। किन्तु रानी के अदम्य साहस और सूझबूझ के सामने गोरी के सभी अरमान धूल धूसरित हो गए। रानी ने भौगोलिक क्षेत्र की जानकारी के आधार पर गदरघण्टा के पास के एक पहाड़ी दर्रे को युद्ध स्थल के रूप में चुन लिया क्योंकि वह जानती थी कि यदि युद्ध खुले मैदान में हुआ तो उनकी सेना जो गोरी की सेना की अपेक्षाकृत अत्यल्प है, ज्यादा समय तक टिक नहीं पायेगी। नायिका देवी स्वयं अपने पुत्र के साथ रणभूमि में उपस्थित! रहीं। रानी ने गाजर मूली की भांति गोरी की सेना को काट कर रख दिया। गोरी अपनी जान बचाकर अपने कुछ सैनिकों के साथ वहा से भाग खड़ा हुआ।

अभी इस फिल्म का टीजर ही आया है। फिल्म में भारतीय इतिहास के इस सुनहरे अध्यायन के संग कितना न्याय किया गया है, यह देखने के लिए हम सबको फिल्म की रिलीज का इन्तजार करना होगा।