Review: हॉलीवुड टाइप थ्रिलर पसंद है तो ‘हंसमुख’ आपके लिए ही है

क्या आप थ्रिलर फ़िल्मों के दीवाने हैं? क्या हॉलीवुड की जोकर जैसी फ़िल्में पसंद है? अगर आपका जवाब ‘हां’ है तो इस वेब सिरीज़ को आप ज़रूर पसंद करेंगे.

कहानी शुरू होती है उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से. यहां हंसमुख नाम का युवक रहता है. गांव के लोगों को अपने चुटकुले सुनाकर हंसाता है. कॉमेडी शो जीतना चाहता है. उसे कामयाब कॉमेडियन बनना है, लेकिन उसका गुरु गुलाटी उसे मौके तो नहीं देता, बल्कि बेइज्जती भर-भर कर देता है. स्टेज पर हो या फिर घर में,गुलाटी, हंसमुख को हर जगह बेइज्जत करता है.

एक दिन उत्तेजना में आकर वह अपने गुरु गुलाटी की हत्या कर देता है. इसके बाद वो पहली बार स्टेज पर जाता है. लोगों को हंसाना शुरू करता है. यह शो हिट हो जाता है.

यहीं से शुरू होता है हंसमुख की कॉमेडी का सफ़र. उसकी मानसिकता ऐसी हो जाती है कि खून करना ही उसकी ताकत है, उसके बिना वह अच्छे से कॉमेडी नहीं कर सकता है. किसी का खून करने के बाद ही  उसे स्टेज में जाने की हिम्मत मिलती है. आत्मविश्वास आ जाता है.

लेकिन सवाल ये कि अब आगे क्या? आगे होता ये है कि हंसमुख को बिना मर्डर किए परफॉरमेंस में फील ही नहीं आती.

फील वाला मामला

ये फील वाला मामला है न बड़े लेवल का मामला है. शाहरुख़ खान को भी 555 नंबर की गाड़ी में बैठकर अच्छा फील होता है. वहीं क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर भी फील आने के लिए पहले बाएं पैर का जूता पहनते हैं. इसी तरह हंसमुख भी कॉमेडी करने से पहले क़त्ल करता है, ताकि कॉमेडी में फील आए.

लेकिन अगर कॉमेडी की दुनिया में नाम कमाना है. टीवी के मशहूर शो ‘कॉमेडी बादशाहो’ तक जाना है, मुंबई का स्टार बनना है. ये सब होगा कैसे? आखिर बाज़ार में बलि देने के लिए मुर्गे की तरह बकरे तो मिलते नहीं न!

इसमें हंसमुख की मदद करता है उसका दोस्त जिमी. जो हंसमुख का मैनेजर भी है. अब सिलसिला कुछ यूं चलता है कि हंसमुख क़त्ल करता है. जिमी इसमें पूरी मदद करता है. मृत्यु शरीर को ठिकाने लगाने का काम जिमी करता है. अपने होमटाउन सहारनपुर में उसे काॅमेडियन के तौर पर सक्सेज पाने के बाद वो दोनों मुंबई को रवाना हो जाते हैं. यहां वो अपने हर शो से पहले एक हत्या करता है.

वहीं हसमुख के पीछे पुलिस पड़ जाती है. अब एक तरफ शो, दूसरी तरफ मर्डर. इस समस्या से कैसे बचता है हंसमुख या फिर पुलिस के हाथ उसके गले तक पहुंच जाते हैं? यह जानने आपको सीरीज़ देखनी होगी.

क्या आप थ्रिलर फ़िल्मों के दीवाने हैं? क्या हॉलीवुड की जोकर जैसी फ़िल्में पसंद है? अगर आपका जवाब ‘हां’ है तो इस वेब सिरीज़ को आप ज़रूर पसंद करेंगे.

सिनेमा में ब्लैक कॉमेडी एक ऐसा जॉनर है जिसे हमेशा सराहना मिली है. मर्डर थ्रिलर के बीच में दर्शकों को हंसाने की कला हर लेखक और निर्देशक में नहीं होती है, लेकिन इस वेब सीरीज में निर्देशक निखिल गोंसाल्विस ने ये कमाल कर दिखाया. निर्देशक निखिल ने छोटे शहर से लेकर बड़े शहरों की चकाचौंध को बखूबी दिखाया है.

अब बात एक्टिंग की करते हैं. ‘हंसमुख’ का किरदार वीर दास ने बख़ूबी निभाया है. अपनी एक्टिंग से इस वेब सिरीज़ में चार चांद लगा दिया है. इससे पहले 2011 में आई फ़िल्म ‘ डेल्ही बेली’ में भी शानदार अभिनय से लोगों का दिल जीता था. वहीं ‘जिमी’ की भूमिका में रणवीर शौरी ने शानदार परफॉर्मेंस दी है.

इसके अलावा छोटे-छोटे किरदारो में नज़र आए शांतनु घटक, रजा मुराद, अमृता बागची और इनामुल हक ने भी अपनी-अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है. हालांकि, मनोज पाहवा, रवि किशन और सुहैल नैय्यर के किरदार को थोड़ा और बेहतर किया जा सकता था.

कुल मिलाकर इस सीरीज़ की सबसे अच्छी बात है इसकी एक्टिंग.

इंडियन कंटेंट के हिसाब से नयापन 

सिनेमेटोग्रॉफी की बात करें तो आकाश अग्रवाल ने बेहतरीन काम किया है. नील अधिकारी ने अच्छा संगीत प्रस्तुत किया है. कहानी के साथ संगीत ने अच्छी वफ़ादारी निभायी है.

इस वेब सीरीज में काफ़ी कमियां हैं. शुरू के चुटकुले मन मोह लेते हैं. मन करता है बस देखते जाओ. लेकिन एक शानदार शुरुआत के बाद कहानी की रफ्तार धीमी होने लगती है. यहां लेखन में थोड़ी कमी महसूस होती है और एक पटकथा जिसे लगभग सात या आठ एपिसोड में लपेटा जाना चाहिए था, उसे बेवजह बढ़ाया गया.

बार-बार एक ही चुटकुले को सुनकर थोड़ा बोरियत भरा लगता है. चुटकुलों में बदलाव करके नए-नए चुटकुलों को शामिल करना चाहिए था.

एक बात और भतीजे पर फिदा चाची वाला एंगल भी सीरीज को कमजोर करता है.

‘हंसमुख’ को देखने का ओवरऑल अनुभव ये है कि ये इंडियन कॉन्टेंट के लिहाज़ से थोड़ा नयापन देती है.

सीरीज में एक अच्छी बात ये है कि इसे इस ढंग से बनाया गया है कि दर्शक ये जानने के लिए कि आगे क्या होगा? इसके लिए अगला सीज़न ज़रूर देखेगा.

‘हंसमुख’ कॉमेडी से दूर, लेकिन थ्रिलर से भरपूर है. थ्रिलर फ़िल्मों के शौक़ीन हो, तो इस सीरीज़ को ज़रूर देखनी चाहिए.

फ़िल्म: हंसमुख

कास्ट: वीर दास, रणवीर शौरी, इनामुल हक, अमृता बागची, सुहैल नैयर, शांतनु घटक, मनोज पाहवा, रजा मुराद और रवि किशन.

निर्देशन: निखिल गोंसाल्विस
पटकथा: निखिल आडवाणी, वीर दास, निखिल गोंसाल्विस, नीरज पांडे

संगीत: नील अधिकारी

कैमरा: आकाश अग्रवाल

प्लेटफार्म: नेटफ्लिक्स