हास्य अभिनेता ‘सूरमा भोपाली’ यानी की जगदीप को पुरी दुनिया जानती हो, पर ‘शोले’ के अलावा भी जगदीप ने कई फिल्मों में बेहतरीन हास्य अभिनेता का किरदार निभाया है। जगदीप बचपन में ही बतौर बाल कलाकार फिल्मों से जुड़ गए थे। विभाजन के दौरान पाकिस्तान में अपना घर और सबकुछ छोड़छाड़ कर जब अपनी अम्मी के साथ वे मुंबई आए तो बस वह महज छह-सात साल के थे। इतनी गरीबी थी कि मां को एक यतीमखाने में खाना बनाने की नौकरी करनी पड़ी।

जगदीप को मां को काम करते देखना बेहद बुरा लगता था। जगदीप का बचपन काफी गरीबी भरा रहा । एक दिन उन्होंने देखा कि सड़क पर रह रहे दूसरे बच्चे गुजारे के लिए एक टिन की फैक्ट्री में काम करते थे फिर जगदीप ने भी फैक्ट्री में काम करने का फैसला किया और काम करना शुरू कर दिया। यही नहीं घर लौट कर मां और बेटा मिल कर पतंग बनाते और उसे बेच कर पैसे कमाते।

अब इसे इत्फाक कहें या किसमत, जगदीप को एक दिन सड़क पर एक आदमी ने कहा कि तुम मेरे साथ चल कर एक काम करो, मैं उसके बदले तुम्हे तीन रुपए दूंगा। इतने रुपए जगदीप ने कभी नहीं कमाए थे। वे उसके साथ जाने को तैयार हो गए। वहां जाकर पता चला कि वहां फिल्म की शूटिंग हो रही थी और सीन में कुछ बच्चों की जरूरत थी।

उस दिन से जगदीप कि किस्मत चमक गई क्योंकि फिल्म में असिस्टेंट डाइरेक्टर यश चोपड़ा की नजर जगदीप पर पड़ गई। उन्हें फिल्म में ऐसे बच्चे की जरूरत थी जिसे उर्दू बोलनी आती हो। क्योंकि जगदीप की मातृभाषा उर्दू थी। उन्होंने फटाफट बोल दिया। बस यश चोपड़ा ने उसके सिर पर हाथ रख कर कह दिया, तुम जहीन बच्चे हो। तरक्की करोगे। फिल्मों में काम करो। और फिर उस दिन के बाद से जगदीप ने फिल्मों का रूख कर लिया और फैक्ट्री में काम करने कभी नहीं गए।