Review: सिल्विया के शहर में

in the city of sylvia filmbibo review

स्पेनिश फिल्मकार जोसे लुईस गुएरिन निर्देशित इस फिल्म में ठोस कथा या भारीभरकम घटनाएं नहीं है यह फिल्म वायवीय है, और एक तरह का मायावी अहसास देती है यह फिल्म ब्रेसांन फिल्मो की तरह लय और हिचकॉक की तरह एक रहस्य भी लिए हुए है, अपने दर्शक से अति धैर्य और सिनेमा के लिए जुनूनी प्रेम की मांग करती है,उसी तरह जैसे कला दीर्घा में किसी चित्र को घंटो निहारना या संगीत कि किसी धुन को घंटो मन्त्र मुग्ध होकर सुनना, यह फिल्म सिनेमा की जादुई भाषा से आपके अन्दर उतरती जायेगी|

फिल्म की शुरूआत नाट्य कला के कैफे से होती है जहां गुनगुनाती धुप में युवा अकेले शांत बैठे है या समूहों में गपशप कर रहे है, उनके पास समय का कोई खटका नहीं है। 

फिल्म का नायक (शायद एक चित्रकार जिसका फिल्म में कोई नाम नहीं है ) अपनी स्केच बुक में उन चेहरों को बना रहा है, लम्बे समय तक नायक की दृष्टि से हम युवतियों के चेहरे, उनकी कामुक गर्दन में झूलती लटे, उनकी बातचीत को देखते है, पर संवाद अनुपस्थित है, भीड़ का हल्का कोलाहल है और इसी में शामिल है कैफे में वायलिन बजाती स्त्री की एक धुन, और इस तरह फिल्म के शुरुवाती 20 मिनिट दृश्य और ध्वनि के ताने बाने के सम्मोहन में आपको जकड़ने लगते है फिर नायक उठ कर एक युवती से बात करने उसके पीछे चलने लगता है जैसे वह उसे पहले से जानता है, युवती स्ट्रासबर्ग की गलियों में आगे चलती जा रही है पीछे रहे युवक से अनजान, पीछा करने के दृश्य से फिल्म में एक रहस्य भी छाने लगता है और फिल्म अपनी उसी लय से एक नये आयाम में जाने लगती है, नायक उस युवती तक पहुँच कर उसे सिल्विया नाम से संबोधित करता है और उससे 6 वर्ष पुरानी अपनी मुलाक़ात का जिक्र करता है, पर युवती उसे अपने सिल्विया होने, उसे पहचानने या किसी मुलाक़ात से इंकार करती है बल्कि वह पीछा किये जाने से विचलित और घबराई हुई है, इस तरह फिल्म के मध्य में आकर पता चलता है की अब तक जो हमने देखा वह क्या था, नायक को अगले दिन भी इस शहर में हम देखते है पर अब यह जानते हुए की वह किसी सिल्विया नाम की लड़की के तलाश में है जिसे वह कई साल पहले मिला था। यह फिल्म लगभग 3-4 संवादों के साथ  प्रेम, रहस्य, तलाश और स्ट्रासबर्ग का सिटी और साउंड स्केप है। 

in the city of sylvia spanish posterसन 2007 में बनी 84 मिनिट अवधि की इस फिल्म का स्क्रीनप्ले स्वयं गुएरिन ने लिखा है जेवियर लफ्फिते नायक , पिलर लोपेज़ डे आयाला नायिका तथा नताशा ब्रेयर सिनमेटोग्रफार है, फिल्मांकन पूर्वी फ्रांस के शहर स्ट्रासबर्ग में किया गया है इसे वेनिस फिल्म महोत्सव के अलावा कई महत्वपूर्ण फिल्म महोत्सवो में प्रदर्शित किया गया है एवं इसे कल्ट दर्जे की फिल्म माना जाता है

स्पेनिश फिल्मकार जोसे लुईस गुएरिन अपनी विशेष शैली के लिए विश्व में जाने जाते हैं, उनकी फिल्में फिक्शन और नॉन फिक्शन का अतिक्रमण करती है, वे आर्ट इंस्टालेशन फिल्म, शॉर्टफिल्म, डॉक्युमेंट्री सभी तरह की फिल्में बनाते हैं, गुएरिन ने इस फिल्म से सम्बंधित एक फिल्म और बनायी है सम फोटो इन सिटी ऑफ सिल्विया ….एंड अदर जो फिल्मकार / फोटोग्राफर की निजी डायरी के जैसा है जिसमे वह कई वर्ष पूर्व मिली एक लड़की को उसी शहर में वापस आकर तलाश रहा है इसे केवल ब्लेक एंड वाईट फोटो और बैकग्राउंड में गुएरिन की कमेंट्री से बनाया गया  है. उनकी अन्य महत्वपूर्ण फिल्मो में गेस्ट, कंस्ट्रक्शन, ट्रेन्स ऑफ शैडो, इनिस्फ्री है जो फिल्म महोत्सवो की चहेती फिल्मे मानी जाती है, मेमोरीज ऑफ मॉर्निग (47 मि.) एवंटू लेटर्स फॉर एना’ (28 मी.) उनकी ताजा डॉक्युमेंट्री फिल्म है.

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तुषार वाघेला छत्तीसगढ़ के प्रमुख फिल्मकार और विजुअल आर्टिस्ट हैं, उनका जन्म 6 जनवरी 1975 को दुर्ग, छत्तीसगढ़ में हुआ था। उनकी कला के मुख्य विषय-वस्तु ज्यादातर छत्तीसगढ़ राज्य पर ही केन्द्रित होते हैं। अभी हाल ही में तुषार ने ‘द ग्रे’ नामक हिंदी फीचर फिल्म का निर्माण किया है जो छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभाव और पलायन पर आधारित है। वर्तमान में तुषार xray सीरिज में कार्य कर रहें हैं। उनकी पेंटिंग सीरीज़ छत्तीसगढ़ डायरीज में छतीसगढ़ के ग्रामीण एवं शहरी जन-जीवन को सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक दृष्टिकोण से वे चित्रित करती है। उनकी फिल्में बहुत ही अलग अलग विषयों पर है जैसे- द होम हमारे घरों में साथ रहने वाले सूक्ष्म जीव – जगत और मनुष्य के आधिपत्य पर, दण्डकारण्य: द जंगल ऑफ पनिशमेंट बस्तर के नक्सल हिंसाग्रस्त क्षेत्र की त्रासदी पर, फैंटम ऑफ़ ए फर्टाइल लैण्ड भू-अधिग्रहण एवं किसानो की व्यथा पर केन्द्रित है, तथा द घोस्ट टेक्सोनोमी भारतीय अर्थव्यवस्था पर आधारित है, वहीँ शैडो ऑफ़ थॉट्स एक चित्रकार एवं लेखक पर केन्द्रित है। प्रिजनर्स ऑफ़ मून दो व्यक्तियों के बिछड़ने की कथा है। उनकी फिल्में 50 से अधिक अन्तराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों, संग्रहालयों, आर्ट गैलरियों में प्रदर्शित की जा चुकी है