Breath into the shadow: फुल फ्री हों तभी वेस्ट करें टाइम, अभिषेक बच्चन ने किया निराश

“A man who did all he could to save his family”

“एक आदमी को वह सब करना चाहिए जो वो आपने परिवार को बचाने के लिए कर सकता है” बस इसी पर बन गयी है यह ब्रीथ इंटू द शैडो। ब्रीथ इंटू द शैडो हाल ही में अमेज़न प्राइम पर आई एक नई वेब सिरीज़ है। इसका निर्देशन मयंक शर्मा ने किया है और स्टोरी मयंक शर्मा, भावना अय्यर और विशाल तुली ने लिखी है।

इस सिरीज़ में 12 एपिसोड्स हैं और हर एपिसोड 40 से 45 मिनट का है जिसे एक वक़्त के बाद आपके लिए झेलना नामुमकिन होगा। यह 2018 जब वेब सिरीज़ की शुरुआत थी तब आई थी ‘ब्रीथ’ जिसे लोगों ने खूब पसंद किया था। ब्रीथ में आर माधवन के साथ अमित साध भी नज़र आए थे। कहानी का प्लॉट लगभग एक ही है। ब्रीथ में माधवन अपने बेटे के किडनैप होने के बाद उसे बचाने की कहानी है वहीं सीज़न 2 में अविनाश सब्रवाल (अभिषेक बच्चन) की बेटी के किडनैप होने हो जाती है।

सिरीज़ के कुछ एपिसोड बाद ही आप उसे झेलने लायक नहीं रहेंगे। कहानी आपको लगभग 7 वें एपिसोड में समझ आ जाएगी फिर कुछ ही डोट्स बचेंगे जिसे जोड़ने के लिए आप पूरा सिरीज़ देख लें। बाक़ी देख कर आपको सिवाय समय के बरबादी के कुछ नहीं मिलेगा।

अविनाश सब्रवाल (अभिषेक बच्चन) एक मनोवैज्ञानिक है वहीं आभा (नित्या मेनन) किसी होटल में शेफ है। यह एक छोटा सा परिवार दिल्ली में रहता है। कहानी शुरू होती है कि अविनाश और आभा की बेटी सिया (इवाना कौर) एक बर्थडे पार्टी से किडनैप हो जाती है। कई महीने बीत जाते हैं लेकिन वो कहाँ है इसकी कोई खबर नहीं मिल पाती है।

अचानक से 9 महीने बाद किडनैपर आई पैड के जरिये अविनाश और आभा को उसकी बेटी के महीनो के वीडियो क्लिप भेजता है जिसमें वो बिलकुल ठीक है उसके खाने पीने की आदतें बादल गयी हैं। सिया ‘जुविनाइल डियाबेटिक’ है कुछ घंटे में उसे दिन में चार बार इंसुलिन के इंजेक्शन लगते हैं किडनैपर इस बात का भी ध्यान रखता है और तो और उसने सिया का ध्यान रखने के लिए एक और गायत्री मिश्रा (रेशम श्रीवर्धन) को किडनैप किया है। अविनाश और आभा से किडनैपर किसी भी रैंडम आदमी का नाम पता भेज उसे मरवाने की मांग करता है।

आभा और अविनाश देखते देखते माता पिता से सिरियल किलर बन जाते हैं। उनसे ऐसे लोगों के मर्डर की मांग की जाती है जो की रावण के दस सर और दस गुणों पर आधारित है जैसे क्रोध, भय और हवस आदि। ये रावण की मिथ्या कहानी में कोई जान नहीं डाल पता है बल्कि और डरा देता है कि कहीं ये पूरे दस सर तक तो नहीं चलेगी।

कई कहानियाँ एक साथ चलती है और सब एक दूसरे से आ कर सबकी कड़िया जुड़ जाती है। कबीर सावंत (अमित साध) क्राइम ब्रांच में ऑफिसर हैं लेकिन वो भी जेल में हैं। इसके पीछे भी एक कहानी है जिसमें मेघना (प्लाबीता बोरठाकुर) ग़लती से होटल की छत से गिर जाती हैं।

अभिषेक बच्चन ने मेहनत तो की है लेकिन रोल में फिट बैठ नहीं रहे। वही अमित साध ने अपने रोल को खूब अच्छे से निभाया है। स्त्रियों का किरदार खास है इसमें। आभा एक सेल्फ डिपेंडेंट शेफ है तो वहीं मेघना भी कार्टूनिस्ट है। नताशा (श्रुति बापना) का भी किरदार दिलचस्प है । वो भी एक मजबूत किरदार के रूप में उभर कर सामने आती हैं। वहीं ‘चोक्ड’ की हेरोइन (शियामी खेर) शिर्ले जब जब पर्दे पर आती हैं अपना जलवा बिखेर देती है। वहीं क्राइम ब्रांच में की सीनियर ऑफिसर ज़ेबा रिजवी (श्रद्धा कौल) अपने पावर और पोजीशन के लिए लड़ती हुई नज़र आती हैं।

सपोर्टिंग रोल में प्रकाश कांबले (ऋषिकेश जोशी) ने भी अच्छी एक्टिंग की है लेकिन उनकी पुरानी दोस्त जिसका ढाबा है उसके साथ के चक्कर समझ नहीं आता। जयप्रकाश (श्रीकांत वर्मा) का किरदार भी भी अच्छा है।

बैकग्राउंड म्यूज़िक से आपको डराने कि कोशिश की जाएगी लेकिन आपको डर नहीं लगेगा। किडनैपर की आवाज़ सुनने पर आपके कानों में दर्द हो सकता है। स्क्रीनप्ले अच्छा है।