क्या एक मामले की जांच दो राज्यों की पुलिस कर सकती हैं?

रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के पूर्व एजेंट एन के सूद ने सुशांत मामले में अंडरवर्ल्ड का हाथ होने का दावा किया है
रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के पूर्व एजेंट एन के सूद ने सुशांत मामले में अंडरवर्ल्ड का हाथ होने का दावा किया है

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की 14 जून को उनके मुंबई स्थित बांद्रा के अपार्टमेंट में मौत हो गई. इस मौत में संदेह के चलते मुंबई पुलिस जांच कर रही है. 50 से अधिक लोगों का बयान भी दर्ज करवाया जा चुका है.

सुशांत की मौत के मामले को स्थानीय पुलिस यानी मुंबई पुलिस ने एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (एडीआर) दर्ज की. दंड प्रक्रिया संहिता,1973 की धारा 174के मुताबिक़ आकस्मिक मृत्यु, आत्महत्या या अप्राकृतिक मृत्यु होने पर एडीआर दर्ज किया जाता है.

धारा 174 के मुताबिक़ जब पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी को सूचना मिलती है कि किसी व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली है, तब  वह अधिकारी उस स्थान पर जाता है, जहां उस व्यक्ति ने आत्महत्या की है. वहां जा कर एक रिपोर्ट तैयार करता है. उस रिपोर्ट में स्पष्ट मृत्यु का कारण, घाव, चोट, शरीर पर चोट के अन्य निशान सब उस रिपोर्ट में लिखता है.

अधिकारी फिर परिवार के सदस्यों और उन लोगों के बयान दर्ज करता है जो मौत के कारण के पीछे प्रकाश डाल सकते हैं. यदि कोई किसी पर कोई आरोप नहीं लगाता है,  सुसाइड नोट किसी को दोषी नहीं ठहराता है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट इसे आत्महत्या क़रार दे देने पर एसीपी रैंक का अधिकारी एडीआर चरण में इस केस को समाप्त कर देता है.

आम तौर पर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट बता देती है कि  किसी व्यक्ति की मौत आत्महत्या से हुई या गर्दन के आसपास संयुक्ताक्षर के निशान के आधार पर हत्या की गई है. इस रिपोर्ट से पता चल जाता है कि शरीर में जहर था या नहीं, शरीर पर चोट के निशान, मौत का समय.

अगर कोई आत्महत्या करता है और  सुसाइड नोट पाया जाता है, तो पुलिस भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत आत्महत्या का मामला दर्ज कर लेती है. फिर अगर बाद में यह हत्या का मामला मालूम पढ़ता है, तब ऐसे समय एडीआर की रिपोर्ट में हत्या दर्ज किया जाता है. छानबीन शुरू कर दी जाती है.

बता दें सुशांत के पिता के. के. सिंह ने हाल ही में रिया के खिलाफ बिहार पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. सुशांत के परिवार ने जो रिया चक्रवर्ती के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है, उसके मद्देनजर ईडी यह कार्यवाई कर रही है. कुल 15 करोड़ रुपये के लेनदेन के मामले की जांच कर रही है.

अभिनेता की मौत से पहले सुशांत और रिया एक रिश्ते में थे. सुशांत के पिता ने रिया के खिलाफ कई आरोप लगाए हैं, जिसमें उनके बेटे से पैसे लेना और मीडिया को उसकी मेडिकल रिपोर्ट का खुलासा करने की धमकी देना भी शामिल है. सुशांत के परिवार ने रिया पर सुशांत को उनसे दूर रखने का भी आरोप लगाया है.

इस एफआईआर के तहत बिहार पुलिस मुंबई आई. नतीजा यह हुआ कि दोनों राज्यों की पुलिस के बीच तानातानी हो गई. बिहार के एक अधिकारी आईपीएस विनय तिवारी को मुंबई में क्वारैंटाइन कर दिया गया. इसके चलते  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है.

वैसे कोई मामला औपचारिक रूप से सीबीआई जैसी दूसरी एजेंसी को हस्तांतरित किया जा सकता है, लेकिन दो एजेंसियां ​​एक साथ एक ही एफआईआर की जांच नहीं कर सकती हैं. ऐसे मामलों में जहां मनी लॉन्ड्रिंग का मामला सामने आता है, प्रवर्तन निदेशालय एक प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट(ईसीआईआर) को दर्ज करता है और इसकी जांच ख़ुद करता है.

सुशांत सिंह राजपूत मामले में भी, जब उनके पिता ने बिहार पुलिस के पास राजपूत के बैंक खाते से अज्ञात खातों में पैसा स्थानांतरित होने का मामला दर्ज कराया. ईडी ने धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एक ईसीआईआर दर्ज की.

बता दें क़ानून के तहत अगर मुंबई में अपराध हुआ है और परिवार बिहार का है, तो परिवार बिहार के निकटतम पुलिस स्टेशन में जा सकते हैं और एफआईआर दर्ज करा सकते  हैं. लेकिन ऐसे मामले में बिहार पुलिस एक ‘ज़ीरो एफआईआर’ दर्ज करने और उस मामले को मुंबई पुलिस स्टेशन में स्थानांतरित करने के लिए बाध्य है जिसके अधिकार क्षेत्र में अपराध हुआ है.

आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 154 के तहत ऐसे मामले में एक पुलिस अधिकारी एफआईआर दर्ज करने के लिए बाध्य है.

ज़ीरो एफआईआर का मतलब, जब कोई व्यक्ति एफआईआर दर्ज करने के लिए एक पुलिस स्टेशन से दूसरे पुलिस स्टेशन तक नहीं जा सकता है, तब ऐसे समय कानून ने देश भर के किसी भी पुलिस स्टेशन को एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी है.इसी के तहत बिहार में मामला दर्ज किया गया था.

सुशांत मामले में, एफआईआर दर्ज करने के बाद, बिहार पुलिस स्थानीय मामले को स्थानांतरित करने के बजाय मामले की जांच करने के लिए खुद मुंबई आ गई, जो कि क़ानून ग़लत है. लेकिन बिहार पुलिस के मुताबिक़ मुंबई पुलिस राजपूत की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है. इसलिए बिहार पुलिस ख़ुद जांच करने मुंबई आई.

इस पर मुंबई के पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह ने कहा कि उन्होंने अब तक 56 बयान दर्ज किए हैं, लेकिन किसी पर भी अभी तक कोई आरोप नहीं साबित हुआ है.

इस मामले को लेकर रिया चक्रवर्ती ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. कहा कि बिहार पुलिस से एफआईआर मुंबई पुलिस को ट्रांसफर की जाए.  इस पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट लेगी.