आज ही के दिन रिलीज हुई थी एक्स्ट्रा मैरिटल अफ़ेयर पर बनी हिन्दी क्लासिक ‘सिलसिला’

Silsila 1981 Amitabh Bachchan Rehka Jaya Bhaduri

एक झूठी कहानी जो पर्दे पर सच्ची लगती है, उसका नाम है, जया, रेखा और अमिताभ बच्‍चन के प्रेम त्र‍िकोण पर बनी थी फिल्म सिलसिला जो 14 अगस्त 1981 में आई और आज भी इस फिल्म पर बात करना इस फिल्म के बारे में पढ़ना अच्छा लगता है.

रेखा और जया बच्चन – अमिताभ और रेखा के अफेयर कि खबरे तो लगभग सभी ने सुनी होंगी.

जया, अमिताभ और रेखा का लव ट्राएंग्ल हमेशा से ही सुर्खियो में बना रहा है. “सिलसिला” फिल्म को रेखा और अमिताभ की आखिरी फिल्म के तौर पर याद किया जाता है.

यह फिल्म इसलिए भी चर्चा में रही थी क्योकि अमिताभ और जया के निजी रिशते की केमेस्ट्रि लोगो को देखने को मिली थी ,

फूल खामोश रहकर भी अपने रंग और खुशबू से बहुत कुछ कह देता है

वो बात जो लफ्जों में अदा हो जाये …वो बात ही क्या है

हम गायब होने वालो में से नही है ….जहाँ जहाँ से गुज़रते हैं जलवा दीखाते हैं … दोस्त तो क्या दुश्मन भी याद रखते हैं.

आज तक तो ग़म-ए -रोज़गार से दामन नहीं छोड़ सका …आप से मिलने के बाद ग़म -ए -दिल से रिश्ता हो जाये

सवाल अगर ख़ुद जवाब हो … तो सवाल ,नहीं रहता

जो जितना दूर हो … उतना ही पास रहता है

दो लफ्ज़ हैं … तनहा ,अकेले …लकिन एक साथ लिख़ दिया जाये एक दुनिया ,एक कायनात,एक तलाश ,एक लम्हा ,एक ख़ुशी बन सकते हैं

पूरी फिल्म में सुन्दरता आप देख सकती हैं सुंदर लोकशन ,सुंदर मधुर गाने ,

रेखा ने कहा, ‘ये रात है.. न तुम्हारी जुल्फें खुली हुई हैं.. है चांदनी या मेरी नजर से तुम्हारी राते धुली हुई हैं। ये चांद है या तुम्हारा कंगन.. सितारें हैं या तुम्हारा आंचल.. हवा का झोका है या तुम्हारे बदन की खुशबू.. ये पत्तियों की सरसराहट.. कि तुमने चुपके से कुछ कहा है। ये सोचता हूं मैं कबसे गुमसुम.. कि जबकि मुझको भी खबर है कि तुम नहीं हो कहीं नहीं हो.. ‘मगर ये दिल है कि कह रहा है तुम यहीं हो

वक़्त जिनमे तुम्हारे लबों का रंग नहीं ….वो वक़्त गुज़रा नहीं …ठहर गया हैं कहीं

कोई आशिक़ ही समझ सकता है ये सिलसिला