न्यूज चैनल टीवी 9 भारतवर्ष की लगातार बढ़ती रेटिंग से ब्रॉडकास्टर्स में चिंता, एनबीए ने जांच की मांग की

टीवी9 भारतवर्ष की रेटिंग हाल में काफी बढ़ गई है
टीवी9 भारतवर्ष की रेटिंग हाल में काफी बढ़ गई है

टीवी के खबरिया चैनलों में टीआरपी या व्यूअरशिप को लेकर बड़ी मारा-मारी रहती है. हाल में शुरू हुए खबरिया चैनल टीवी 9 भारतवर्ष ने व्यूअरशिप के मामलें में जबरदस्त तेजी दिखायी है. पर यह तेजी प्रतिस्पर्धी चैनलों और न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) के लिए चिंता का सबब बन गया है.

न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) के अध्यक्ष रजत शर्मा और न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन (एनबीएफ) ने रेटिंग देने वाली संस्था बार्क (ब्रॉडकास्ट ऑडिट रिसर्च काउंसिल ) को इस बारे में चिट्ठी लिखी है. इस खत में टीवी9 भारतवर्ष की रेटिंग में लगातार उछाल पर सवाल खड़ा किया गया है.

पत्र में कहा गया है कि जब दूसरे सभी चैनलों की व्यूअरशिप लगातार गिर रही है तो सिर्फ एक ही चैनल की व्यूअरशिप ( टीवी9 भारतवर्ष) कैसे बढ़ती जा रही है?

एनबीएफ ने व्यूअरशिप के इस उतार-चढ़ाव पर चिंता का इजहार किया है. खत के मुताबिक, पिछले 8 हफ्तों या उससे अधिक के लिए रेटिंग अनुपयोगी रही हैं. विशेष रूप से टीवी 9 भारतवर्ष की रेटिंग असामान्य रही है.

एनबीए के खत में कहा गया है कि सभी चैनलों के 12वें हफ़्ते से 25वें हफ़्ते तक न्यूज़ टाइम स्पेंड (टीएसवी) में 36 फ़ीसद गिरावट आई है. वहीं इसके विपरीत टीवी9 भारतवर्ष की टीएसवी में 59 फ़ीसद की वृद्धि दिखाई गई है.
एनबीए इसे असामान्य मान रहा है.

गौरतलब है कि पुराने टीवी चैनलों को नए चैनलों की तुलना में अधिक महत्व दिया जाता है. हालांकि, इस हफ्ते चीन के साथ भारत की तनातनी की खबरें और अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के मामले टीवी पर थे. इसमें भी बार्क ने पुराने ब्रांड चैनलों को उतना लाभ नहीं दिया है जितना कि टीवी 9 भारतवर्ष को अचानक दिया गया है.

इसके साथ ही टीवी 9 भारतवर्ष की तुलना इसके अपने स्थानीय सिस्टर चैनलों से किया गया. पिछले दो सप्ताह में इसके सभी सिस्टर चैनलों की वृद्धि नकारात्मक रही है. बार्क की रिपोर्ट के मुताबिक़, टीवी 9 भारतवर्ष ने ऑन लोकेशन कवरेज बहुत कम किया है. तो फिर टीवी9 भारतवर्ष की रेटिंग में वृद्धि कैसे हुई?

कई समाचार प्रसारकों ने बार्क को लिखा है कि हर हफ्ते की रेटिंग टेलीविज़न की बुनियादी बातों से जुड़ी नहीं है. उनके मुताबिक, हर सप्ताह के बाद डेटा में हेरफेर किया जा रहा है. इस तरह का हेरफेर, जो बार्क और ब्रॉडकास्टर मिलकर कर रहे हैं, वह पूरी तरह ग़लत है.

पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि टीवी 9 समूह के कई चैनल अतीत में अपने दर्शकों की संख्या के डेटा में हेर-फेर करते हुए पकड़े गए हैं. नतीजतनबार्क ने उनके चैनल डेटा को निलंबित कर दिया था.

हालांकि, टीवी9 के सीईओ वरुण दास ने एनबीए और एनबीएफ के आरोपों का विस्तार से जवाब दिया है.
दास ने लिखा है कि खबरों के कारोबार में जब कोई खिलाड़ी स्थापित होने लगता है तो जमे-जमाए पुराने चैनलों को दु:ख होना लाजिमी है.

दास के मुताबिक, हर बड़ी घटना के दौर में कोई एक चैनल अपने बेहतरीन कवरेज के चलते ज्यादा दर्शक बटोर पाया है. उदाहरण के तौर पर उन्होंने गिनाया है कि भुज भूकंप के दौरान आजतक चैनल का कवरेज, मुंबई बाढ़ का एबीपी न्यूज द्वारा कवरेज, छब्बीस ग्यारह का टाइम्स नाऊ द्वारा कवरेज बताता है कि बड़ी आपदाओं के कवरेज में कोई एक चैनल बाजी मारता है.

दास का कहना है कि लॉकडाउन और चीन के मुद्दों का कवरेज टीवी9 भारतवर्ष ने सबसे बेहतर तरीके से किया, जिसका उसे लाभ मिला है.

हालांकि सभी ब्रॉडकास्टर ने बार्क से निष्पक्ष रूप से जांच की मांग किया. और कहा कि बार्क को अपनी स्वतंत्रता और विश्वसनीयता को बरक़रार रखना चाहिए. भ्रष्ट अधिकारियों के ख़िलाफ़ उचित कार्यवाई की जानी चाहिए.

बार्क ने जवाब में ब्रॉडकास्टर्स द्वारा उठाए गए सारे सवाल को पूरी तरह से नकार दिया है. टीवी 9 भारतवर्ष की साप्ताहिक डेटा और रेटिंग को सही ठहराया है.

बहरहाल, टीवी9 भारतवर्ष अपने व्यूअरशिप के चलते फिर से चर्चा में है. और ऐसा लगता है कि इस खत का नुक्सान होने की बजाए उसे चर्चा में बने रहने का फायदा भी मिल सकता है.